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कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 7 जीव जनन कैसे करते हैं: Hindi medium नोट्स और 8 प्रश्न-उत्तर
NCERT की कक्षा 10 की हिंदी माध्यम की विज्ञान पाठ्यपुस्तक विज्ञान का सातवाँ अध्याय "जीव जनन कैसे करते हैं" है, पेज 125 से 140 तक। यह गाइड दो काम करती है:
- अध्याय के मुख्य विचारों को छोटे नोट्स में समझाती है;
- अंत में हमारे अपने 8 प्रश्न देती है, हल और उत्तर के साथ।
पाठ्यपुस्तक साथ में खुली रखें। यहाँ की व्याख्याएँ, उदाहरण और प्रश्न हमारे अपने हैं; अंतिम बात पाठ्यपुस्तक की ही मानें। मानव जनन वाला भाग हमने किताब के ही स्तर और शब्दों में रखा है। अंग्रेज़ी में इसी अध्याय के नोट्स चाहिए, तो Class 10 How do Organisms Reproduce? notes देखें।
यह गाइड सीधे हिंदी में लिखी गई है, पर किसी हिंदी-माध्यम शिक्षक ने अभी इसकी भाषा नहीं जाँची है (native review pending)।
परीक्षा में यह अध्याय
CBSE ने 2026-27 के लिए कक्षा 10 विज्ञान की वार्षिक परीक्षा 80 अंकों की रखी है। यह अध्याय इकाई II, "World of Living", में आता है, जिसके कुल 25 अंक हैं (CBSE पाठ्यक्रम, पेज 4)। पाठ्यक्रम में इसके हिस्से हैं: जंतुओं और पौधों में जनन (अलैंगिक और लैंगिक), जनन स्वास्थ्य, परिवार नियोजन की ज़रूरत और तरीके, सुरक्षित यौन व्यवहार और HIV/AIDS, और शिशु-जन्म तथा महिलाओं का स्वास्थ्य (पेज 5)। इसी इकाई में जैव प्रक्रम, नियंत्रण एवं समन्वय और आनुवंशिकता भी हैं। CBSE अध्याय-वार अंक नहीं देता।
1. जनन की मूल बात: डी.एन.ए. की प्रतिकृति (7.1, पेज 125-126)
- पोषण, श्वसन या उत्सर्जन के बिना जीव जीवित नहीं रह सकता, पर अपने जीवन के लिए उसे जनन की ज़रूरत नहीं। फिर भी जनन में बहुत ऊर्जा खर्च होती है। किसी प्रजाति के बहुत सारे जीव हमें इसलिए दिखते हैं, क्योंकि वे जनन करते हैं।
- एक ही प्रजाति के जीव एक जैसे दिखते हैं, क्योंकि उनके शरीर का अभिकल्प (ब्लूप्रिंट) एक जैसा है। यह सूचना केंद्रक के गुणसूत्रों के डी.एन.ए. में होती है, और डी.एन.ए. से ही प्रोटीन बनाने की सूचना मिलती है।
- इसलिए जनन की मूल घटना है डी.एन.ए. की प्रतिकृति बनाना। साथ में कोशिका का बाकी संगठन भी बनता है; केवल डी.एन.ए. की प्रति बाहर धकेलने से नई कोशिका जीवित नहीं रह पाती। अंत में एक कोशिका बँटकर दो बनती है।
- कोई जैव-रासायनिक क्रिया पूरी तरह भरोसेमंद नहीं होती, इसलिए हर प्रतिकृति में थोड़ी विभिन्नता आ जाती है। बहुत बड़ी विभिन्नता वाली कोशिका मर जाती है; छोटी विभिन्नताएँ बची रहती हैं।
2. विभिन्नता का महत्व (7.1.1, पेज 126)
- जीवों की समष्टि पारितंत्र में अपना निकेत (रहने और जीने की खास जगह) भरती है। डी.एन.ए. की सही प्रतिकृति शरीर के उस अभिकल्प को बनाए रखती है जो उस निकेत के लिए ठीक है। इसलिए जनन का संबंध प्रजाति की समष्टि के स्थायित्व से है।
- निकेत बदल सकता है: पृथ्वी का ताप घट-बढ़ सकता है, जल-स्तर बदल सकता है, उल्का पिंड टकरा सकता है। तब पूरी समष्टि खत्म हो सकती है, पर जिन कुछ जीवों में ठीक विभिन्नता है, वे बच सकते हैं।
- किताब का उदाहरण: गर्म होते जल में अधिकतर जीवाणु मरेंगे, पर ताप झेलने वाले कुछ जीवाणु बचकर बढ़ेंगे। अतः विभिन्नता प्रजाति को लंबे समय तक बचाए रखने में उपयोगी है।
3. एकल जीवों में जनन (7.2, पेज 127-131)
जनन की विधि जीव के शारीरिक अभिकल्प पर निर्भर करती है।
| विधि | किसमें | क्या होता है |
|---|---|---|
| द्विखंडन | अमीबा, लेस्मानिया, कई जीवाणु और प्रोटोज़ोआ | कोशिका दो बराबर भागों में बँटती है। अमीबा किसी भी तल से बँट सकता है; लेस्मानिया (कालाज़ार का रोगाणु) एक निर्धारित तल से, कोड़े जैसी संरचना के हिसाब से (पेज 127, चित्र 7.1) |
| बहुखंडन | प्लैज़्मोडियम (मलेरिया परजीवी) | एक साथ अनेक संतति कोशिकाएँ (पेज 127-128, चित्र 7.2) |
| मुकुलन | यीस्ट; हाइड्रा | यीस्ट पर छोटे मुकुल उभरकर अलग होते हैं (पेज 128)। हाइड्रा में एक जगह बार-बार कोशिका-विभाजन से उभार (मुकुल) बनता है, जो नन्हा जीव बनकर अलग हो जाता है (पेज 129, चित्र 7.4) |
| खंडन | स्पाइरोगाइरा | परिपक्व होकर टुकड़ों में टूटता है; हर टुकड़ा नया जीव बनता है (पेज 128) |
| पुनरुद्भवन (पुनर्जनन) | हाइड्रा, प्लेनेरिया | शरीर के टुकड़ों से पूरा जीव बनता है; यह काम विशिष्ट कोशिकाएँ करती हैं। पर यह जनन जैसा नहीं, क्योंकि जीव सामान्यतः कटकर जनन नहीं करते (पेज 129, चित्र 7.3) |
| कायिक प्रवर्धन | गन्ना, गुलाब, अंगूर; ब्रायोफिलम | जड़, तना या पत्ती से नया पौधा। ब्रायोफिलम की पत्ती की कोर पर बनी कलिकाएँ मिट्टी में गिरकर पौधे बनती हैं (पेज 130, चित्र 7.5) |
| बीजाणु समासंघ | राइज़ोपस (ब्रेड का कवक) | धागे जैसे कवक जाल जनन नहीं करते; ऊपर की गोल बीजाणुधानी में बीजाणु बनते हैं, जिनकी मोटी भित्ति उन्हें नम सतह मिलने तक बचाती है (पेज 131, चित्र 7.6) |
- बहुकोशिकीय जीव कोशिका-दर-कोशिका क्यों नहीं बँटते? उनमें कोशिकाएँ ऊतक बनाती हैं, ऊतक अंग बनाते हैं, और अंगों की जगह तय होती है। ऐसे संगठन में कोशिका-दर-कोशिका विभाजन काम नहीं करता (पेज 128)।
- कायिक प्रवर्धन के लाभ (पेज 130): परतन, कलम या रोपण से उगे पौधों में फूल और फल जल्दी आते हैं; केला, संतरा, गुलाब, चमेली जैसे बीज न बनाने वाले पौधे भी उगाए जा सकते हैं; नए पौधे आनुवंशिक रूप से जनक जैसे होते हैं।
- ऊतक संवर्धन (बॉक्स, पेज 131): पौधे के शीर्ष के बढ़ते भाग से ऊतक या कोशिकाएँ अलग करके कृत्रिम पोषक माध्यम में रखते हैं; कोशिकाएँ बँटकर कैलस बनाती हैं; कैलस को वृद्धि और विभेदन के हॉर्मोन वाले दूसरे माध्यम में रखते हैं; फिर पौधों को मिट्टी में रोपते हैं। एक पौधे से, संक्रमण से मुक्त हालात में, बहुत से पौधे बनते हैं; यह तरीका ज़्यादातर सजावटी पौधों के लिए अपनाया जाता है।
- ऊपर की सभी विधियों में नई पीढ़ी एक ही जीव से बनती है। इसे अलैंगिक जनन कहते हैं (पेज 131)।
4. लैंगिक जनन क्यों (7.3, 7.3.1, पेज 131-133)
- बैल अकेला बछड़ा पैदा नहीं कर सकता और मुर्गी अकेली चूज़े नहीं; यहाँ नर और मादा दोनों चाहिए। यह लैंगिक जनन है।
- डी.एन.ए. की प्रतिकृति इतनी सटीक है कि विभिन्नता बहुत धीरे बनती है। दो अलग जीवों में अलग-अलग विभिन्नताएँ जमा रहती हैं, और ये जीवित जीवों में हैं, इसलिए हानिकारक नहीं। दोनों का डी.एन.ए. मिलाने से विभिन्नताओं के नए संयोजन बनते हैं।
- समस्या: हर पीढ़ी में दो जनकों का पूरा डी.एन.ए. जुड़ता, तो डी.एन.ए. की मात्रा हर पीढ़ी में दोगुनी होती जाती। हल: विशेष अंगों की कुछ कोशिकाओं में गुणसूत्रों की संख्या और डी.एन.ए. की मात्रा कायिक कोशिकाओं की आधी होती है। यह अर्द्धसूत्री विभाजन से होता है। दो युग्मक मिलकर युग्मनज बनाते हैं, जिसमें संख्या फिर पूरी हो जाती है (पेज 132)।
- जटिल जीवों में युग्मक भी अलग-अलग होते हैं: छोटा और गतिशील युग्मक नर युग्मक कहलाता है, और बड़ा, भोजन के भंडार वाला युग्मक मादा युग्मक (पेज 132-133)।
5. पुष्पी पौधों में लैंगिक जनन (7.3.2, पेज 133-134)
- आवृतबीजी पौधों के जननांग पुष्प में होते हैं। पुष्प के भाग: बाह्यदल, दल (पंखुड़ी), पुंकेसर और स्त्रीकेसर (चित्र 7.7)। पुंकेसर और स्त्रीकेसर जनन भाग हैं।
- एकलिंगी पुष्प में दोनों में से एक ही होता है (पपीता, तरबूज़); उभयलिंगी पुष्प में दोनों (गुड़हल, सरसों)।
- पुंकेसर नर जननांग है और पीले परागकण बनाता है। स्त्रीकेसर मादा जननांग है, जिसके तीन भाग हैं: नीचे फूला हुआ अंडाशय, बीच में लंबी वर्तिका, ऊपर प्रायः चिपचिपा वर्तिकाग्र। अंडाशय में बीजांड होते हैं, और हर बीजांड में एक अंड-कोशिका।
- परागकणों का पुंकेसर से वर्तिकाग्र तक पहुँचना परागण है: उसी पुष्प के वर्तिकाग्र पर हो तो स्वपरागण, दूसरे पुष्प पर हो तो परपरागण। परपरागण के वाहक वायु, जल या प्राणी होते हैं।
- वर्तिकाग्र पर पहुँचकर परागकण से एक नलिका निकलती है, जो वर्तिका से होकर बीजांड तक जाती है (चित्र 7.8)। नर और मादा युग्मक का मिलना निषेचन है; इससे युग्मनज बनता है।
- निषेचन के बाद युग्मनज बँटकर बीजांड में भ्रूण बनाता है; बीजांड पर कठोर आवरण बनता है और वह बीज बन जाता है; अंडाशय बढ़कर और पककर फल बनता है। बाह्यदल, पंखुड़ी, पुंकेसर, वर्तिका और वर्तिकाग्र प्रायः मुरझाकर गिर जाते हैं (पेज 133)।
- बीज में भावी पौधा (भ्रूण) होता है, जो सही परिस्थितियों में नवोद्भिद बनता है। इसे अंकुरण कहते हैं (पेज 134, चित्र 7.9: बीजपत्र, प्रांकुर, मूलांकुर)।
6. मानव में लैंगिक जनन (7.3.3, पेज 134-137)
यौवनारंभ (पेज 134-135)
- बचपन से कद और भार बढ़ते हैं, दूध के दाँत गिरकर नए दाँत आते हैं; यह सामान्य वृद्धि है। किशोरावस्था के शुरू के वर्षों में ऐसे बदलाव भी आते हैं जो केवल वृद्धि नहीं हैं।
- लड़कों और लड़कियों में एक जैसे बदलाव: काँख और जाँघों के बीच के जननांगी क्षेत्र में बाल; हाथ, पैर और चेहरे पर महीन रोम; तैलीय त्वचा और कभी-कभी मुँहासे।
- अलग बदलाव: लड़कियों में स्तन के आकार में वृद्धि और रजोधर्म की शुरुआत; लड़कों में दाढ़ी-मूँछ और आवाज़ का फटना। किताब लड़कों के एक और शारीरिक बदलाव का भी उल्लेख करती है (पेज 135)।
- ये बदलाव महीनों और वर्षों में धीरे-धीरे होते हैं, सबमें एक ही आयु पर नहीं, और हर व्यक्ति में कुछ अलग होते हैं। ये सब शरीर की लैंगिक परिपक्वता के पहलू हैं।
- यह इसी आयु में क्यों? जब तक शरीर तेज़ी से बढ़ रहा होता है, उसके संसाधन वृद्धि में लगे रहते हैं। जैसे-जैसे सामान्य वृद्धि की दर धीमी होती है, जनन ऊतक परिपक्व होने लगते हैं। किशोरावस्था की इस अवधि को यौवनारंभ कहते हैं (पेज 135)।
नर जनन तंत्र (7.3.3 a, पेज 136, चित्र 7.10)
- वृषण में नर जनन-कोशिका, यानी शुक्राणु, बनते हैं। वृषण उदर गुहा के बाहर वृषण कोष में होते हैं, क्योंकि शुक्राणु बनने के लिए शरीर के ताप से कम ताप चाहिए।
- वृषण टेस्टोस्टेरॉन हॉर्मोन भी बनाते हैं, जो शुक्राणु उत्पादन का नियंत्रण करता है और लड़कों में यौवनावस्था के लक्षण लाता है।
- शुक्राणु शुक्रवाहिका से होकर आगे जाते हैं। शुक्रवाहिका मूत्राशय से आने वाली नली से जुड़ती है, इसलिए मूत्रमार्ग शुक्राणु और मूत्र दोनों का साझा मार्ग है। प्रोस्टेट ग्रंथि और शुक्राशय के स्राव शुक्राणुओं को तरल माध्यम और पोषण देते हैं।
- शुक्राणु बहुत छोटे होते हैं: इनमें मुख्यतः आनुवंशिक पदार्थ होता है और एक लंबी पूँछ, जो तैरने में मदद करती है।
मादा जनन तंत्र (7.3.3 b, पेज 136-137, चित्र 7.11)
- अंडाशय में अंड-कोशिका बनती है; अंडाशय कुछ हॉर्मोन भी बनाते हैं। लड़की के जन्म से ही उसके अंडाशयों में हज़ारों अंड रहते हैं, जो अभी परिपक्व नहीं होते; यौवनारंभ के बाद हर माह दो में से एक अंडाशय एक अंड परिपक्व करता है।
- अंड अंडवाहिका (फेलोपियन ट्यूब) से गर्भाशय की ओर जाता है। दोनों अंडवाहिकाएँ मिलकर लचीली, थैली जैसी संरचना, गर्भाशय, बनाती हैं; गर्भाशय ग्रीवा द्वारा योनि में खुलता है।
- निषेचन अंडवाहिका में होता है। निषेचित अंड बँटकर कोशिकाओं की गेंद जैसा भ्रूण बनता है, जो गर्भाशय की भित्ति में स्थापित होकर बढ़ता है और अंग बनाता है।
- भ्रूण को माँ के रुधिर से पोषण प्लैसेंटा से मिलता है: यह गर्भाशय की भित्ति में धँसी तश्तरी जैसी संरचना है। भ्रूण की ओर इसमें प्रवर्ध होते हैं और माँ की ओर रक्तस्थान, जिससे ग्लूकोज़ और ऑक्सीजन के लिए बड़ा क्षेत्र मिलता है; भ्रूण के अपशिष्ट भी इसी से माँ के रुधिर में जाते हैं। गर्भ के विकास में लगभग 9 मास लगते हैं, और जन्म के समय गर्भाशय की पेशियाँ लय के साथ बार-बार सिकुड़ती हैं, जिससे शिशु बाहर आता है (पेज 137)।
जब अंड का निषेचन नहीं होता (7.3.3 c, पेज 137)
- अनिषेचित अंड लगभग एक दिन जीवित रहता है। गर्भाशय हर माह भ्रूण के लिए तैयारी करता है, इसलिए उसकी भीतरी परत मोटी और स्पंजी हो जाती है। निषेचन न होने पर इस परत की ज़रूरत नहीं रहती, और यह धीरे-धीरे टूटकर रुधिर और म्यूकस के रूप में बाहर निकलती है। यह लगभग हर मास होता है और ऋतुस्राव या रजोधर्म कहलाता है; यह आम तौर पर 2 से 8 दिन तक चलता है।
7. जनन स्वास्थ्य (7.3.3 d, पेज 137-138)
- लैंगिक परिपक्वता धीरे-धीरे आती है, जब शरीर अभी बढ़ ही रहा होता है। इसलिए थोड़ी परिपक्वता का अर्थ यह नहीं कि शरीर या मन संतान की ज़िम्मेदारी के लिए तैयार है। मित्रों, परिवार या दूसरों का दबाव निर्णय को कठिन बना सकता है।
- कुछ रोग लैंगिक संपर्क से फैल सकते हैं: जीवाणु जनित गोनेरिया और सिफलिस, वाइरस जनित मस्सा (Wart) और HIV-AIDS। कंडोम के प्रयोग से इनमें से अनेक का संचरण कुछ सीमा तक रोका जा सकता है।
- गर्भनिरोधी तरीके (पेज 138):
| प्रकार | उदाहरण | किताब की सावधानी |
|---|---|---|
| यांत्रिक अवरोध | कंडोम, योनि में रखी जाने वाली युक्तियाँ | शुक्राणु अंड तक नहीं पहुँचते |
| हॉर्मोन संतुलन बदलना | मुँह से ली जाने वाली गोलियाँ | अंड का मोचन नहीं होता; कुछ विपरीत प्रभाव हो सकते हैं |
| गर्भाशय में युक्ति | लूप, कॉपर-टी | गर्भाशय के उत्तेजन से विपरीत प्रभाव हो सकते हैं |
| शल्यक्रिया | पुरुष की शुक्रवाहिका या स्त्री की अंडवाहिका को अवरुद्ध करना | लंबे समय में सुरक्षित, पर असावधानी से संक्रमण हो सकता है |
- शल्यक्रिया का दुरुपयोग मादा भ्रूण के चयनात्मक गर्भपात के लिए किया जा रहा है, जो गैरकानूनी है। हमारे देश में भ्रूण लिंग निर्धारण कानूनी अपराध है। किताब के अनुसार समाज के स्वास्थ्य के लिए लड़कियों और लड़कों का संतुलित लिंग अनुपात ज़रूरी है, फिर भी कुछ हिस्सों में शिशु लिंग अनुपात तेज़ी से घट रहा है।
- किसी समष्टि का आकार उसकी जन्मदर और मृत्युदर तय करती हैं। बढ़ती जनसंख्या में सबके जीवन-स्तर को सुधारना कठिन होता है; पर यदि निम्न जीवन-स्तर का मुख्य कारण सामाजिक असमानता है, तो जनसंख्या का आकार अपेक्षाकृत कम महत्वपूर्ण हो जाता है (पेज 138)।
8. तीन गलतियाँ जो अंक काटती हैं
- परागण और निषेचन को एक मान लेना। परागण परागकणों का वर्तिकाग्र तक पहुँचना है; निषेचन बाद में, बीजांड में नर और मादा युग्मक का मिलना है।
- युग्मक में पूरे गुणसूत्र लिखना। युग्मक में गुणसूत्रों की संख्या कायिक कोशिका की आधी होती है; पूरी संख्या युग्मनज में लौटती है।
- निषेचन का स्थान गर्भाशय लिखना। मानव में निषेचन अंडवाहिका में होता है; गर्भाशय में भ्रूण स्थापित होता है।
9. हमारे 8 प्रश्न, उत्तर के साथ
पहले कॉपी पर खुद हल करें, फिर उत्तर देखें। ये प्रश्न हमारे अपने हैं, किताब के अभ्यास-प्रश्न नहीं।
प्रश्न 1. एक खेत में एक ही किस्म के 600 पौधे हैं। डी.एन.ए. की प्रतिकृति में आई विभिन्नता के कारण इनमें से 40 पौधे सूखा झेल पाते हैं। एक साल भारी सूखा पड़ता है: सूखा झेलने वाले सभी 40 पौधे बचते हैं, पर बाकी पौधों में से 90% सूख जाते हैं। (a) कुल कितने पौधे बचे? (b) बचे हुए पौधों में सूखा झेलने वाले पौधों का हिस्सा प्रतिशत में कितना है, और सूखे से पहले कितना था? (c) अगर किसी पौधे में यह विभिन्नता न होती और सूखा इतना कड़ा होता कि बाकी सब पौधे सूख जाते, तो इस खेत की समष्टि का क्या होता?
उत्तर:
- (a) बाकी पौधे 600 − 40 = 560; इनमें से बचे 10%, यानी 56। कुल बचे 40 + 56 = 96 पौधे।
- (b) बाद में 40 ÷ 96 × 100 ≈ 41.7%; पहले 40 ÷ 600 × 100 ≈ 6.7%। सूखे के बाद विभिन्नता वाले पौधों का हिस्सा बहुत बढ़ गया।
- (c) पूरी समष्टि खत्म हो सकती थी। निकेत में बड़ा बदलाव आने पर जिन कुछ जीवों में ठीक विभिन्नता होती है, वही बचते हैं; इसीलिए विभिन्नता प्रजाति को बचाए रखने में उपयोगी है (पेज 126)। (संख्याएँ हमारे उदाहरण की हैं।)
प्रश्न 2. एक नर्सरी ऊतक संवर्धन से एक सजावटी पौधे के नए पौधे बनाती है। ये पाँच चरण उलटे-पुलटे लिखे हैं: (P) कैलस को वृद्धि और विभेदन के हॉर्मोन वाले माध्यम में रखना; (Q) पौधे के शीर्ष के बढ़ते भाग से ऊतक अलग करना; (R) नन्हे पौधों को मिट्टी में रोपना; (S) ऊतक को कृत्रिम पोषक माध्यम में रखना; (T) कोशिकाओं का बँटकर कैलस बनाना। (a) सही क्रम लिखिए। (b) कैलस को 60 भागों में बाँटा गया और हर भाग से एक नन्हा पौधा बना। मिट्टी में रोपने के बाद इनमें से 75% पौधे बढ़ पाए। कितने पौधे बढ़े? (c) ऊतक संवर्धन अलैंगिक जनन है या लैंगिक? कारण दीजिए, और किताब में दिए इसके दो लाभ लिखिए।
उत्तर:
- (a) Q → S → T → P → R (पेज 131 का बॉक्स)।
- (b) 60 × 75 ÷ 100 = 45 पौधे।
- (c) अलैंगिक। सारे नए पौधे एक ही जनक पौधे के ऊतक से बनते हैं, दो जीवों के युग्मक नहीं मिलते (पेज 131)। लाभ: एक ही पौधे से अनेक पौधे बनते हैं, और वे संक्रमण से मुक्त हालात में बनते हैं (पेज 131)।
प्रश्न 3. तीन घटनाएँ: (i) सरसों के एक फूल के परागकण उसी फूल के वर्तिकाग्र पर गिर जाते हैं; (ii) एक मधुमक्खी तरबूज़ के एक फूल से परागकण लेकर दूसरे फूल के वर्तिकाग्र पर छोड़ देती है; (iii) हवा एक ही पौधे के एक फूल से परागकण उड़ाकर उसी पौधे के दूसरे फूल पर ले जाती है। (a) हर घटना स्वपरागण है या परपरागण? (b) (ii) और (iii) में वाहक कौन है? (c) सरसों और तरबूज़ के फूलों में से कौन-सा एकलिंगी है और कौन-सा उभयलिंगी?
उत्तर:
- (a) (i) स्वपरागण, क्योंकि परागकण उसी फूल के वर्तिकाग्र पर पहुँचे। (ii) परपरागण। (iii) परपरागण भी, क्योंकि परागकण एक फूल से दूसरे फूल पर गए; दोनों फूल एक ही पौधे के हों, तब भी किताब की परिभाषा में यह दूसरे पुष्प पर स्थानांतरण है (पेज 133)।
- (b) (ii) में प्राणी (मधुमक्खी), (iii) में वायु (पेज 133)।
- (c) तरबूज़ एकलिंगी, सरसों उभयलिंगी (पेज 133)।
प्रश्न 4. एक फूल की वर्तिका 12 mm लंबी है। मान लीजिए परागकण से निकली नलिका 1.5 mm प्रति घंटे की दर से बढ़ती है, और उसे वर्तिका की पूरी लंबाई पार करनी है। (a) इसमें कितने घंटे लगेंगे? (b) दूसरे पौधे के फूल की वर्तिका इससे 20% लंबी है। उसी दर से वहाँ कितना समय लगेगा? (c) निषेचन के बाद फूल के कौन-कौन से भाग प्रायः मुरझाकर गिर जाते हैं?
उत्तर:
- (a) 12 ÷ 1.5 = 8 घंटे।
- (b) लंबाई 12 × 1.2 = 14.4 mm; समय 14.4 ÷ 1.5 = 9.6 घंटे (9 घंटे 36 मिनट)।
- (c) बाह्यदल, पंखुड़ी, पुंकेसर, वर्तिका और वर्तिकाग्र (पेज 133)। (वर्तिका की लंबाई और नलिका की दर हमारे उदाहरण की हैं; किताब ये संख्याएँ नहीं देती।)
प्रश्न 5. नीचे यौवनारंभ में दिखने वाले छह बदलाव हैं: (i) काँख में बाल आना; (ii) त्वचा का तैलीय होना और मुँहासे; (iii) आवाज़ का फटना; (iv) स्तन के आकार में वृद्धि; (v) चेहरे पर दाढ़ी-मूँछ; (vi) रजोधर्म की शुरुआत। (a) इन्हें तीन समूहों में बाँटिए: लड़कों और लड़कियों दोनों में, केवल लड़कियों में, केवल लड़कों में। (b) एक ही कक्षा के दो 13 साल के दोस्तों में से एक में ये बदलाव दिखने लगे हैं और दूसरे में अभी नहीं। क्या यह चिंता की बात है? किताब के आधार पर उत्तर दीजिए। (c) शरीर की लंबाई तेज़ी से बढ़ने के वर्षों में जनन ऊतक मुख्य रूप से परिपक्व क्यों नहीं होते?
उत्तर:
- (a) दोनों में: (i), (ii)। केवल लड़कियों में: (iv), (vi)। केवल लड़कों में: (iii), (v) (पेज 134-135)।
- (b) नहीं। ये बदलाव सबमें एक ही समय या एक तय आयु पर नहीं होते; किसी में जल्दी और तेज़ी से, किसी में धीरे-धीरे होते हैं (पेज 135)।
- (c) तेज़ वृद्धि के समय शरीर के संसाधन मुख्यतः इसी वृद्धि में लगे रहते हैं, इसलिए जनन ऊतक का परिपक्व होना मुख्य प्राथमिकता नहीं होता। सामान्य वृद्धि की दर धीमी होने पर जनन ऊतक परिपक्व होने लगते हैं (पेज 135)।
प्रश्न 6. नर जनन तंत्र के ये तीन भाग उलटे क्रम में लिखे हैं: मूत्रमार्ग, शुक्रवाहिका, वृषण। (a) शुक्राणु जहाँ बनते हैं वहाँ से शुरू करके इन्हें उस क्रम में लिखिए जिसमें शुक्राणु इनसे गुज़रते हैं। (b) वृषण उदर गुहा के बाहर वृषण कोष में क्यों होते हैं? (c) इन तीनों में से कौन-सा भाग दो चीज़ों का साझा मार्ग है, और वे दो चीज़ें कौन-सी हैं?
उत्तर:
- (a) वृषण → शुक्रवाहिका → मूत्रमार्ग (पेज 136, चित्र 7.10)।
- (b) शुक्राणु बनने के लिए शरीर के ताप से कम ताप चाहिए, इसलिए वृषण उदर गुहा के बाहर होते हैं (पेज 136)।
- (c) मूत्रमार्ग, जो शुक्राणुओं और मूत्र दोनों का मार्ग है, क्योंकि शुक्रवाहिका मूत्राशय से आने वाली नली से जुड़ जाती है (पेज 136)।
प्रश्न 7. मादा जनन तंत्र के बारे में: (a) मानव में निषेचन किस अंग में होता है, और भ्रूण किस अंग की भित्ति में स्थापित होता है? (b) इन चरणों को सही क्रम में लिखिए: भ्रूण का गर्भाशय में स्थापित होना; अंडाशय से अंड का निकलना; निषेचित अंड का बँटकर भ्रूण बनना; अंड का अंडवाहिका में शुक्राणु से मिलना। (c) किताब के अनुसार हर माह दो में से एक अंडाशय एक अंड परिपक्व करता है। मान लीजिए दोनों अंडाशय बारी-बारी से यह करते हैं। एक साल में कुल कितने अंड परिपक्व होंगे, और हर अंडाशय से कितने?
उत्तर:
- (a) निषेचन अंडवाहिका (फेलोपियन ट्यूब) में; भ्रूण गर्भाशय की भित्ति में स्थापित होता है (पेज 136-137)।
- (b) अंडाशय से अंड का निकलना → अंडवाहिका में शुक्राणु से मिलना (निषेचन) → बँटकर भ्रूण बनना → गर्भाशय में स्थापित होना (पेज 136)।
- (c) 12 महीने × 1 अंड = 12 अंड; बारी-बारी से हों, तो हर अंडाशय से 12 ÷ 2 = 6। (बारी-बारी वाली बात हमारी मान्यता है; किताब केवल "दो में से एक" कहती है।)
प्रश्न 8. (a) एक कस्बे की जनसंख्या साल की शुरुआत में 25,000 थी। साल भर में 500 जन्म हुए और 200 मृत्यु। साल के अंत में जनसंख्या कितनी हुई, और यह कितने प्रतिशत बढ़ी? (b) दो गाँवों में 6 साल तक के बच्चों की गिनती हुई। गाँव A: 500 लड़के, 460 लड़कियाँ। गाँव B: 640 लड़के, 608 लड़कियाँ। हर गाँव में प्रति 1000 लड़कों पर कितनी लड़कियाँ हैं? (c) किताब के अनुसार भ्रूण का लिंग जानने के बारे में हमारे देश का कानून क्या कहता है, और लिंग अनुपात बनाए रखना क्यों आवश्यक है?
उत्तर:
- (a) 25,000 + 500 − 200 = 25,300; वृद्धि 300 ÷ 25,000 × 100 = 1.2%। समष्टि का आकार जन्मदर और मृत्युदर से तय होता है (पेज 138)।
- (b) A: 460 ÷ 500 × 1000 = 920। B: 608 ÷ 640 × 1000 = 950। गाँव A में लड़कियों का अनुपात कम है।
- (c) हमारे देश में भ्रूण लिंग निर्धारण कानूनी अपराध है। समाज स्वस्थ रहे, इसके लिए किताब लड़कियों और लड़कों का संतुलित लिंग अनुपात ज़रूरी बताती है (पेज 138)। (गाँवों की संख्याएँ हमारे उदाहरण की हैं।)
10. इस अध्याय पर AI का जवाब कैसे परखें
- विधि और जीव मिलाइए। AI किसी जीव की जनन विधि बताए, तो उसे पेज 127-131 की सूची से मिलाइए: द्विखंडन, बहुखंडन, मुकुलन, खंडन, पुनरुद्भवन, कायिक प्रवर्धन, बीजाणु समासंघ।
- जगह जाँचिए। निषेचन कहाँ होता है, भ्रूण कहाँ स्थापित होता है, परागनलिका कहाँ तक जाती है, यह गलत लिखा जाना आम है। हर बार किताब का चित्र (7.8, 7.10, 7.11) देखिए।
- शब्द किताब से मिलाइए। परीक्षा में किताब के शब्द लिखिए: डी.एन.ए. प्रतिकृति, अर्द्धसूत्री विभाजन, युग्मनज, स्वपरागण, परपरागण, वर्तिकाग्र, यौवनारंभ, शुक्रवाहिका, अंडवाहिका, प्लैसेंटा, ऋतुस्राव।
AI से पढ़ाई पर और: AI से पढ़ाई कैसे करें, नकल किए बिना।
कक्षा 10 विज्ञान का अभ्यास
- ऑनलाइन, तुरंत जाँच के साथ: अभ्यास पेज पर कक्षा 10 और विज्ञान का कोई विषय चुनें।
- अंग्रेज़ी में इसी अध्याय के प्रश्न-उत्तर: Class 10 How do Organisms Reproduce?, questions with answers।
- हिंदी में इसी इकाई का अध्याय: कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 5 जैव प्रक्रम।
- अगला अध्याय हिंदी में: कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 8 आनुवंशिकता।
- बोर्ड की तैयारी: कक्षा 10 बोर्ड परीक्षा की तैयारी कैसे करें।
CMDLearn कहाँ फिट होता है
CMDLearn कक्षा 1 से 10 के लिए हिंदी, मराठी और अंग्रेज़ी में एक AI ट्यूटर बना रहा है, जो एक कदम समझाता है और बच्चे का काम जाँचता है, पर लिखना बच्चे पर छोड़ता है। यह अभी तैयार हो रहा है और अभी कोई बच्चा इसका इस्तेमाल नहीं करता। जब आज़माने को कुछ हो, तब ख़बर पाने के लिए वेटलिस्ट से जुड़ें।
स्रोत
सभी 5 नवंबर 2026 को जाँचे गए।
- NCERT, विज्ञान, कक्षा 10 की पाठ्यपुस्तक (हिंदी माध्यम, Reprint 2026-27), विषय-सूची और अध्याय 7 "जीव जनन कैसे करते हैं", पेज 125 से 140: ncert.nic.in/textbook/pdf/jhsc1ps.pdf, ncert.nic.in/textbook/pdf/jhsc107.pdf
- NCERT, Science (अंग्रेज़ी संस्करण), Class X, Chapter 7 "How do Organisms Reproduce?": ncert.nic.in/textbook/pdf/jesc107.pdf
- CBSE, Science (086), Class X 2026-27, course structure (पेज 4-5): cbseacademic.nic.in, Science_SecP1_2026-27.pdf
अध्याय के विचार, शब्द और पेज-संख्याएँ ऊपर के दस्तावेज़ों से हैं। इस पेज की सारी व्याख्याएँ, उदाहरण, प्रश्न और उत्तर हमारे अपने हैं; हर गिनती स्क्रिप्ट से जाँची गई है।
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