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कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 11 विद्युत: Hindi medium नोट्स और 8 प्रश्न-उत्तर
NCERT की कक्षा 10 की हिंदी माध्यम की विज्ञान पाठ्यपुस्तक विज्ञान का ग्यारहवाँ अध्याय "विद्युत" है, पेज 190 से 215 तक। इसमें सूत्र कम हैं, पर हर सूत्र पर आंकिक प्रश्न बनते हैं, इसलिए मात्रक और संयोजन का सही होना ज़रूरी है। यह गाइड दो काम करती है:
- अध्याय के मुख्य विचारों को, किताब के अनुभागों के क्रम में, छोटे नोट्स में समझाती है, हमारे अपने हल किए उदाहरणों के साथ;
- अंत में हमारे अपने 8 प्रश्न देती है, पूरे हल के साथ।
पाठ्यपुस्तक साथ में खुली रखें। यहाँ की व्याख्याएँ, उदाहरण और प्रश्न हमारे अपने हैं; अंतिम बात पाठ्यपुस्तक की ही मानें। अंग्रेज़ी में इसी अध्याय के नोट्स चाहिए, तो Class 10 Electricity notes देखें।
यह गाइड सीधे हिंदी में लिखी गई है, पर किसी हिंदी-माध्यम शिक्षक ने अभी इसकी भाषा नहीं जाँची है (native review pending)। प्रश्न हमारे अपने हैं; किसी शिक्षक ने अभी इन्हें नहीं जाँचा है (teacher review pending)।
परीक्षा में यह अध्याय
CBSE ने 2026-27 के लिए कक्षा 10 विज्ञान की वार्षिक परीक्षा 80 अंकों की रखी है। यह अध्याय इकाई IV, "Effects of Current", में आता है, जिसके कुल 13 अंक हैं, और यही अंक "विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव" के साथ बँटते हैं (CBSE पाठ्यक्रम, पेज 4)। CBSE अध्याय-वार अंक नहीं देता। सूत्र एक जगह देखने हों, तो Class 10 Science formula sheet काम आएगी।
1. विद्युत धारा और परिपथ (11.1, पेज 190-191)
- धारा के बहने का लगातार और बंद रास्ता विद्युत परिपथ है। परिपथ कहीं से टूटे (या स्विच "ऑफ़" हो), तो धारा रुक जाती है (पेज 190)।
- विद्युत धारा = आवेश के प्रवाह की दर। धातु के तारों में आवेश इलेक्ट्रॉन ढोते हैं, पर परिपाटी से धारा की दिशा इलेक्ट्रॉनों के बहने की उलटी दिशा मानी जाती है (पेज 190)।
- अगर समय t में Q आवेश बहे, तो I = Q/t। आवेश का SI मात्रक कूलॉम (C) है; 1 C लगभग 6 × 10¹⁸ इलेक्ट्रॉनों का आवेश है, और एक इलेक्ट्रॉन पर 1.6 × 10⁻¹⁹ C आवेश होता है (पेज 191)।
- धारा का मात्रक ऐम्पियर (A): 1 A = 1 C/1 s। छोटी धाराएँ mA (10⁻³ A) और µA (10⁻⁶ A) में। धारा ऐमीटर से मापते हैं, जिसे परिपथ में हमेशा श्रेणीक्रम में लगाते हैं (पेज 191)।
- हल किया उदाहरण (हमारी संख्याएँ): एक बल्ब में 0.2 A धारा 2 मिनट बहती है। Q = I × t = 0.2 A × 120 s = 24 C।
2. विभव और विभवांतर (11.2, पेज 192)
- आवेश अपने-आप नहीं बहते; उन्हें चलाने के लिए चालक के दो सिरों के बीच "विद्युत दाब" का अंतर, यानी विभवांतर, चाहिए। सेल के अंदर की रासायनिक अभिक्रिया यह अंतर बनाती है, और धारा बनाए रखने में सेल अपनी रासायनिक ऊर्जा खर्च करता है (पेज 192)।
- दो बिंदुओं के बीच विभवांतर = एकांक आवेश को एक बिंदु से दूसरे तक ले जाने में किया गया कार्य: V = W/Q। मात्रक वोल्ट (V): 1 V = 1 J/1 C (पेज 192)।
- विभवांतर वोल्टमीटर से मापते हैं, जिसे उन दोनों बिंदुओं के बीच पार्श्वक्रम में लगाते हैं (पेज 192)।
- परिपथ आरेख में सेल, बैटरी, कुंजी, तार, बल्ब, प्रतिरोधक, धारा नियंत्रक, ऐमीटर और वोल्टमीटर के चिह्न सारणी 11.1 में हैं (पेज 193)।
3. ओम का नियम (11.4, पेज 194-197)
- ओम का नियम: ताप समान रहे, तो धातु के तार के सिरों के बीच विभवांतर उसमें बहती धारा के समानुपाती होता है: V = IR, यानी I = V/R (पेज 195)। निक्रोम तार के लिए V-I ग्राफ मूल बिंदु से जाती सीधी रेखा है।
- R उस तार का प्रतिरोध है, यानी आवेश के बहाव का विरोध; मात्रक ओम (Ω)। 1 V पर 1 A धारा बहे, तो प्रतिरोध 1 Ω (पेज 195)।
- स्रोत का वोल्टेज बदले बिना धारा घटाने-बढ़ाने के लिए धारा नियंत्रक (परिवर्ती प्रतिरोधक) लगाते हैं (पेज 196)।
- एक ही साइज़ के चालकों में जिसका प्रतिरोध कम, वह अच्छा चालक; पर्याप्त प्रतिरोध लगाने वाला प्रतिरोधक; बहुत ज़्यादा प्रतिरोध वाला विद्युतरोधी (पेज 197)।
4. प्रतिरोध किन बातों पर निर्भर है: प्रतिरोधकता (11.5, पेज 197-200)
- तार जितना लंबा, प्रतिरोध उतना ज़्यादा (R ∝ l); तार जितना मोटा (अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल A जितना बड़ा), प्रतिरोध उतना कम (R ∝ 1/A); और यह तार के पदार्थ पर भी निर्भर है। तीनों को मिलाकर R = ρ l/A (पेज 198)।
- ρ (रो) पदार्थ की विद्युत प्रतिरोधकता है; मात्रक Ω m। धातुओं और मिश्रातुओं की प्रतिरोधकता बहुत कम (लगभग 10⁻⁸ से 10⁻⁶ Ω m), जबकि रबड़ और काँच जैसे विद्युतरोधियों की 10¹² से 10¹⁷ Ω m के आसपास। प्रतिरोध और प्रतिरोधकता दोनों ताप के साथ बदलते हैं (पेज 198)।
- सारणी 11.2 (पेज 198-199) के कुछ मान: सिल्वर 1.60 × 10⁻⁸, कॉपर 1.62 × 10⁻⁸, ऐलुमिनियम 2.63 × 10⁻⁸, टंगस्टन 5.20 × 10⁻⁸ Ω m; मिश्रातु निक्रोम 100 × 10⁻⁶ Ω m। किताब कहती है कि ये मान याद नहीं करने हैं।
- मिश्रातुओं की प्रतिरोधकता अपनी अवयवी धातुओं से ज़्यादा होती है और वे ऊँचे ताप पर जल्दी नहीं जलतीं (ऑक्सीकृत नहीं होतीं), इसलिए इस्तरी और टोस्टर जैसे तापन उपकरणों में लगती हैं। बल्ब के तंतु में टंगस्टन, और बिजली ले जाने वाले तारों में कॉपर और ऐलुमिनियम (पेज 198)।
- हल किया उदाहरण (हमारी संख्याएँ): कॉपर का एक तार 20 m लंबा है और उसकी काट का क्षेत्रफल 0.5 mm² (= 0.5 × 10⁻⁶ m²) है। R = ρl/A = 1.62 × 10⁻⁸ × 20 ÷ (0.5 × 10⁻⁶) = 0.648 Ω।
5. प्रतिरोधकों के संयोजन (11.6, पेज 201-208)
| श्रेणीक्रम (पेज 202-204) | पार्श्वक्रम (पेज 205-207) | |
|---|---|---|
| क्या एक-सा रहता है | हर प्रतिरोधक में एक ही धारा | हर प्रतिरोधक के सिरों पर एक ही विभवांतर |
| क्या बँटता है | कुल विभवांतर: V = V₁ + V₂ + V₃ | कुल धारा: I = I₁ + I₂ + I₃ |
| तुल्य प्रतिरोध | Rs = R₁ + R₂ + R₃ (हर एक से बड़ा) | 1/Rp = 1/R₁ + 1/R₂ + 1/R₃ (सबसे छोटे से भी छोटा) |
- हल किया उदाहरण (हमारी संख्याएँ): 2 Ω और 3 Ω श्रेणी में: Rs = 5 Ω। वही दोनों पार्श्व में: 1/Rp = 1/2 + 1/3 = 5/6, तो Rp = 1.2 Ω।
- घरों में उपकरण पार्श्वक्रम में जुड़ते हैं। श्रेणीक्रम में एक उपकरण खराब हो, तो पूरा परिपथ टूट जाता है, और सबमें एक ही धारा बहती है, जबकि अलग उपकरणों को अलग धारा चाहिए। पार्श्वक्रम में हर उपकरण को पूरा वोल्टेज मिलता है (पेज 205), धारा उपकरणों में अपनी-अपनी ज़रूरत से बँटती है और कुल प्रतिरोध घटता है (पेज 208)।
6. धारा का तापीय प्रभाव (11.7, पेज 209-211)
- बैटरी की ऊर्जा का एक हिस्सा प्रतिरोधक में ऊष्मा बनकर निकलता है। समय t में बनी ऊष्मा: H = VIt = I²Rt (पेज 209)।
- यह जूल का तापन नियम है: बनी ऊष्मा धारा के वर्ग, प्रतिरोध और समय तीनों के अनुक्रमानुपाती है (पेज 209)।
- उपयोग: इस्तरी, टोस्टर, ओवन, केतली, हीटर; बल्ब का टंगस्टन तंतु (गलनांक 3380 °C; बहुत गरम होकर चमकता है, और बल्ब में अक्रिय नाइट्रोजन और आर्गन गैस भरी रहती है); और फ्यूज़, जो तय सीमा से ज़्यादा धारा आने पर गरम होकर पिघलता है, परिपथ तोड़ता है और उपकरण बचाता है। फ्यूज़ तार उचित गलनांक वाली किसी धातु या मिश्रातु (जैसे ऐलुमिनियम, कॉपर, आयरन, लैड) का होता है, और उसे उपकरण के श्रेणीक्रम में लगाते हैं (पेज 211)।
7. विद्युत शक्ति (11.8, पेज 212-213)
- ऊर्जा खर्च होने की दर शक्ति है: P = VI = I²R = V²/R। मात्रक वाट (W): 1 W = 1 V × 1 A। 1 kW = 1000 W (पेज 212)।
- बिजली के बिल की इकाई किलोवाट घंटा (kW h), यानी "यूनिट": 1 kW h = 1000 W × 3600 s = 3.6 × 10⁶ J (पेज 212)।
- किताब के "यह भी जानिए" बॉक्स के अनुसार हम बिजली के बिल में इलेक्ट्रॉनों के नहीं, उन्हें चलाने वाली ऊर्जा के पैसे देते हैं; परिपथ में इलेक्ट्रॉन खर्च नहीं होते (पेज 212)।
मुख्य शब्द एक नज़र में
| शब्द | अर्थ / सूत्र | मात्रक |
|---|---|---|
| विद्युत धारा | I = Q/t | ऐम्पियर (A) |
| विभवांतर | V = W/Q | वोल्ट (V) |
| प्रतिरोध | R = V/I | ओम (Ω) |
| प्रतिरोधकता | ρ = RA/l | Ω m |
| ऊष्मा | H = I²Rt | जूल (J) |
| शक्ति | P = VI | वाट (W) |
| ऊर्जा (बिल) | P × समय | kW h (यूनिट) |
8. तीन गलतियाँ जो अंक काटती हैं
- समय और क्षेत्रफल के मात्रक न बदलना। I = Q/t और H = I²Rt में t सेकंड में; R = ρl/A में A वर्ग मीटर में (1 mm² = 10⁻⁶ m²)। बिल में ऊर्जा kW और घंटे में।
- श्रेणी और पार्श्व का नियम उलटना। श्रेणी में धारा एक, पार्श्व में विभवांतर एक। पार्श्वक्रम का तुल्य प्रतिरोध सबसे छोटे प्रतिरोधक से भी कम आता है; ज़्यादा आए, तो गणना जाँचें।
- 1/Rp निकालकर वहीं रुक जाना। 1/Rp = 5/6 मिला, तो उत्तर Rp = 6/5 Ω है, 5/6 Ω नहीं।
9. हमारे 8 प्रश्न, उत्तर के साथ
पहले कॉपी पर खुद हल करें, फिर उत्तर देखें। ये प्रश्न हमारे अपने हैं, किताब के उदाहरण या अभ्यास-प्रश्न नहीं।
प्रश्न 1. एक कैलकुलेटर का सेल उसे 2 mA की स्थिर धारा देता है, और कैलकुलेटर 4 घंटे चलता है। (a) इस बीच कितना आवेश बहा? (b) यह आवेश लगभग कितने इलेक्ट्रॉनों के बराबर है? (c) तारों में इलेक्ट्रॉन किस दिशा में चलते हैं, और धारा की दिशा कौन-सी मानी जाती है?
उत्तर: (a) 28.8 C; (b) लगभग 1.8 × 10²⁰ इलेक्ट्रॉन; (c) इलेक्ट्रॉन सेल के ऋण टर्मिनल की ओर से धन टर्मिनल की ओर चलते हैं; धारा की दिशा इसकी उलटी, यानी धन से ऋण की ओर, मानी जाती है। (a) I = 2 mA = 2 × 10⁻³ A (पेज 191), t = 4 × 3600 = 14,400 s; Q = It = 0.002 × 14,400 = 28.8 C। (b) एक इलेक्ट्रॉन पर 1.6 × 10⁻¹⁹ C है (पेज 191): 28.8 ÷ (1.6 × 10⁻¹⁹) = 1.8 × 10²⁰। (c) परिपाटी से धारा की दिशा ऋणावेशित इलेक्ट्रॉनों के बहने की उलटी दिशा है, और परिपथ में धारा सेल के धन टर्मिनल से ऋण टर्मिनल की ओर बहती है (पेज 190-191)।
प्रश्न 2. प्रश्न 1 का कैलकुलेटर 1.5 V के सेल से चलता है। (a) उन 4 घंटों में सेल ने कितना कार्य किया, यानी कितनी ऊर्जा दी? (b) एक दूसरे परिपथ में 2.5 C आवेश को दो बिंदुओं के बीच ले जाने में 30 J कार्य लगता है। उन बिंदुओं के बीच विभवांतर कितना है? (c) इस विभवांतर को मापने के लिए वोल्टमीटर कैसे लगाएँगे?
उत्तर: (a) 43.2 J; (b) 12 V; (c) उन दोनों बिंदुओं के बीच पार्श्वक्रम में। (a) V = W/Q से W = VQ = 1.5 × 28.8 = 43.2 J (पेज 192)। (b) V = W/Q = 30 ÷ 2.5 = 12 V। (c) वोल्टमीटर को हमेशा उन बिंदुओं से पार्श्वक्रम में जोड़ते हैं जिनके बीच विभवांतर मापना है (पेज 192)।
प्रश्न 3. एक छोटा बल्ब 3 V पर 0.25 A धारा लेता है। मान लीजिए उसका प्रतिरोध नहीं बदलता। (a) उसका प्रतिरोध कितना है? (b) उसी बल्ब को 4.5 V पर लगाने से धारा कितनी होगी? (c) उसे 0.1 A पर चलाने के लिए उसके सिरों पर कितना विभवांतर चाहिए?
उत्तर: (a) 12 Ω; (b) 0.375 A; (c) 1.2 V। (a) R = V/I = 3 ÷ 0.25 = 12 Ω (ओम का नियम, पेज 195)। (b) I = V/R = 4.5 ÷ 12 = 0.375 A। (c) V = IR = 0.1 × 12 = 1.2 V। (असली बल्ब का तंतु गरम होने पर उसका प्रतिरोध बढ़ता है, क्योंकि प्रतिरोध ताप से बदलता है, पेज 198; इस प्रश्न में इसे स्थिर माना है।)
प्रश्न 4. बिजली मिस्त्री के पास कॉपर का 50 m लंबा तार है, जिसकी काट का क्षेत्रफल 1 mm² है। सारणी 11.2 से कॉपर की प्रतिरोधकता 1.62 × 10⁻⁸ Ω m और ऐलुमिनियम की 2.63 × 10⁻⁸ Ω m लें। (a) तार का प्रतिरोध कितना है? (b) उसी कॉपर का एक तार 100 m लंबा और 2 mm² काट वाला हो, तो उसका प्रतिरोध कितना होगा? (c) ठीक पहले तार जितना ऐलुमिनियम का तार लें, तो उसका प्रतिरोध कितना होगा, और दोनों में कौन-सा बेहतर चालक है?
उत्तर: (a) 0.81 Ω; (b) 0.81 Ω, उतना ही; (c) लगभग 1.32 Ω; कॉपर बेहतर चालक है। (a) A = 1 × 10⁻⁶ m²; R = ρl/A = 1.62 × 10⁻⁸ × 50 ÷ 10⁻⁶ = 0.81 Ω (पेज 198)। (b) लंबाई दोगुनी होने से R दोगुना, और क्षेत्रफल दोगुना होने से R आधा; दोनों का असर बराबर, इसलिए R वही 0.81 Ω (R ∝ l/A, पेज 198)। (c) 2.63 × 10⁻⁸ × 50 ÷ 10⁻⁶ = 1.315 Ω ≈ 1.32 Ω। समान साइज़ में कम प्रतिरोध वाला अच्छा चालक है (पेज 197), इसलिए कॉपर।
प्रश्न 5. 12 V की बैटरी से एक 4 Ω का प्रतिरोधक और एक अज्ञात प्रतिरोधक R श्रेणीक्रम में जुड़े हैं। 4 Ω के सिरों पर लगा वोल्टमीटर 3 V पढ़ता है। (a) परिपथ में धारा कितनी है? (b) R के सिरों पर विभवांतर कितना है, और R कितना है? (c) कुल प्रतिरोध से धारा निकालकर अपना उत्तर जाँचिए।
उत्तर: (a) 0.75 A; (b) 9 V, R = 12 Ω; (c) 16 Ω, 0.75 A। (a) 4 Ω पर 3 V है, तो I = V/R = 3 ÷ 4 = 0.75 A, और श्रेणीक्रम में यही धारा पूरे परिपथ में बहती है (पेज 195, 202)। (b) श्रेणीक्रम में कुल विभवांतर हिस्सों का योग है (पेज 202-203): R पर 12 − 3 = 9 V; R = 9 ÷ 0.75 = 12 Ω। (c) Rs = 4 + 12 = 16 Ω (पेज 204); I = 12 ÷ 16 = 0.75 A, वही।
प्रश्न 6. 6 V की बैटरी से एक 10 Ω का प्रतिरोधक और एक अज्ञात प्रतिरोधक R पार्श्वक्रम में जुड़े हैं। बैटरी के पास मुख्य तार में लगा ऐमीटर 1.0 A पढ़ता है। (a) 10 Ω वाले प्रतिरोधक से कितनी धारा बहती है? (b) R से कितनी धारा बहती है, और R कितना है? (c) तुल्य प्रतिरोध दो तरीकों से निकालकर मिलाइए।
उत्तर: (a) 0.6 A; (b) 0.4 A, R = 15 Ω; (c) 6 Ω। (a) पार्श्वक्रम में दोनों के सिरों पर पूरा 6 V है (पेज 205): 6 ÷ 10 = 0.6 A। (b) कुल धारा शाखाओं की धाराओं का योग है (पेज 206): R से 1.0 − 0.6 = 0.4 A; R = 6 ÷ 0.4 = 15 Ω। (c) Rp = V/I = 6 ÷ 1.0 = 6 Ω; और 1/Rp = 1/10 + 1/15 = (3 + 2)/30 = 1/6, तो Rp = 6 Ω (पेज 206)। दोनों बराबर, और 6 Ω सबसे छोटे प्रतिरोधक (10 Ω) से भी कम है।
प्रश्न 7. एक हेयर ड्रायर की तापन कुंडली 220 V पर 2 A धारा लेती है। (a) कुंडली का प्रतिरोध कितना है? (b) 1 मिनट में वह कितनी ऊष्मा बनाती है? उत्तर H = I²Rt से निकालिए और H = VIt से जाँचिए। (c) अगर धारा आधी कर दी जाए (प्रतिरोध वही), तो उतने ही समय में ऊष्मा कितनी होगी?
उत्तर: (a) 110 Ω; (b) 26,400 J; (c) एक-चौथाई, यानी 6,600 J। (a) R = V/I = 220 ÷ 2 = 110 Ω (पेज 195)। (b) t = 60 s; H = I²Rt = 2² × 110 × 60 = 26,400 J; जाँच: VIt = 220 × 2 × 60 = 26,400 J (पेज 209)। (c) जूल के नियम में ऊष्मा धारा के वर्ग के अनुक्रमानुपाती है (पेज 209): (1/2)² = 1/4, यानी 26,400 ÷ 4 = 6,600 J।
प्रश्न 8. एक घर में 120 W का LED टीवी रोज़ 5 घंटे चलता है, और बिजली 7 रुपये प्रति यूनिट है। (a) टीवी 220 V पर कितनी धारा लेता है (दो दशमलव तक)? (b) 30 दिनों में यह कितनी ऊर्जा, kW h में, खर्च करता है? (c) इसका बिल कितना होगा, और यह ऊर्जा जूल में कितनी है?
उत्तर: (a) लगभग 0.55 A; (b) 18 kW h; (c) 126 रुपये; 6.48 × 10⁷ J। (a) P = VI से I = P/V = 120 ÷ 220 ≈ 0.545 A ≈ 0.55 A (पेज 212)। (b) रोज़ 120 W × 5 h = 600 W h = 0.6 kW h; 30 दिनों में 0.6 × 30 = 18 kW h, यानी 18 यूनिट (पेज 212)। (c) 18 × 7 = 126 रुपये; 1 kW h = 3.6 × 10⁶ J, इसलिए 18 × 3.6 × 10⁶ = 6.48 × 10⁷ J (पेज 212)।
10. इस अध्याय पर AI का जवाब कैसे परखें
- मात्रक जाँचिए। AI ने मिनट या mm² को बिना बदले सूत्र में रखा हो, तो उत्तर गलत होगा। हर संख्या के साथ मात्रक लिखवाकर देखें।
- संयोजन का तर्क जाँचिए। पार्श्वक्रम का तुल्य प्रतिरोध सबसे छोटे प्रतिरोधक से कम, और श्रेणीक्रम का सबसे बड़े से ज़्यादा होना चाहिए (पेज 204-206)। ऐसा न हो, तो AI से फिर पूछें।
- दो सूत्रों से मिलाइए। ऊष्मा या शक्ति को I²R और VI दोनों से निकालें; दोनों बराबर न आएँ, तो कहीं गलती है।
AI से पढ़ाई पर और: AI से पढ़ाई कैसे करें, नकल किए बिना।
कक्षा 10 विज्ञान का अभ्यास
- ऑनलाइन, तुरंत जाँच के साथ: अभ्यास पेज पर कक्षा 10 और विज्ञान का कोई विषय चुनें।
- अंग्रेज़ी में इसी अध्याय के प्रश्न-उत्तर: Class 10 Electricity, questions with answers।
- और आंकिक प्रश्न (अंग्रेज़ी में): Class 10 Electricity numericals।
- इसी श्रृंखला का एक और अध्याय हिंदी में: कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 9 प्रकाश – परावर्तन तथा अपवर्तन।
- बोर्ड की तैयारी: कक्षा 10 बोर्ड परीक्षा की तैयारी कैसे करें।
CMDLearn कहाँ फिट होता है
CMDLearn कक्षा 1 से 10 के लिए हिंदी, मराठी और अंग्रेज़ी में एक AI ट्यूटर बना रहा है, जो एक कदम समझाता है और बच्चे का काम जाँचता है, पर लिखना बच्चे पर छोड़ता है। यह अभी तैयार हो रहा है और अभी कोई बच्चा इसका इस्तेमाल नहीं करता। जब कुछ आज़माने लायक होगा, तब खबर पाने के लिए आप वेटलिस्ट से जुड़ सकते हैं।
स्रोत
सभी 5 नवंबर 2026 को जाँचे गए।
- NCERT, विज्ञान, कक्षा 10 की पाठ्यपुस्तक (हिंदी माध्यम, Reprint 2026-27), अध्याय 11 "विद्युत", पेज 190 से 215: ncert.nic.in/textbook/pdf/jhsc111.pdf
- NCERT, Science (अंग्रेज़ी संस्करण), Class X, Chapter 11 "Electricity": ncert.nic.in/textbook/pdf/jesc111.pdf
- CBSE, Science (086), Class X 2026-27, course structure (पेज 4): cbseacademic.nic.in, Science_SecP1_2026-27.pdf
अध्याय के विचार, शब्द और पेज-संख्याएँ ऊपर के दस्तावेज़ों से हैं। इस पेज की सारी व्याख्याएँ, उदाहरण, प्रश्न और उत्तर हमारे अपने हैं; हर गिनती स्क्रिप्ट से जाँची गई है।
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