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कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 3 धातु एवं अधातु: Hindi medium नोट्स और 8 प्रश्न-उत्तर
CMDLearn · 3 नवंबर 2026
NCERT की कक्षा 10 की हिंदी माध्यम की विज्ञान पाठ्यपुस्तक विज्ञान का तीसरा अध्याय "धातु एवं अधातु" है, पेज 41 से 63 तक। यह गाइड दो काम करती है:
- अध्याय के मुख्य विचारों को छोटे नोट्स में समझाती है;
- अंत में हमारे अपने 8 प्रश्न देती है, हल और उत्तर के साथ।
पाठ्यपुस्तक साथ में खुली रखें। यहाँ की व्याख्याएँ, उदाहरण और प्रश्न हमारे अपने हैं; अंतिम बात पाठ्यपुस्तक की ही मानें। अंग्रेज़ी में इसी अध्याय के अभ्यास-प्रश्न चाहिए, तो Class 10 Metals and Non-metals, questions with answers देखें।
यह गाइड सीधे हिंदी में लिखी गई है, पर किसी हिंदी-माध्यम शिक्षक ने अभी इसकी भाषा नहीं जाँची है (native review pending)।
परीक्षा में यह अध्याय
CBSE ने 2026-27 के लिए कक्षा 10 विज्ञान की वार्षिक परीक्षा 80 अंकों की रखी है, और 20 अंक आंतरिक मूल्यांकन के हैं। यह अध्याय इकाई I, "Chemical Substances - Nature and Behaviour", में आता है, जिसके कुल 25 अंक हैं (CBSE पाठ्यक्रम, पेज 4)। इस इकाई में इस अध्याय के विषय हैं: धातुओं और अधातुओं के गुणधर्म, सक्रियता श्रेणी, आयनिक यौगिकों का बनना और उनके गुण, धातुकर्म के मूल प्रक्रम, और संक्षारण व उससे बचाव (पेज 5)। CBSE अध्याय-वार अंक नहीं देता।
1. भौतिक गुणधर्म (पेज 41-44)
धातुएँ:
- शुद्ध धातु की सतह चमकदार होती है, इसे धात्विक चमक कहते हैं।
- पीटकर पतली चादर बनाई जा सके, यह आघातवर्ध्यता है; सोना और चाँदी इसमें सबसे आगे हैं।
- खींचकर पतला तार बनाया जा सके, यह तन्यता है। सबसे तन्य धातु सोना है: एक ग्राम सोने से लगभग 2 km लंबा तार खींचा जा सकता है।
- धातुएँ ऊष्मा और बिजली की अच्छी चालक हैं। ऊष्मा की सबसे अच्छी चालक चाँदी और ताँबा हैं; लेड और पारद अपेक्षाकृत कमज़ोर चालक हैं।
- कठोर सतह पर टकराने से आवाज़ करें, यह ध्वानिक गुण है। इसी कारण स्कूल की घंटी धातु की बनती है।
अधातुएँ: कार्बन, सल्फ़र, आयोडीन, ऑक्सीजन, हाइड्रोजन आदि। ये ठोस या गैस होती हैं; केवल ब्रोमीन द्रव है।
अपवाद, जो याद रखने लायक हैं (पेज 43-44):
- पारद (मरकरी) को छोड़कर सभी धातुएँ कमरे के ताप पर ठोस हैं।
- गैलियम और सीज़ियम का गलनांक इतना कम है कि हथेली पर रखने से पिघल जाते हैं।
- आयोडीन अधातु है, फिर भी चमकदार है।
- कार्बन के कई रूप (अपररूप) हैं: हीरा सबसे कठोर प्राकृतिक पदार्थ है, और ग्रेफ़ाइट बिजली का चालक है।
- लीथियम, सोडियम और पोटैशियम इतने नरम हैं कि चाकू से कट जाते हैं।
इसलिए केवल भौतिक गुणों से तत्वों को बाँटना पक्का नहीं; रासायनिक गुण ज़्यादा साफ़ फ़र्क दिखाते हैं।
2. धातुओं के रासायनिक गुणधर्म (पेज 45-50)
| अभिक्रिया | सामान्य रूप | किताब का उदाहरण |
|---|---|---|
| धातु + ऑक्सीजन (पेज 46) | धातु ऑक्साइड | 2Cu + O₂ → 2CuO (काला) |
| धातु + जल (पेज 48) | धातु ऑक्साइड या हाइड्रॉक्साइड + हाइड्रोजन | 2Na + 2H₂O → 2NaOH + H₂ |
| धातु + तनु अम्ल (पेज 48-49) | लवण + हाइड्रोजन | Mg, Al, Zn, Fe हाइड्रोजन देती हैं; Cu नहीं |
| धातु A + B का लवण विलयन (पेज 49-50) | A का लवण विलयन + धातु B | ज़्यादा अभिक्रियाशील धातु कम अभिक्रियाशील को हटाती है |
ऑक्साइड (पेज 45-47):
- धातु ऑक्साइड प्रायः क्षारकीय होते हैं; ज़्यादातर अधातुओं के ऑक्साइड पानी में घुलकर अम्ल बनाते हैं (पेज 45)।
- एल्युमिनियम ऑक्साइड और ज़िंक ऑक्साइड अम्ल और क्षारक दोनों से अभिक्रिया करके लवण और जल देते हैं; ऐसे ऑक्साइड उभयधर्मी ऑक्साइड हैं। किताब का उदाहरण: Al₂O₃ + 6HCl → 2AlCl₃ + 3H₂O और Al₂O₃ + 2NaOH → 2NaAlO₂ + H₂O।
- ज़्यादातर धातु ऑक्साइड पानी में नहीं घुलते, पर सोडियम और पोटैशियम के ऑक्साइड घुलकर क्षार बनाते हैं।
- पोटैशियम और सोडियम खुले में आग पकड़ लेते हैं, इसलिए किरोसिन तेल में डुबोकर रखे जाते हैं (पेज 46-47)।
- मैग्नीशियम, एल्युमिनियम, ज़िंक, लेड पर ऑक्साइड की पतली परत बनकर आगे के ऑक्सीकरण को रोकती है। ऐनोडीकरण में एल्युमिनियम पर यह परत मोटी की जाती है (पेज 47)।
- चाँदी और सोना ऊँचे ताप पर भी ऑक्सीजन से अभिक्रिया नहीं करते (पेज 46)।
जल के साथ (पेज 48): पोटैशियम और सोडियम ठंडे पानी से इतनी तेज़ी से अभिक्रिया करते हैं कि निकली हाइड्रोजन तुरंत जल उठती है। कैल्सियम की अभिक्रिया धीमी है, और हाइड्रोजन के बुलबुले चिपकने से वह तैरने लगता है। मैग्नीशियम केवल गर्म पानी से, और एल्युमिनियम, आयरन, ज़िंक केवल भाप से अभिक्रिया करते हैं। लेड, कॉपर, चाँदी और सोना पानी से अभिक्रिया नहीं करते।
अम्ल के साथ (पेज 48-49): नाइट्रिक अम्ल प्रबल ऑक्सीकारक है, इसलिए धातुओं से प्रायः हाइड्रोजन नहीं निकलती; केवल मैग्नीशियम और मैंगनीज़ बहुत तनु HNO₃ से हाइड्रोजन देते हैं। एक्वा रेजिया (Aqua regia) सांद्र HCl और सांद्र HNO₃ का 3:1 का ताज़ा मिश्रण है, जो सोना और प्लैटिनम घोल देता है।
सक्रियता श्रेणी (सारणी 3.2, पेज 50), सबसे अभिक्रियाशील से सबसे कम तक:
पोटैशियम, सोडियम, कैल्सियम, मैग्नीशियम, एल्युमिनियम, ज़िंक, आयरन, लेड, (हाइड्रोजन), कॉपर, पारद, चाँदी, सोना।
हाइड्रोजन से ऊपर की धातुएँ तनु अम्लों से हाइड्रोजन हटा सकती हैं।
3. आयनिक यौगिक (पेज 51-54)
- उत्कृष्ट गैसों का बाहरी कोश पूरा भरा होता है, इसलिए वे बहुत कम अभिक्रिया करती हैं। बाकी तत्व पूरा कोश पाने के लिए अभिक्रिया करते हैं।
- सोडियम (2, 8, 1) एक इलेक्ट्रॉन देकर Na⁺ बनता है, और क्लोरीन (2, 8, 7) एक इलेक्ट्रॉन लेकर Cl⁻। विपरीत आवेश वाले आयन आपस में खिंचकर सोडियम क्लोराइड बनाते हैं, जो अणुओं के रूप में नहीं, आयनों के समूह के रूप में रहता है।
- धातु से अधातु को इलेक्ट्रॉन जाने से बने यौगिक आयनिक या वैद्युत संयोजक यौगिक कहलाते हैं।
- गुण: ठोस, कुछ कठोर और भंगुर; गलनांक और क्वथनांक ऊँचे (सारणी 3.4, पेज 54); पानी में प्रायः घुलनशील, पर किरोसिन और पेट्रोल में नहीं; पानी में घुलने पर या पिघलने पर बिजली चलाते हैं, ठोस अवस्था में नहीं, क्योंकि ठोस में आयन हिल नहीं पाते।
4. धातुओं का निष्कर्षण (पेज 55-58)
- पृथ्वी की भूपर्पटी में प्राकृतिक रूप से मिलने वाले तत्व या यौगिक खनिज हैं; जिन खनिजों से धातु लाभ के साथ निकाली जा सके, वे अयस्क हैं। अयस्क के साथ मिट्टी, रेत जैसी अशुद्धियाँ गैंग कहलाती हैं।
- कम सक्रिय धातुएँ (श्रेणी में नीचे): सोना, चाँदी, प्लैटिनम और कॉपर स्वतंत्र अवस्था में भी मिलते हैं (पेज 55)। इनके ऑक्साइड केवल गर्म करने से धातु बन जाते हैं (पेज 56)।
- मध्यम सक्रिय धातुएँ (Zn, Fe, Pb आदि): सल्फ़ाइड अयस्क को अधिक वायु में गर्म करना भर्जन, कार्बोनेट अयस्क को सीमित वायु में गर्म करना निस्तापन है। फिर कार्बन जैसे अपचायक से ऑक्साइड को धातु में बदला जाता है (पेज 57)।
- विस्थापन से अपचयन: सोडियम, कैल्सियम, एल्युमिनियम जैसी अधिक अभिक्रियाशील धातुएँ अपचायक का काम करती हैं। आयरन(III) ऑक्साइड और एल्युमिनियम की अभिक्रिया, थर्मिट अभिक्रिया, रेल की पटरियाँ और टूटे मशीनी पुर्ज़े जोड़ने में काम आती है: Fe₂O₃ + 2Al → 2Fe + Al₂O₃ + ऊष्मा (पेज 57)।
- सबसे सक्रिय धातुएँ (Na, Mg, Ca, Al): कार्बन इन्हें ऑक्साइड से नहीं निकाल सकता, क्योंकि ऑक्सीजन से इनकी बंधुता कार्बन से अधिक है। इन्हें गलित क्लोराइड के विद्युत अपघटन से निकालते हैं: धातु कैथोड पर जमती है, क्लोरीन ऐनोड पर निकलती है (पेज 58)।
- विद्युत अपघटनी परिष्करण: अशुद्ध धातु ऐनोड, शुद्ध धातु की पतली पट्टी कैथोड, और उसी धातु के लवण का विलयन विद्युत अपघट्य। शुद्ध धातु कैथोड पर जमती है; घुलने वाली अशुद्धियाँ विलयन में जाती हैं और न घुलने वाली ऐनोड के नीचे ऐनोड पंक बनकर बैठती हैं (पेज 58)।
5. संक्षारण और मिश्रातु (पेज 58-60)
- चाँदी हवा में सल्फ़र से अभिक्रिया करके काली पड़ जाती है (सिल्वर सल्फ़ाइड)। कॉपर आर्द्र कार्बन डाइऑक्साइड से अभिक्रिया करके हरी परत (बेसिक कॉपर कार्बोनेट) पा लेता है। लोहे पर भूरे, परतदार पदार्थ, जंग, की परत चढ़ती है (पेज 58-59)।
- लोहे पर जंग हवा और पानी दोनों के होने पर लगती है (चित्र 3.13, पेज 59)।
- बचाव: पेंट, तेल, ग्रीज़, यशदलेपन (ज़िंक की परत), क्रोमियम लेपन, ऐनोडीकरण या मिश्रातु बनाना (पेज 59-60)।
- मिश्रातु दो या अधिक धातुओं, या एक धातु और एक अधातु का समांगी मिश्रण है। शुद्ध लोहे में लगभग 0.05% कार्बन मिलाने से वह कठोर और मज़बूत हो जाता है; निकैल और क्रोमियम मिलाने से स्टेनलेस स्टील बनता है, जिस पर जंग नहीं लगता (पेज 60)।
- पारद वाली मिश्रातु अमलगम कहलाती है। मिश्रातु की बिजली चालकता और गलनांक शुद्ध धातु से कम होते हैं: पीतल (Cu + Zn) और काँसा (Cu + Sn) अच्छे चालक नहीं, और सोल्डर (Pb + Sn) का गलनांक कम है, इसलिए तार जोड़ने में काम आता है (पेज 60)।
- दिल्ली का लौह स्तंभ 1600 से अधिक वर्ष पहले भारतीय लोहारों ने बनाया; यह 8 m ऊँचा और 6000 kg भारी है, और जंग से बचा हुआ है (पेज 60)।
6. तीन गलतियाँ जो अंक काटती हैं
- विस्थापन की दिशा उलटना। ज़्यादा सक्रिय धातु कम सक्रिय को हटाती है, उलटा नहीं। पहले सक्रियता श्रेणी में दोनों धातुओं की जगह देखें।
- भर्जन और निस्तापन को मिलाना। सल्फ़ाइड + अधिक वायु = भर्जन; कार्बोनेट + सीमित वायु = निस्तापन।
- "ठोस आयनिक यौगिक बिजली चलाता है" लिखना। केवल घोल या पिघली अवस्था में, जहाँ आयन चल सकें।
7. हमारे 8 प्रश्न, उत्तर के साथ
पहले कॉपी पर खुद हल करें, फिर उत्तर देखें। ये प्रश्न हमारे अपने हैं, किताब के अभ्यास-प्रश्न नहीं।
प्रश्न 1. एक विद्यार्थी कहती है: "जो तत्व चमकता है और बिजली चलाता है, वह धातु ही होगा।" (a) अध्याय से दो ऐसी अधातुएँ बताइए जो इस नियम को गलत साबित करती हैं। (b) तत्व धातु है या अधातु, यह पक्का करने के लिए कौन-सी रासायनिक जाँच ज़्यादा भरोसेमंद है?
उत्तर:
- (a) आयोडीन अधातु है, फिर भी चमकदार है; ग्रेफ़ाइट (कार्बन का अपररूप) अधातु है, फिर भी बिजली चलाता है (पेज 43-44)।
- (b) तत्व को जलाकर उसके ऑक्साइड की प्रकृति जाँचें: धातु ऑक्साइड प्रायः क्षारकीय होते हैं, और ज़्यादातर अधातुओं के ऑक्साइड पानी में घुलकर अम्ल बनाते हैं (पेज 45-46)। किताब भी कहती है कि रासायनिक गुण ज़्यादा साफ़ बँटवारा करते हैं (पेज 44)।
प्रश्न 2. ज़िंक ऑक्साइड (ZnO) एक उभयधर्मी ऑक्साइड है। (a) इसकी तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से अभिक्रिया का संतुलित समीकरण लिखिए। (b) इसकी सोडियम हाइड्रॉक्साइड से अभिक्रिया का संतुलित समीकरण लिखिए; इसमें सोडियम ज़िंकेट (Na₂ZnO₂) बनता है। (c) दोनों अभिक्रियाओं में कौन-से दो प्रकार के उत्पाद एक जैसे हैं?
उत्तर:
- (a) ZnO + 2HCl → ZnCl₂ + H₂O। जाँच: Zn 1 = 1, O 1 = 1, H 2 = 2, Cl 2 = 2।
- (b) ZnO + 2NaOH → Na₂ZnO₂ + H₂O। जाँच: Zn 1 = 1, Na 2 = 2, O 3 = 3, H 2 = 2।
- (c) दोनों में लवण और जल बनते हैं। अम्ल और क्षारक दोनों से लवण और जल देना ही उभयधर्मी ऑक्साइड की पहचान है (पेज 46)।
प्रश्न 3. (a) एक विद्यार्थी ज़िंक के टुकड़े पर तनु नाइट्रिक अम्ल डालता है और सोचता है कि हाइड्रोजन निकलेगी। आम तौर पर ऐसा क्यों नहीं होता? (b) कौन-सी दो धातुएँ बहुत तनु नाइट्रिक अम्ल से भी हाइड्रोजन देती हैं? (c) शिक्षक को प्रदर्शन के लिए 20 mL एक्वा रेजिया बनानी है। इसमें कितना सांद्र HCl और कितना सांद्र HNO₃ लगेगा? (d) एक्वा रेजिया ऐसा क्या कर सकती है, जो इसके दोनों अम्ल अलग-अलग नहीं कर सकते?
उत्तर:
- (a) नाइट्रिक अम्ल प्रबल ऑक्सीकारक है। धातु से बनी हाइड्रोजन को यह ऑक्सीकृत करके पानी बना देता है और खुद नाइट्रोजन के किसी ऑक्साइड (N₂O, NO, NO₂) में अपचयित हो जाता है (पेज 49)।
- (b) मैग्नीशियम और मैंगनीज़ (पेज 49)।
- (c) अनुपात 3:1 है, यानी कुल 4 भाग: 20 ÷ 4 = 5 mL एक भाग। 15 mL सांद्र HCl और 5 mL सांद्र HNO₃। यह हमेशा ताज़ा बनाई जाती है और बहुत संक्षारक, धुआँ देने वाला द्रव है, इसलिए केवल शिक्षक ही इसे संभालें (पेज 49)।
- (d) यह सोना और प्लैटिनम घोल सकती है, जबकि अकेला HCl या अकेला HNO₃ सोने को नहीं घोलता (पेज 49)।
प्रश्न 4. सक्रियता श्रेणी (पेज 50) देखकर बताइए कि किन जोड़ों में विस्थापन होगा: (a) ज़िंक की पत्ती + कॉपर सल्फ़ेट विलयन; (b) लेड का टुकड़ा + ज़िंक सल्फ़ेट विलयन; (c) मैग्नीशियम का फ़ीता + आयरन सल्फ़ेट विलयन; (d) चाँदी का तार + कॉपर सल्फ़ेट विलयन। (e) (a) में 1.3 g ज़िंक पूरा अभिक्रिया कर ले, तो कितना कॉपर जमेगा? (Zn = 65, Cu = 63.5 लीजिए।)
उत्तर:
- (a) हाँ: Zn + CuSO₄ → ZnSO₄ + Cu। ज़िंक, कॉपर से ऊपर है।
- (b) नहीं। लेड, ज़िंक से नीचे है।
- (c) हाँ: Mg + FeSO₄ → MgSO₄ + Fe। मैग्नीशियम, आयरन से ऊपर है।
- (d) नहीं। चाँदी, कॉपर से नीचे है।
- (e) 1.27 g। समीकरण में 65 g ज़िंक से 63.5 g कॉपर निकलता है। इसलिए 1.3 g से 1.3 × 63.5 ÷ 65 = 1.27 g (नियम, पेज 49-50)।
प्रश्न 5. कैल्सियम (परमाणु संख्या 20) और क्लोरीन (17) मिलकर कैल्सियम क्लोराइड (CaCl₂) बनाते हैं। (a) दोनों के इलेक्ट्रॉन विन्यास लिखिए। (b) कौन कितने इलेक्ट्रॉन देता या लेता है, और कौन-से आयन बनते हैं? (c) सारणी 3.4 के अनुसार CaCl₂ का गलनांक 1045 K है। यह कितने डिग्री सेल्सियस हुआ? (K में से 273 घटाइए।) (d) CaCl₂ का ठोस टुकड़ा बिजली नहीं चलाता, पर पिघलने पर चलाता है। क्यों?
उत्तर:
- (a) Ca: 2, 8, 8, 2; Cl: 2, 8, 7 (सारणी 3.3, पेज 52)।
- (b) कैल्सियम अपने 2 इलेक्ट्रॉन देकर Ca²⁺ बनता है; दो क्लोरीन परमाणु एक-एक इलेक्ट्रॉन लेकर दो Cl⁻ बनते हैं। इसीलिए सूत्र CaCl₂ है।
- (c) 772 °C (1045 − 273)।
- (d) ठोस में आयन अपनी जगह जकड़े रहते हैं; पिघलने पर गर्मी उनके बीच का आकर्षण तोड़ देती है और आयन चलकर बिजली ले जाते हैं (पेज 54)।
प्रश्न 6. हर अयस्क या धातु के लिए बताइए कि सक्रियता श्रेणी में उसकी जगह के हिसाब से धातु कैसे प्राप्त होगी: (a) सोना; (b) लेड सल्फ़ाइड (PbS); (c) गलित मैग्नीशियम क्लोराइड (MgCl₂)। (b) के दोनों चरणों के संतुलित समीकरण भी लिखिए, जिसमें दूसरे चरण में कार्बन अपचायक है।
उत्तर:
- (a) स्वतंत्र अवस्था में मिलता है, क्योंकि यह श्रेणी में सबसे नीचे है (पेज 55)।
- (b) लेड मध्यम सक्रिय है और यह सल्फ़ाइड अयस्क है, इसलिए पहले भर्जन, फिर कार्बन से अपचयन (पेज 57): 2PbS + 3O₂ → 2PbO + 2SO₂ (Pb 2 = 2, S 2 = 2, O 6 = 6), फिर PbO + C → Pb + CO (Pb, O, C सब 1 = 1)।
- (c) मैग्नीशियम बहुत सक्रिय है, कार्बन इसे नहीं निकाल सकता, इसलिए गलित क्लोराइड का विद्युत अपघटन: मैग्नीशियम कैथोड पर जमता है, क्लोरीन ऐनोड पर निकलती है (पेज 58)।
प्रश्न 7. एक रेल-पटरी जोड़ने के लिए थर्मिट अभिक्रिया में 32 g आयरन(III) ऑक्साइड इस्तेमाल हुआ: Fe₂O₃ + 2Al → 2Fe + Al₂O₃ (Fe = 56, O = 16, Al = 27 लीजिए)। (a) कितना पिघला हुआ लोहा बनेगा? (b) कितना एल्युमिनियम चाहिए? (c) किसका ऑक्सीकरण हुआ और किसका अपचयन? (d) लोहा पिघली अवस्था में क्यों निकलता है?
उत्तर:
- Fe₂O₃ का सूत्र-द्रव्यमान = 2 × 56 + 3 × 16 = 160। इसलिए 32 g = 32 ÷ 160 = 0.2 भाग (मोल)।
- (a) 22.4 g लोहा। हर भाग Fe₂O₃ से 2 भाग Fe: 0.2 × 2 × 56 = 22.4।
- (b) 10.8 g एल्युमिनियम। हर भाग Fe₂O₃ के लिए 2 भाग Al: 0.2 × 2 × 27 = 10.8।
- (c) एल्युमिनियम ऑक्सीजन लेकर Al₂O₃ बना, यानी उसका ऑक्सीकरण हुआ; Fe₂O₃ ने ऑक्सीजन खोई, यानी उसका अपचयन हुआ।
- (d) यह अभिक्रिया अत्यधिक ऊष्माक्षेपी है; इतनी ऊष्मा निकलती है कि धातु पिघली अवस्था में बनती है (पेज 57)।
प्रश्न 8. (a) एक घर में चाँदी की पायल काली पड़ गई और ताँबे के पुराने बर्तन पर हरी परत आ गई। दोनों परतें किन पदार्थों की हैं? (b) साइकिल की चेन और लोहे की बाल्टी को जंग से बचाने का एक-एक उपयुक्त तरीका बताइए। (c) बिजली के तार जोड़ने में सोल्डर क्यों, और बिजली के सर्किट में पीतल की जगह शुद्ध ताँबा क्यों? (d) जंग न लगने वाला स्टेनलेस स्टील लोहे में क्या मिलाकर बनता है?
उत्तर:
- (a) चाँदी पर सिल्वर सल्फ़ाइड (हवा के सल्फ़र से), ताँबे पर बेसिक कॉपर कार्बोनेट (आर्द्र कार्बन डाइऑक्साइड से) (पेज 58-59)।
- (b) चेन चलती रहती है, इसलिए तेल या ग्रीज़; बाल्टी पर यशदलेपन (ज़िंक की परत) (पेज 59-60)।
- (c) सोल्डर (Pb + Sn) का गलनांक कम है, इसलिए आसानी से पिघलकर जोड़ बनाता है; पीतल जैसी मिश्रातु की बिजली चालकता शुद्ध ताँबे से कम है (पेज 60)।
- (d) निकैल और क्रोमियम (पेज 60)।
8. इस अध्याय पर AI का जवाब कैसे परखें
- श्रेणी देखिए। AI कहे कि "चाँदी, कॉपर सल्फ़ेट से कॉपर हटा देगी", तो सक्रियता श्रेणी खोलिए: चाँदी नीचे है, इसलिए नहीं।
- समीकरण में परमाणु गिनिए। भर्जन और थर्मिट के समीकरण में हर तत्व दोनों ओर बराबर होना चाहिए।
- शब्द किताब से मिलाइए। परीक्षा में किताब के शब्द लिखिए: भर्जन, निस्तापन, यशदलेपन, उभयधर्मी ऑक्साइड, ऐनोड पंक।
AI से पढ़ाई पर और: AI से पढ़ाई कैसे करें, नकल किए बिना।
कक्षा 10 विज्ञान का अभ्यास
- ऑनलाइन, तुरंत जाँच के साथ: अभ्यास पेज पर कक्षा 10 और विज्ञान का कोई विषय चुनें।
- अंग्रेज़ी में इसी अध्याय के नोट्स: Class 10 Metals and Non-metals notes।
- बोर्ड की तैयारी: कक्षा 10 बोर्ड परीक्षा की तैयारी कैसे करें।
CMDLearn कहाँ फिट होता है
CMDLearn कक्षा 1 से 10 के लिए हिंदी, मराठी और अंग्रेज़ी में एक AI ट्यूटर बना रहा है, जो एक कदम समझाता है और बच्चे का काम जाँचता है, पर लिखना बच्चे पर छोड़ता है। यह अभी तैयार हो रहा है और अभी कोई बच्चा इसका इस्तेमाल नहीं करता। जब आज़माने को कुछ हो, तब ख़बर पाने के लिए वेटलिस्ट से जुड़ें।
स्रोत
सभी 3 नवंबर 2026 को जाँचे गए।
- NCERT, विज्ञान, कक्षा 10 की पाठ्यपुस्तक (हिंदी माध्यम, Reprint 2026-27), अध्याय 3 "धातु एवं अधातु", पेज 41 से 63: ncert.nic.in/textbook/pdf/jhsc103.pdf
- NCERT, Science (अंग्रेज़ी संस्करण), Class X, Chapter 3 "Metals and Non-metals": ncert.nic.in/textbook/pdf/jesc103.pdf
- CBSE, Science (086), Class X 2026-27, course structure (पेज 4-5): cbseacademic.nic.in, Science_SecP1_2026-27.pdf
अध्याय के विचार, शब्द और पेज-संख्याएँ ऊपर के दस्तावेज़ों से हैं। इस पेज की सारी व्याख्याएँ, उदाहरण, समीकरण वाले प्रश्न और उत्तर हमारे अपने हैं; हर समीकरण और हर गिनती स्क्रिप्ट से जाँची गई है।
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