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कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 9 प्रकाश – परावर्तन तथा अपवर्तन: Hindi medium नोट्स और 8 प्रश्न-उत्तर
NCERT की कक्षा 10 की हिंदी माध्यम की विज्ञान पाठ्यपुस्तक विज्ञान का नौवाँ अध्याय "प्रकाश – परावर्तन तथा अपवर्तन" है, पेज 148 से 177 तक। इस अध्याय में दो सूत्र लगभग एक जैसे दिखते हैं और एक चिह्न परिपाटी ज़्यादातर अंक तय करती है। यह गाइड दो काम करती है:
- अध्याय के मुख्य विचारों को, किताब के अनुभागों के क्रम में, छोटे नोट्स में समझाती है;
- अंत में हमारे अपने 8 प्रश्न देती है, पूरे हल के साथ।
पाठ्यपुस्तक साथ में खुली रखें। यहाँ की व्याख्याएँ, उदाहरण और प्रश्न हमारे अपने हैं; अंतिम बात पाठ्यपुस्तक की ही मानें। अंग्रेज़ी में इसी अध्याय के नोट्स चाहिए, तो Class 10 Light notes देखें।
यह गाइड सीधे हिंदी में लिखी गई है, पर किसी हिंदी-माध्यम शिक्षक ने अभी इसकी भाषा नहीं जाँची है (native review pending)।
परीक्षा में यह अध्याय
CBSE ने 2026-27 के लिए कक्षा 10 विज्ञान की वार्षिक परीक्षा 80 अंकों की रखी है। यह अध्याय इकाई III, "Natural Phenomena", में आता है, जिसके कुल 12 अंक हैं, और यही अंक "मानव नेत्र तथा रंगबिरंगा संसार" के साथ बँटते हैं (CBSE पाठ्यक्रम, पेज 4)। पाठ्यक्रम में इस अध्याय से गोलीय दर्पण और उनके प्रतिबिंब, दर्पण सूत्र (व्युत्पत्ति नहीं), आवर्धन, अपवर्तन के नियम, अपवर्तनांक, गोलीय लेंस और उनके प्रतिबिंब, लेंस सूत्र (व्युत्पत्ति नहीं), आवर्धन और लेंस की क्षमता शामिल हैं (पेज 5)। CBSE अध्याय-वार अंक नहीं देता।
1. परावर्तन और गोलीय दर्पण (9.1-9.2, पेज 149-151)
- परावर्तन के दो नियम हर तरह के परावर्तक पृष्ठ पर, गोलीय पृष्ठ पर भी, लागू होते हैं: आपतन कोण = परावर्तन कोण, और आपतित किरण, अभिलंब तथा परावर्तित किरण एक ही तल में रहते हैं (पेज 149)।
- समतल दर्पण का प्रतिबिंब हमेशा आभासी और सीधा होता है, साइज़ में बिंब जितना, दर्पण के पीछे उतनी ही दूरी पर, और पार्श्व परिवर्तित (दायाँ-बायाँ उलटा) (पेज 149)।
- जिस दर्पण का परावर्तक पृष्ठ किसी गोले का हिस्सा हो, वह गोलीय दर्पण है। परावर्तक पृष्ठ अंदर की ओर (गोले के केंद्र की ओर) मुड़ा हो तो अवतल दर्पण, बाहर की ओर उभरा हो तो उत्तल दर्पण (पेज 149-150)। चम्मच का भीतरी भाग अवतल जैसा और पीछे का उभरा भाग उत्तल जैसा काम करता है।
- दर्पण के शब्द (पेज 150-151):
| शब्द | चिह्न | अर्थ |
|---|---|---|
| ध्रुव | P | परावर्तक पृष्ठ का केंद्र-बिंदु, दर्पण पर ही |
| वक्रता केंद्र | C | उस गोले का केंद्र जिसका दर्पण हिस्सा है; दर्पण का भाग नहीं। अवतल में सामने, उत्तल में पीछे |
| वक्रता त्रिज्या | R | उस गोले की त्रिज्या; दूरी PC |
| मुख्य अक्ष | P और C से होकर जाने वाली सीधी रेखा; ध्रुव पर दर्पण के लंबवत | |
| मुख्य फोकस | F | अवतल: मुख्य अक्ष के समांतर किरणें परावर्तन के बाद यहाँ मिलती हैं। उत्तल: किरणें यहाँ से आती हुई लगती हैं |
| फोकस दूरी | f | ध्रुव से मुख्य फोकस तक की दूरी |
| द्वारक | परावर्तक पृष्ठ की गोल किनारी का व्यास |
- छोटे द्वारक वाले दर्पण के लिए R = 2f, यानी F, ध्रुव और वक्रता केंद्र के ठीक बीच में होता है (पेज 151)।
2. अवतल और उत्तल दर्पण के प्रतिबिंब (9.2.1-9.2.2, पेज 151-156)
अवतल दर्पण में प्रतिबिंब इस पर निर्भर है कि बिंब P, F और C के सापेक्ष कहाँ है (सारणी 9.1, पेज 152):
| बिंब कहाँ | प्रतिबिंब कहाँ | साइज़ | प्रकृति |
|---|---|---|---|
| अनंत पर | F पर | बिंदु जैसा, बहुत छोटा | वास्तविक, उलटा |
| C से दूर | F और C के बीच | छोटा | वास्तविक, उलटा |
| C पर | C पर | बराबर | वास्तविक, उलटा |
| C और F के बीच | C से दूर | बड़ा | वास्तविक, उलटा |
| F पर | अनंत पर | प्रतिबिंब नहीं बनता | |
| P और F के बीच | दर्पण के पीछे | बड़ा | आभासी, सीधा |
- उत्तल दर्पण हर स्थिति में दर्पण के पीछे, P और F के बीच, आभासी, सीधा और छोटा प्रतिबिंब बनाता है (बिंब अनंत पर हो तो F पर, बिंदु जैसा) (सारणी 9.2, पेज 155-156)।
- किरण आरेख के लिए किन्हीं दो किरणों का कटान काफ़ी है। आसान किरणें: मुख्य अक्ष के समांतर किरण (परावर्तन के बाद F से होकर, या उत्तल में F से आती हुई लगे), F से होकर जाने वाली किरण (परावर्तन के बाद समांतर), C से होकर जाने वाली किरण (उसी रास्ते लौटती है), और ध्रुव पर तिरछी पड़ने वाली किरण (मुख्य अक्ष से बराबर कोण बनाकर लौटती है) (पेज 153-154)।
- अवतल दर्पण के उपयोग: टॉर्च, सर्चलाइट और गाड़ियों की हेडलाइट में समांतर तेज़ किरण-पुंज के लिए; दाढ़ी बनाने के दर्पण और दंत चिकित्सक के दर्पण में बड़ा प्रतिबिंब देखने के लिए; सौर भट्टी में धूप एक जगह इकट्ठा करने के लिए (पेज 155)।
- उत्तल दर्पण के उपयोग: गाड़ियों के पश्च-दृश्य (साइड) दर्पण, क्योंकि प्रतिबिंब हमेशा सीधा रहता है और बाहर को उभरा होने से पीछे का बड़ा क्षेत्र दिखता है (पेज 156)।
3. नई कार्तीय चिह्न परिपाटी (9.2.3, पेज 157)
सारे आंकिक प्रश्न इसी पर टिके हैं, इसलिए इसे एक बार ठीक से याद कर लें:
- बिंब हमेशा दर्पण (या लेंस) के बाईं ओर रखा जाता है, यानी प्रकाश बाएँ से आता है।
- सारी दूरियाँ दर्पण के ध्रुव से (लेंस में प्रकाशिक केंद्र से) मापी जाती हैं।
- दाईं ओर की दूरी धनात्मक, बाईं ओर की ऋणात्मक; मुख्य अक्ष से ऊपर की ऊँचाई धनात्मक, नीचे की ऋणात्मक।
- इसलिए बिंब-दूरी u लगभग हमेशा ऋणात्मक होती है। अवतल दर्पण की f ऋणात्मक, उत्तल दर्पण की धनात्मक; उत्तल लेंस की f धनात्मक, अवतल लेंस की ऋणात्मक (पेज 157, 171)।
4. दर्पण सूत्र और आवर्धन (9.2.4, पेज 157-158)
- दर्पण सूत्र: 1/v + 1/u = 1/f, जहाँ u बिंब-दूरी, v प्रतिबिंब-दूरी और f फोकस दूरी है। यह हर गोलीय दर्पण और बिंब की हर स्थिति के लिए है; बस मान चिह्न के साथ रखने हैं (पेज 158)।
- आवर्धन: m = h'/h = −v/u। बिंब की ऊँचाई h धनात्मक ली जाती है।
- m ऋणात्मक तो प्रतिबिंब वास्तविक और उलटा; m धनात्मक तो आभासी और सीधा। |m| > 1 बड़ा, |m| < 1 छोटा, |m| = 1 बराबर (पेज 158)।
5. प्रकाश का अपवर्तन और काँच का स्लैब (9.3-9.3.1, पेज 160-162)
- प्रकाश एक पारदर्शी माध्यम से दूसरे में तिरछा जाए तो उसकी दिशा बदल जाती है। यही अपवर्तन है। पानी में आधी डूबी पेंसिल का टेढ़ा दिखना, टंकी की तली का ऊपर उठा दिखना और काँच की सिल्ली के नीचे अक्षरों का उठा दिखना, सब इसी के उदाहरण हैं (पेज 160)।
- आयताकार काँच के स्लैब में (चित्र 9.10, पेज 162): हवा से काँच में जाते समय किरण अभिलंब की ओर मुड़ती है; काँच से हवा में निकलते समय अभिलंब से दूर। दोनों फलकों पर मुड़ना बराबर और उलटा है, इसलिए निर्गत किरण आपतित किरण के समांतर निकलती है, पर थोड़ी खिसक जाती है। इस खिसकाव को पार्श्व विस्थापन कहते हैं।
6. अपवर्तन के नियम और अपवर्तनांक (9.3.2, पेज 163-165)
- पहला नियम: आपतित किरण, अपवर्तित किरण और आपतन बिंदु पर अभिलंब, तीनों एक ही तल में होते हैं।
- दूसरा नियम (स्नेल का नियम): किसी एक रंग के प्रकाश और माध्यमों के एक जोड़े के लिए sin i / sin r = स्थिरांक। यह स्थिरांक दूसरे माध्यम का पहले के सापेक्ष अपवर्तनांक है (पेज 163)।
- अपवर्तन का कारण है प्रकाश की चाल बदलना। निर्वात में प्रकाश की चाल 3 × 10⁸ m/s है, हवा में लगभग उतनी ही, काँच और पानी में काफ़ी कम (पेज 163)।
- दूसरे माध्यम (2) का पहले (1) के सापेक्ष अपवर्तनांक: n₂₁ = v₁ / v₂, यानी पहले में चाल ÷ दूसरे में चाल। हवा या निर्वात के सापेक्ष अपवर्तनांक निरपेक्ष अपवर्तनांक है: n = c / v (पेज 163-164)।
- सारणी 9.3 (पेज 164) के कुछ मान: बर्फ़ 1.31, जल 1.33, एल्कोहल 1.36, किरोसिन 1.44, क्राउन काँच 1.52, खनिज नमक 1.54, कार्बन डाइसल्फ़ाइड 1.63, रूबी 1.71, नीलम 1.77, हीरा 2.42। किताब कहती है कि इन्हें रटने की ज़रूरत नहीं।
- जिसका अपवर्तनांक ज़्यादा, वह प्रकाशतः सघन, और उसमें प्रकाश धीमा। विरल से सघन में जाती किरण अभिलंब की ओर, सघन से विरल में जाती किरण अभिलंब से दूर मुड़ती है (पेज 165)।
- प्रकाशिक सघनता द्रव्यमान घनत्व नहीं है: किरोसिन पानी से हल्का है, फिर भी प्रकाशतः सघन है (पेज 164)।
7. गोलीय लेंस (9.3.3-9.3.5, पेज 165-170)
- दो पृष्ठों से घिरा पारदर्शी माध्यम, जिसका कम-से-कम एक पृष्ठ गोलीय हो, लेंस है। बीच में मोटा, किनारों पर पतला: उत्तल (अभिसारी) लेंस। बीच में पतला, किनारों पर मोटा: अवतल (अपसारी) लेंस (पेज 165-166)।
- लेंस के दो वक्रता केंद्र (C₁, C₂) होते हैं; दोनों से होकर जाने वाली रेखा मुख्य अक्ष है; लेंस का केंद्रीय बिंदु प्रकाशिक केंद्र (O) है, जिससे होकर जाने वाली किरण बिना मुड़े निकल जाती है (पेज 166)।
- लेंस के दो मुख्य फोकस (F₁, F₂) होते हैं, दोनों ओर एक-एक। प्रकाशिक केंद्र से मुख्य फोकस की दूरी फोकस दूरी f है (पेज 167)।
- उत्तल लेंस (सारणी 9.4, पेज 168): बिंब 2F₁ से दूर तो प्रतिबिंब F₂ और 2F₂ के बीच, छोटा; 2F₁ पर तो 2F₂ पर, बराबर; F₁ और 2F₁ के बीच तो 2F₂ से दूर, बड़ा; ये सब वास्तविक और उलटे। F₁ पर हो तो प्रतिबिंब अनंत पर। F₁ और O के बीच हो तो प्रतिबिंब उसी ओर, बड़ा, आभासी और सीधा (आवर्धक लेंस यही है)।
- अवतल लेंस (सारणी 9.5, पेज 168): बिंब कहीं भी हो, प्रतिबिंब हमेशा आभासी, सीधा और छोटा, F₁ और O के बीच, बिंब की ओर।
8. लेंस सूत्र, आवर्धन और क्षमता (9.3.6-9.3.8, पेज 171-174)
- लेंस में चिह्न परिपाटी वही है; बस दूरियाँ प्रकाशिक केंद्र से मापी जाती हैं (पेज 171)।
- लेंस सूत्र: 1/v − 1/u = 1/f। आवर्धन: m = h'/h = v/u (पेज 171)।
- दर्पण और लेंस के सूत्र साथ-साथ:
| दर्पण | लेंस | |
|---|---|---|
| सूत्र | 1/v + 1/u = 1/f | 1/v − 1/u = 1/f |
| आवर्धन | m = −v/u | m = v/u |
| दूरी कहाँ से | ध्रुव P | प्रकाशिक केंद्र O |
- लेंस की क्षमता: P = 1/f, जहाँ f मीटर में हो। मात्रक डाइऑप्टर (D); 1 मीटर फोकस दूरी वाले लेंस की क्षमता 1 D होती है (1 D = 1 m⁻¹)। उत्तल लेंस की क्षमता धनात्मक, अवतल की ऋणात्मक (पेज 173)।
- कम फोकस दूरी वाला लेंस किरणों को ज़्यादा मोड़ता है, इसलिए उसकी क्षमता ज़्यादा होती है (पेज 173)।
- संपर्क में रखे पतले लेंसों की कुल क्षमता उनकी क्षमताओं का बीजगणितीय योग है: P = P₁ + P₂ + ... (पेज 174)।
मुख्य शब्द एक नज़र में
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| परावर्तन | चमकदार पृष्ठ से प्रकाश का लौटना |
| अपवर्तन | एक माध्यम से दूसरे में जाते समय प्रकाश की दिशा बदलना |
| वास्तविक प्रतिबिंब | परदे पर मिल सके; दर्पण/लेंस में उलटा |
| आभासी प्रतिबिंब | परदे पर न मिले; सीधा |
| अपवर्तनांक | n = c / v; जितना बड़ा, माध्यम उतना सघन |
| प्रकाशिक केंद्र | लेंस का केंद्र-बिंदु; यहाँ से जाने वाली किरण सीधी निकलती है |
| आवर्धन | प्रतिबिंब की ऊँचाई ÷ बिंब की ऊँचाई |
| डाइऑप्टर | लेंस की क्षमता का मात्रक, 1 D = 1 m⁻¹ |
9. तीन गलतियाँ जो अंक काटती हैं
- u का चिह्न भूलना। बिंब बाईं ओर है, इसलिए u ऋणात्मक लिखें। अवतल दर्पण और अवतल लेंस की f भी ऋणात्मक है।
- दोनों सूत्र मिला देना। दर्पण में 1/v + 1/u और m = −v/u; लेंस में 1/v − 1/u और m = v/u। ऊपर की सारणी हाथ से एक बार लिखकर याद करें।
- क्षमता में सेंटीमीटर रखना। P = 1/f तभी डाइऑप्टर देता है जब f मीटर में हो: 25 cm को 0.25 m लिखें, फिर भाग दें।
10. हमारे 8 प्रश्न, उत्तर के साथ
पहले कॉपी पर खुद हल करें, फिर उत्तर देखें। ये प्रश्न हमारे अपने हैं, किताब के उदाहरण या अभ्यास-प्रश्न नहीं। सारे हल नई कार्तीय चिह्न परिपाटी से हैं।
प्रश्न 1. प्रयोगशाला में 16 cm वक्रता त्रिज्या का एक अवतल दर्पण रखा है। एक मोमबत्ती की 2.5 cm ऊँची लौ दर्पण के सामने 12 cm दूर है। (a) चिह्न के साथ f और u लिखिए। (b) परदा दर्पण से कितनी दूर रखें कि लौ का साफ़ प्रतिबिंब मिले? (c) आवर्धन और प्रतिबिंब की ऊँचाई निकालिए। (d) उत्तर को सारणी 9.1 से मिलाइए।
उत्तर: (a) f = −8 cm, u = −12 cm; (b) दर्पण के सामने 24 cm पर (v = −24 cm); (c) m = −2, h' = −5 cm; (d) बिंब C और F के बीच है, प्रतिबिंब C से दूर, बड़ा, वास्तविक और उलटा। (a) f = R/2 = 8 cm; अवतल दर्पण, इसलिए f = −8 cm (पेज 151, 157)। (b) 1/v = 1/f − 1/u = −1/8 + 1/12 = (−3 + 2)/24 = −1/24, इसलिए v = −24 cm (पेज 158)। (c) m = −v/u = −(−24)/(−12) = −2; h' = m × h = −2 × 2.5 = −5 cm, यानी 5 cm ऊँचा उलटा प्रतिबिंब। (d) C दर्पण से 16 cm पर है, F 8 cm पर; लौ 12 cm पर, यानी दोनों के बीच, और प्रतिबिंब 24 cm पर, C से आगे (पेज 152)।
प्रश्न 2. एक इमारत की सीढ़ियों के मोड़ पर 60 cm वक्रता त्रिज्या का उत्तल दर्पण लगा है। 1.5 m लंबा एक व्यक्ति दर्पण से 60 cm दूर खड़ा है। (a) प्रतिबिंब कहाँ बनेगा? (b) आवर्धन कितना है, और प्रतिबिंब कितना लंबा दिखेगा? (c) यहाँ समतल दर्पण की जगह उत्तल दर्पण क्यों अच्छा है?
उत्तर: (a) दर्पण के पीछे 20 cm पर (v = +20 cm); (b) m = +1/3, प्रतिबिंब 50 cm लंबा, सीधा और आभासी; (c) प्रतिबिंब हमेशा सीधा रहता है और बड़ा क्षेत्र दिखता है। (a) f = R/2 = +30 cm (उत्तल, पीछे), u = −60 cm। 1/v = 1/30 + 1/60 = 3/60 = 1/20, इसलिए v = +20 cm (पेज 158)। (b) m = −v/u = −20/(−60) = +1/3 ≈ +0.33; h' = 150 cm ÷ 3 = 50 cm। धनात्मक m का अर्थ: आभासी और सीधा। (c) उत्तल दर्पण बाहर को उभरा है, इसलिए उसका दृष्टि-क्षेत्र बड़ा है और मोड़ के उस पार आता व्यक्ति पूरा दिख जाता है (पेज 156)।
प्रश्न 3. सारणी 9.3 से: कार्बन डाइसल्फ़ाइड 1.63 और एल्कोहल 1.36; c = 3 × 10⁸ m/s लें। (a) कार्बन डाइसल्फ़ाइड में प्रकाश की चाल कितनी है? (b) एल्कोहल में? (c) एक किरण कार्बन डाइसल्फ़ाइड से एल्कोहल में तिरछी जाती है। वह अभिलंब की ओर मुड़ेगी या उससे दूर? (d) कार्बन डाइसल्फ़ाइड का एल्कोहल के सापेक्ष अपवर्तनांक दो दशमलव तक निकालिए।
उत्तर: (a) लगभग 1.84 × 10⁸ m/s; (b) लगभग 2.21 × 10⁸ m/s; (c) अभिलंब से दूर; (d) लगभग 1.20। (a) v = c/n = 3 × 10⁸ ÷ 1.63 ≈ 1.84 × 10⁸ m/s (पेज 164)। (b) 3 × 10⁸ ÷ 1.36 ≈ 2.21 × 10⁸ m/s। (c) 1.63 > 1.36, इसलिए किरण सघन से विरल में जा रही है; उसकी चाल बढ़ती है और वह अभिलंब से दूर मुड़ती है (पेज 165)। (d) n = (एल्कोहल में चाल) ÷ (कार्बन डाइसल्फ़ाइड में चाल) = 1.63 ÷ 1.36 ≈ 1.20 (पेज 163-164)।
प्रश्न 4. हवा से एक पारदर्शी प्लास्टिक की आयताकार पट्टी के ऊपरी फलक पर एक किरण तिरछी पड़ती है। आपतन कोण की ज्या (sin i) 0.60 और अपवर्तन कोण की ज्या (sin r) 0.40 है। (a) प्लास्टिक का अपवर्तनांक कितना है? (b) ऊपरी फलक पर किरण अभिलंब की ओर मुड़ी या दूर? (c) नीचे के फलक से हवा में निकलने वाली किरण के लिए sin e कितना होगा, और निर्गत किरण आपतित किरण के मुकाबले कैसी दिखेगी?
उत्तर: (a) 1.5; (b) अभिलंब की ओर; (c) sin e = 0.60, यानी निर्गत किरण आपतित किरण के समांतर है, बस थोड़ी बगल में खिसकी हुई। (a) स्नेल के नियम से n = sin i / sin r = 0.60 ÷ 0.40 = 1.5 (पेज 163)। (b) sin r < sin i, यानी r < i: हवा (विरल) से प्लास्टिक (सघन) में किरण अभिलंब की ओर मुड़ी (पेज 162)। (c) पट्टी के दोनों फलक समांतर हैं, इसलिए नीचे के फलक पर अंदर का कोण फिर r है; बाहर निकलते समय मुड़ना ऊपरी फलक के बराबर और उलटा होता है, इसलिए sin e = 1.5 × 0.40 = 0.60, और निर्गत कोण आपतन कोण के बराबर है। किरण समांतर निकलती है, पर पार्श्व विस्थापन के साथ (पेज 162)।
प्रश्न 5. 15 cm फोकस दूरी के उत्तल लेंस से 20 cm दूर, मुख्य अक्ष के लंबवत, 4 cm ऊँचा एक तीर रखा है। (a) प्रतिबिंब कहाँ बनेगा? (b) आवर्धन और प्रतिबिंब की ऊँचाई निकालिए। (c) प्रतिबिंब की प्रकृति लिखकर सारणी 9.4 से मिलाइए।
उत्तर: (a) लेंस के दूसरी ओर 60 cm पर (v = +60 cm); (b) m = −3, h' = −12 cm; (c) वास्तविक, उलटा और तीन गुना बड़ा; बिंब F₁ और 2F₁ के बीच, प्रतिबिंब 2F₂ से आगे। (a) f = +15 cm, u = −20 cm। लेंस सूत्र 1/v − 1/u = 1/f से 1/v = 1/f + 1/u = 1/15 − 1/20 = (4 − 3)/60 = 1/60, इसलिए v = +60 cm (पेज 171)। (b) m = v/u = 60/(−20) = −3; h' = −3 × 4 = −12 cm। (c) 2F₁ 30 cm पर है; तीर 20 cm पर, यानी 15 और 30 के बीच; प्रतिबिंब 60 cm पर, 2F₂ (30 cm) से आगे (पेज 168)।
प्रश्न 6. 10 cm फोकस दूरी का एक अवतल लेंस है। 5 cm ऊँचा एक बिंब उससे 40 cm दूर रखा है। (a) प्रतिबिंब कहाँ बनेगा? (b) आवर्धन और प्रतिबिंब की ऊँचाई निकालिए। (c) क्या इस प्रतिबिंब को परदे पर लिया जा सकता है?
उत्तर: (a) लेंस से 8 cm दूर, बिंब की ही ओर (v = −8 cm); (b) m = +0.2, h' = +1 cm; (c) नहीं, यह आभासी है। (a) f = −10 cm (अवतल लेंस), u = −40 cm। 1/v = 1/f + 1/u = −1/10 − 1/40 = −5/40 = −1/8, इसलिए v = −8 cm (पेज 171)। (b) m = v/u = (−8)/(−40) = +0.2; h' = 0.2 × 5 = 1 cm, सीधा और छोटा। (c) अवतल लेंस हमेशा आभासी, सीधा और छोटा प्रतिबिंब F₁ और O के बीच बनाता है (8 cm < 10 cm), और आभासी प्रतिबिंब परदे पर नहीं आता (पेज 168)।
प्रश्न 7. (a) 25 cm फोकस दूरी के उत्तल लेंस की क्षमता कितनी है? (b) किसी लेंस की क्षमता −5 D है। उसकी फोकस दूरी cm में कितनी है, और वह कौन-सा लेंस है? (c) इन दोनों में से कौन-सा लेंस किरणों को ज़्यादा मोड़ता है?
उत्तर: (a) +4 D; (b) −20 cm, अवतल (अपसारी) लेंस; (c) −5 D वाला। (a) f = +25 cm = +0.25 m; P = 1/f = 1/0.25 = +4 D (पेज 173)। (b) f = 1/P = 1/(−5) m = −0.2 m = −20 cm; ऋणात्मक क्षमता अवतल लेंस की होती है (पेज 173)। (c) किरणों को मोड़ने की मात्रा क्षमता के परिमाण से पता चलती है: |−5| > |+4|, यानी उसकी फोकस दूरी (20 cm) छोटी है, इसलिए वह ज़्यादा मोड़ता है, भले ही फैलाने की दिशा में (पेज 173)।
प्रश्न 8. सिर्फ़ आवर्धन देखकर बताइए कि कौन-सा दर्पण या लेंस है और प्रतिबिंब कैसा है: (a) एक दर्पण, m = −0.5; (b) एक दर्पण, m = +3; (c) एक दर्पण, m = +0.5; (d) एक लेंस, m = +0.25।
उत्तर: (a) अवतल दर्पण, वास्तविक-उलटा-छोटा (बिंब C से दूर); (b) अवतल दर्पण, आभासी-सीधा-बड़ा (बिंब P और F के बीच); (c) उत्तल दर्पण, आभासी-सीधा-छोटा; (d) अवतल लेंस, आभासी-सीधा-छोटा। (a) m ऋणात्मक, तो प्रतिबिंब वास्तविक और उलटा; वास्तविक प्रतिबिंब केवल अवतल दर्पण बनाता है, और |m| < 1 वाला छोटा प्रतिबिंब तब बनता है जब बिंब C से दूर हो (पेज 152, 158)। (b) m धनात्मक और 1 से बड़ा: सीधा, बड़ा, आभासी; यह केवल अवतल दर्पण में, बिंब P और F के बीच होने पर (पेज 152)। (c) सीधा और छोटा प्रतिबिंब समतल दर्पण नहीं देता (उसका m = +1); अवतल दर्पण का सीधा प्रतिबिंब बड़ा होता है; इसलिए उत्तल दर्पण (पेज 155-156)। (d) लेंस में सीधा और छोटा प्रतिबिंब केवल अवतल लेंस देता है; उत्तल लेंस का सीधा प्रतिबिंब हमेशा बड़ा होता है (पेज 168)।
11. इस अध्याय पर AI का जवाब कैसे परखें
- सूत्र का चिह्न देखिए। AI लेंस के लिए 1/v + 1/u लिखे या दर्पण के लिए m = v/u, तो वह सूत्र मिला रहा है। ऊपर की सारणी से मिलाइए (पेज 158, 171)।
- उत्तर को सारणी से जाँचिए। आपका v आने पर देखिए कि प्रतिबिंब सारणी 9.1, 9.4 या 9.5 की सही पंक्ति में बैठता है या नहीं। अवतल लेंस से "वास्तविक प्रतिबिंब" आए, तो कहीं चिह्न गलत है।
- क्षमता में मात्रक। AI 25 cm के लेंस की क्षमता "0.04 D" या "25 D" बताए, तो उसने सेंटीमीटर को मीटर नहीं बनाया; सही उत्तर +4 D है।
AI से पढ़ाई पर और: AI से पढ़ाई कैसे करें, नकल किए बिना।
कक्षा 10 विज्ञान का अभ्यास
- ऑनलाइन, तुरंत जाँच के साथ: अभ्यास पेज पर कक्षा 10 और विज्ञान का कोई विषय चुनें।
- अंग्रेज़ी में इसी अध्याय के प्रश्न-उत्तर: Class 10 Light, questions with answers।
- सारे सूत्र एक पेज पर (अंग्रेज़ी में): Class 10 Science formula sheet 2026-27।
- पिछला अध्याय हिंदी में: कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 8 आनुवंशिकता।
- अगला अध्याय हिंदी में: कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 10 मानव नेत्र तथा रंग-बिरंगा संसार।
- अगला अध्याय (अंग्रेज़ी में): Class 10 Human Eye and the Colourful World notes।
- बोर्ड की तैयारी: कक्षा 10 बोर्ड परीक्षा की तैयारी कैसे करें।
CMDLearn कहाँ फिट होता है
CMDLearn कक्षा 1 से 10 के लिए हिंदी, मराठी और अंग्रेज़ी में एक AI ट्यूटर बना रहा है, जो एक कदम समझाता है और बच्चे का काम जाँचता है, पर लिखना बच्चे पर छोड़ता है। यह अभी तैयार हो रहा है और अभी कोई बच्चा इसका इस्तेमाल नहीं करता। जब कुछ आज़माने लायक होगा, तब खबर पाने के लिए आप वेटलिस्ट से जुड़ सकते हैं।
स्रोत
सभी 5 नवंबर 2026 को जाँचे गए।
- NCERT, विज्ञान, कक्षा 10 की पाठ्यपुस्तक (हिंदी माध्यम, Reprint 2026-27), अध्याय 9 "प्रकाश – परावर्तन तथा अपवर्तन", पेज 148 से 177: ncert.nic.in/textbook/pdf/jhsc109.pdf
- NCERT, Science (अंग्रेज़ी संस्करण), Class X, Chapter 9 "Light – Reflection and Refraction": ncert.nic.in/textbook/pdf/jesc109.pdf
- CBSE, Science (086), Class X 2026-27, course structure (पेज 4-5): cbseacademic.nic.in, Science_SecP1_2026-27.pdf
अध्याय के विचार, शब्द और पेज-संख्याएँ ऊपर के दस्तावेज़ों से हैं। इस पेज की सारी व्याख्याएँ, उदाहरण, प्रश्न और उत्तर हमारे अपने हैं; हर गिनती स्क्रिप्ट से जाँची गई है।
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