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कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 6 नियंत्रण एवं समन्वय: Hindi medium नोट्स और 8 प्रश्न-उत्तर
NCERT की कक्षा 10 की हिंदी माध्यम की विज्ञान पाठ्यपुस्तक विज्ञान का छठा अध्याय "नियंत्रण एवं समन्वय" है, पेज 111 से 124 तक। यह गाइड दो काम करती है:
- अध्याय के मुख्य विचारों को छोटे नोट्स में समझाती है;
- अंत में हमारे अपने 8 प्रश्न देती है, हल और उत्तर के साथ।
पाठ्यपुस्तक साथ में खुली रखें। यहाँ की व्याख्याएँ, उदाहरण और प्रश्न हमारे अपने हैं; अंतिम बात पाठ्यपुस्तक की ही मानें। अंग्रेज़ी में इसी अध्याय के नोट्स चाहिए, तो Class 10 Control and Coordination notes देखें।
यह गाइड सीधे हिंदी में लिखी गई है, पर किसी हिंदी-माध्यम शिक्षक ने अभी इसकी भाषा नहीं जाँची है (native review pending)।
परीक्षा में यह अध्याय
CBSE ने 2026-27 के लिए कक्षा 10 विज्ञान की वार्षिक परीक्षा 80 अंकों की रखी है। यह अध्याय इकाई II, "World of Living", में आता है, जिसके कुल 25 अंक हैं (CBSE पाठ्यक्रम, पेज 4)। पाठ्यक्रम में इसके हिस्से हैं: पौधों की अनुवर्तन गतियाँ, पादप हॉर्मोन का परिचय, तंत्रिका तंत्र, ऐच्छिक, अनैच्छिक और प्रतिवर्ती क्रिया, और जंतु हॉर्मोन (पेज 5)। इसी इकाई में जैव प्रक्रम, जनन और आनुवंशिकता भी हैं। CBSE अध्याय-वार अंक नहीं देता।
1. नियंत्रण और समन्वय क्यों (पेज 111)
- हर गति वृद्धि से नहीं होती। अंकुर का मिट्टी हटाकर बाहर आना वृद्धि है, पर दौड़ती बिल्ली या जुगाली करती भैंस की गति वृद्धि नहीं है।
- जीव अपने आस-पास के बदलाव पर, अपने लाभ के लिए गति करते हैं, और ये गतियाँ सावधानी से नियंत्रित होती हैं। उदाहरण: कक्षा में दोस्त से बात करनी हो, तो हम चिल्लाते नहीं, धीरे बोलते हैं।
- बहुकोशिकीय जीवों में यह काम विशेष ऊतक करते हैं। जंतुओं में तंत्रिका ऊतक और पेशी ऊतक, और साथ में हॉर्मोन।
2. तंत्रिका कोशिका और सूचना का सफ़र (6.1, पेज 112)
- सूचना पहले ग्राही पकड़ते हैं। ये प्रायः ज्ञानेंद्रियों में होते हैं: आंतरिक कर्ण, नाक, जिह्वा। स्वाद पहचानने वाले रस संवेदी ग्राही हैं और गंध पहचानने वाले घ्राणग्राही।
- तंत्रिका कोशिका (न्यूरॉन) के भाग (चित्र 6.1 a): द्रुमिका, कोशिका काय (केंद्रक के साथ), लंबा तंत्रिकाक्ष (एक्सॉन), और तंत्रिका का अंतिम सिरा।
- सफ़र का क्रम: द्रुमिका सूचना लेती है; एक रासायनिक क्रिया से विद्युत आवेग बनता है; आवेग कोशिका काय से होकर एक्सॉन के अंत तक जाता है; वहाँ कुछ रसायन छूटते हैं; ये रसायन दो कोशिकाओं के बीच की खाली जगह, सिनेप्स (अंतर्ग्रथन), को पार करके अगली कोशिका में फिर विद्युत आवेग शुरू करते हैं।
- तंत्रिका से पेशी तक का जोड़ तंत्रिका पेशीय संधि है (चित्र 6.1 b)। इसी तरह संदेश पेशियों या ग्रंथियों तक पहुँचता है।
3. प्रतिवर्ती क्रिया और प्रतिवर्ती चाप (6.1.1, पेज 113-114)
- प्रतिवर्ती क्रिया: किसी बदलाव पर अचानक, बिना सोचे होने वाली क्रिया। जैसे आग की लौ से हाथ झट से खींच लेना।
- सोचने में समय लगता है, क्योंकि उसमें मस्तिष्क की बहुत-सी तंत्रिका कोशिकाओं का जटिल काम शामिल है। खतरे में इतना रुकना भारी पड़ सकता है।
- इसलिए ऊष्मा पहचानने वाली तंत्रिका को सीधे पेशी चलाने वाली तंत्रिका से जोड़ दिया जाता है। यह जोड़ प्रतिवर्ती चाप है (चित्र 6.2)।
- चित्र 6.2 का क्रम: त्वचा का ग्राही → संवेदी तंत्रिका कोशिका → मेरुरज्जु में प्रतिसारण तंत्रिका कोशिका → प्रेरक तंत्रिका कोशिका → कार्यकर (भुजा की पेशी)।
- प्रतिवर्ती चाप मेरुरज्जु में बनते हैं, फिर भी सूचना मस्तिष्क तक भी पहुँचती है (पेज 114)।
- जिन जंतुओं में सोचने वाला न्यूरॉन जाल बहुत कम है या है ही नहीं, उनमें प्रतिवर्ती चाप ही काम चलाता है। जटिल मस्तिष्क वाले जंतुओं में भी यह तुरंत अनुक्रिया का तेज़ तरीका बना रहा (पेज 114)।
4. मानव मस्तिष्क (6.1.2, पेज 115-116)
- मस्तिष्क और मेरुरज्जु मिलकर केंद्रीय तंत्रिका तंत्र बनाते हैं। मस्तिष्क से निकलने वाली कपाल तंत्रिकाएँ और मेरुरज्जु से निकलने वाली मेरु तंत्रिकाएँ मिलकर परिधीय तंत्रिका तंत्र बनाती हैं, जो केंद्रीय तंत्र और शरीर के बाकी भागों के बीच संदेश पहुँचाता है (पेज 115)।
- लिखना, बात करना, कुर्सी घुमाना, ताली बजाना ऐच्छिक क्रियाएँ हैं: हम तय करके करते हैं।
- मस्तिष्क के तीन मुख्य भाग हैं (चित्र 6.3):
| भाग | मुख्य काम (पेज 116) |
|---|---|
| अग्रमस्तिष्क | सोचने वाला मुख्य भाग। सुनने, सूँघने, देखने के अलग-अलग क्षेत्र; साहचर्य क्षेत्र सूचनाओं को जोड़कर निर्णय लेते हैं; प्रेरक क्षेत्र ऐच्छिक पेशियों तक आदेश भेजते हैं; पेट भरने का एहसास देने वाला भूख केंद्र भी यहीं है |
| मध्यमस्तिष्क | कई अनैच्छिक क्रियाएँ (पश्चमस्तिष्क के साथ मिलकर) |
| पश्चमस्तिष्क | मेडुला: रक्तदाब, लार आना, वमन जैसी अनैच्छिक क्रियाएँ; अनुमस्तिष्क: ऐच्छिक क्रियाओं की परिशुद्धि, शरीर की संस्थिति और संतुलन, उदाहरण: साइकिल चलाना, एक सीधी लकीर पर चलना, या मेज़ से पेंसिल उठाना; पॉन्स भी इसी भाग में है (चित्र 6.3) |
- चित्र 6.3 में अग्रमस्तिष्क का बड़ा भाग प्रमस्तिष्क है; नीचे हाइपोथैलमस और पीयूष ग्रंथि दिखाई गई हैं।
- अनैच्छिक क्रियाएँ हमारे सोचने के नियंत्रण में नहीं होतीं: हृदय का धड़कना, पुतली का आकार बदलना, स्वादिष्ट भोजन देखकर मुँह में पानी आना (पेज 116)।
5. सुरक्षा और पेशी की गति (6.1.3-6.1.4, पेज 116-117)
- मस्तिष्क हड्डियों के एक बॉक्स (कपाल) में, तरल से भरे एक गुब्बारे के अंदर रहता है, जो झटके सोखता है। मेरुरज्जु की रक्षा कशेरुकदंड (रीढ़ की हड्डी) करता है।
- तंत्रिका ऊतक सूचना इकट्ठा करता है, निर्णय लेता है और उसे पेशियों तक भेजता है; अंतिम काम पेशी ऊतक करता है।
- पेशी कोशिका अपनी आकृति बदलकर छोटी होती है। उसमें विशेष प्रोटीन होते हैं; तंत्रिका का विद्युत आवेग आने पर इन प्रोटीनों की व्यवस्था और आकृति बदल जाती है (पेज 117)।
6. पादपों में समन्वय (6.2, पेज 117-120)
पादपों में न तंत्रिका तंत्र है, न पेशियाँ। फिर भी वे दो तरह की गति दिखाते हैं:
| गति | उदाहरण | कैसे होती है |
|---|---|---|
| वृद्धि से मुक्त, तुरंत (6.2.1) | छुई-मुई की पत्तियाँ छूते ही मुड़ना (चित्र 6.4) | छूने की सूचना कोशिका से कोशिका तक विद्युत-रासायनिक साधन से जाती है; कोशिकाएँ अपने जल की मात्रा बदलकर फूलती या सिकुड़ती हैं, जिससे उनकी आकृति बदलती है (पेज 118) |
| वृद्धि पर आश्रित, धीमी (6.2.2) | मटर का प्रतान सहारे को लपेटना | सहारे को छूने वाला भाग धीमे बढ़ता है, दूर वाला भाग तेज़, इसलिए प्रतान सहारे को चारों ओर से जकड़ लेता है (पेज 118) |
अनुवर्तन (दिशिक गतियाँ) (पेज 118-119): उद्दीपन की ओर या उससे दूर होने वाली वृद्धि।
- प्रकाशानुवर्तन: प्ररोह प्रकाश की ओर मुड़ता है, जड़ प्रकाश से दूर (चित्र 6.5)।
- गुरुत्वानुवर्तन: जड़ नीचे की ओर बढ़ती है (धनात्मक), प्ररोह ऊपर की ओर (ऋणात्मक) (चित्र 6.6)।
- जलानुवर्तन (जल की ओर) और रसायनानुवर्तन (रसायन की ओर) भी होते हैं। रसायनानुवर्तन का उदाहरण: पराग नलिका का बीजांड की ओर बढ़ना (पेज 119)।
- छुई-मुई की गति बहुत तेज़ है; रात-दिन के हिसाब से फूलों की गति बहुत धीमी है (पेज 119)।
विद्युत आवेग की सीमाएँ (पेज 119-120): आवेग केवल उन कोशिकाओं तक पहुँचता है जो तंत्रिका ऊतक से जुड़ी हैं, हर कोशिका तक नहीं; और एक बार आवेग बनने के बाद कोशिका को अगला आवेग बनाने से पहले कुछ समय चाहिए। इसलिए बहुकोशिकीय जीव रासायनिक संचरण भी करते हैं: कोशिकाएँ एक यौगिक छोड़ती हैं, जो आस-पास फैल जाता है, और जिन कोशिकाओं की सतह पर उसे पहचानने वाले विशेष अणु हैं, वे उस पर काम करती हैं। यह धीमा है, पर सभी कोशिकाओं तक पहुँचता है और लगातार चल सकता है।
पादप हॉर्मोन (पेज 120): ये बनते कहीं और हैं और विसरण से काम की जगह तक पहुँचते हैं।
| हॉर्मोन | काम |
|---|---|
| ऑक्सिन | प्ररोह के अग्रभाग में बनता है और कोशिकाओं की लंबाई बढ़ाता है। एक ओर से प्रकाश आए, तो यह छाया वाली ओर चला जाता है; वहाँ की कोशिकाएँ ज़्यादा लंबी होती हैं, इसलिए प्ररोह प्रकाश की ओर मुड़ता है |
| जिब्बेरेलिन | ऑक्सिन की तरह तने की वृद्धि में मदद |
| साइटोकाइनिन | कोशिका विभाजन को प्रेरित करता है; इसलिए फलों और बीजों जैसी तेज़ विभाजन वाली जगहों पर अधिक सांद्रता में मिलता है |
| एब्सिसिक अम्ल | वृद्धि को रोकता है; पत्तियों का मुरझाना भी इसके प्रभावों में है |
7. जंतुओं में हॉर्मोन (6.3, पेज 120-123)
- खतरे में गिलहरी का शरीर लड़ने या भागने के लिए तैयार होता है। यह काम केवल तंत्रिकाओं से होता, तो सीमित ऊतकों तक ही पहुँचता; रासायनिक संकेत शरीर की सब कोशिकाओं तक पहुँचता है (पेज 121)।
- ऐसे हॉर्मोन अंतःस्रावी ग्रंथियाँ बनाती हैं और सीधे रुधिर में छोड़ती हैं। यह नियंत्रण एवं समन्वय का दूसरा मार्ग है (पेज 121, चित्र 6.7)।
| ग्रंथि | हॉर्मोन | क्या करता है |
|---|---|---|
| अधिवृक्क ग्रंथि | एड्रीनलीन | हृदय की धड़कन तेज़ करता है ताकि पेशियों को अधिक ऑक्सीजन मिले; पाचन तंत्र और त्वचा से रुधिर हटाकर कंकाल पेशियों की ओर भेजता है; श्वसन दर बढ़ाता है (पेज 121) |
| अवटुग्रंथि (थायरॉइड) | थायरॉक्सिन | कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और वसा के उपापचय का नियंत्रण, ताकि वृद्धि में संतुलन रहे; इसे बनाने के लिए आयोडीन ज़रूरी है, उसकी कमी से गॉयटर (फूली हुई गर्दन) हो सकता है (पेज 122) |
| पीयूष ग्रंथि | वृद्धि हॉर्मोन | शरीर की वृद्धि और विकास; बचपन में कमी से बौनापन (पेज 122) |
| वृषण / अण्डाशय | टेस्टोस्टेरोन / एस्ट्रोजन | 10-12 वर्ष की आयु के आस-पास, यौवनारंभ के बदलाव (पेज 122) |
| अग्न्याशय | इंसुलिन | रुधिर में शर्करा का स्तर नियंत्रित करता है; ठीक मात्रा में न बने, तो शर्करा बढ़ती है (मधुमेह) (पेज 123) |
- पुनर्भरण क्रियाविधि (पेज 123): हॉर्मोन कब और कितना छूटे, यह इसी से तय होता है। रुधिर में शर्करा बढ़े, तो अग्न्याशय की कोशिकाएँ इसे पहचानकर अधिक इंसुलिन छोड़ती हैं; शर्करा घटे, तो इंसुलिन का स्रावण घट जाता है।
- चित्र 6.7 में दूसरी ग्रंथियाँ भी हैं: हाइपोथैलमस, पिनियल, परावटु, थाइमस।
8. तीन गलतियाँ जो अंक काटती हैं
- "प्रतिवर्ती क्रिया मस्तिष्क करता है" लिखना। प्रतिवर्ती चाप मेरुरज्जु में बनता है; मस्तिष्क तक सूचना जाती ज़रूर है, पर हाथ खींचने का आदेश वहाँ से नहीं आता।
- छुई-मुई की गति को अनुवर्तन कहना। छुई-मुई की गति वृद्धि से मुक्त है और किसी दिशा में बढ़ना नहीं है; अनुवर्तन वृद्धि वाली दिशिक गति है।
- ऑक्सिन को प्रकाश वाली ओर भेजना। ऑक्सिन छाया वाली ओर जाता है; वहाँ की कोशिकाएँ ज़्यादा लंबी होने से प्ररोह प्रकाश की ओर झुकता है।
9. हमारे 8 प्रश्न, उत्तर के साथ
पहले कॉपी पर खुद हल करें, फिर उत्तर देखें। ये प्रश्न हमारे अपने हैं, किताब के अभ्यास-प्रश्न नहीं।
प्रश्न 1. इस्त्री करते समय नेहा की उँगली गर्म इस्त्री से छू जाती है और हाथ तुरंत हट जाता है। संदेश का रास्ता चित्र 6.2 वाला है: त्वचा का ग्राही → संवेदी तंत्रिका कोशिका → मेरुरज्जु में प्रतिसारण तंत्रिका कोशिका → प्रेरक तंत्रिका कोशिका → भुजा की पेशी। (a) मान लीजिए किसी चोट के कारण इस रास्ते में केवल प्रेरक तंत्रिका कोशिका काम न करे, बाकी सब ठीक हो। क्या तब नेहा का हाथ अपने-आप हटेगा? कारण लिखिए। (b)-(d) में पूरा रास्ता ठीक मानिए। (b) मान लीजिए आवेग 50 मीटर प्रति सेकंड से चलता है, उँगली से मेरुरज्जु तक संवेदी रास्ता 0.9 m है और लौटता प्रेरक रास्ता भी 0.9 m है। हाथ हटाने का संदेश पेशी तक कितने मिलीसेकंड में पहुँचेगा (सिनेप्स पर लगा समय छोड़ दीजिए)? (c) अगर यही संदेश पहले मस्तिष्क तक जाकर लौटता, और मेरुरज्जु से मस्तिष्क तक 0.5 m का रास्ता ऊपर और 0.5 m नीचे और जुड़ता, तो कम से कम कितना समय और लगता? (d) क्या नेहा के मस्तिष्क को इस घटना का पता चलता है?
उत्तर:
- (a) नहीं। प्रतिवर्ती चाप में आदेश मेरुरज्जु से पेशी तक प्रेरक तंत्रिका कोशिका ही ले जाती है। यह कड़ी टूटी हो, तो आदेश कार्यकर (भुजा की पेशी) तक नहीं पहुँचेगा और पेशी हाथ को नहीं खींचेगी, भले ही ग्राही और संवेदी कोशिका ठीक काम करें (पेज 114, चित्र 6.2)।
- (b) कुल रास्ता 0.9 + 0.9 = 1.8 m; समय = 1.8 ÷ 50 = 0.036 s = 36 मिलीसेकंड।
- (c) अतिरिक्त रास्ता 0.5 + 0.5 = 1.0 m; 1.0 ÷ 50 = 0.02 s = कम से कम 20 मिलीसेकंड और, और उसके ऊपर सोचने का समय। इसीलिए खतरे में मेरुरज्जु में बना प्रतिवर्ती चाप काम आता है (पेज 114)। (आवेग की गति और दूरियाँ यहाँ मानी गई हैं; किताब ये संख्याएँ नहीं देती।)
- (d) हाँ। प्रतिवर्ती चाप मेरुरज्जु में बनता है, पर आगत सूचना मस्तिष्क तक भी जाती है (पेज 114)।
प्रश्न 2. एक संदेश तीन तंत्रिका कोशिकाओं (A → B → C) की कड़ी से होकर एक पेशी तक पहुँचता है। (a) रास्ते में कितनी खाली जगहें या जोड़ आते हैं, जिन्हें संदेश को पार करना पड़ता है? पेशी के पास वाले जोड़ का नाम भी लिखिए। (b) संदेश कितनी जगह विद्युत आवेग के रूप में चलता है, और कितनी जगह रसायन के रूप में? (c) मान लीजिए कोई दवा B के सिरे से रसायन छूटने ही न दे। क्या पेशी तक संदेश पहुँचेगा? क्यों?
उत्तर:
- (a) 3: A और B के बीच, B और C के बीच (दोनों सिनेप्स), और C और पेशी के बीच, जो तंत्रिका पेशीय संधि है (पेज 112, चित्र 6.1 b)।
- (b) तीनों कोशिकाओं के भीतर (3 जगह) विद्युत आवेग; तीनों जोड़ों पर (3 जगह) रसायन, जो खाली जगह पार करके आगे फिर विद्युत आवेग शुरू करते हैं (पेज 112)।
- (c) नहीं। B और C के बीच की खाली जगह को विद्युत आवेग सीधे पार नहीं करता; वहाँ छूटे रसायन ही C में नया विद्युत आवेग शुरू करते हैं। रसायन न छूटे, तो C में आवेग बनेगा ही नहीं, और संदेश पेशी तक नहीं जाएगा (पेज 112)।
प्रश्न 3. रूलर पकड़ने का खेल: दोस्त बिना बताए एक रूलर छोड़ता है, और रिया उसे गिरता देखकर पकड़ती है। पाँच बार में लगा समय (सेकंड में): 0.21, 0.19, 0.24, 0.20, 0.16। (a) रिया का औसत समय कितने मिलीसेकंड है? (b) रूलर पकड़ना प्रतिवर्ती क्रिया है या ऐच्छिक क्रिया? कारण दीजिए। (c) प्रश्न 1(b) में हाथ हटाने का संदेश 36 मिलीसेकंड में पेशी तक पहुँचा था। रिया का औसत समय उससे लगभग कितने गुना है, और यह अंतर क्यों है?
उत्तर:
- (a) जोड़ 0.21 + 0.19 + 0.24 + 0.20 + 0.16 = 1.00 s; औसत 1.00 ÷ 5 = 0.20 s = 200 मिलीसेकंड।
- (b) ऐच्छिक क्रिया। रिया रूलर को गिरता देखती है और तय करती है कि मुट्ठी कब बंद करनी है। लिखने या बात करने की तरह यह सोचकर लिया गया निर्णय है, जिसका आदेश मस्तिष्क से आता है (पेज 115)।
- (c) 200 ÷ 36 ≈ 5.6 गुना। यहाँ सूचना आँख से मस्तिष्क तक जाती है, अग्रमस्तिष्क देखी हुई बात पर निर्णय लेता है, और तब आदेश मेरुरज्जु से होकर हाथ तक लौटता है। सोचने में बहुत-सी तंत्रिका कोशिकाओं के आवेग शामिल होते हैं, इसलिए समय लगता है; प्रतिवर्ती चाप मेरुरज्जु में ही छोटा रास्ता बना देता है (पेज 113-116)। (ये समय हमारे उदाहरण के हैं, और 36 मिलीसेकंड में सिनेप्स का समय नहीं जुड़ा था, इसलिए यह तुलना मोटा अंदाज़ा है।)
प्रश्न 4. स्कूल के बगीचे में मटर की बेल का एक प्रतान बाड़ के तार को छूता है। विद्यार्थी 4 दिन तक प्रतान के दोनों किनारों की बढ़त नापते हैं: तार से सटा किनारा 2 mm बढ़ा, तार से दूर वाला किनारा 6 mm। (a) किस किनारे की बढ़त ज़्यादा है, और कितने गुना? (b) इन नापों के आधार पर प्रतान तार की ओर मुड़ेगा या तार से दूर? (c) दूर वाले किनारे की औसत बढ़त प्रति दिन कितनी रही? (d) यहाँ उद्दीपन क्या है? (e) मान लीजिए प्रतान की वृद्धि ही रुक जाए। क्या तब भी वह तार पर लिपटेगा?
उत्तर:
- (a) तार से दूर वाला किनारा; 6 ÷ 2 = 3 गुना।
- (b) तार की ओर। लंबा किनारा बाहर की ओर और छोटा किनारा तार की ओर रहता है, इसलिए प्रतान तार के चारों ओर मुड़कर उसे पकड़ लेता है। किताब भी यही बताती है कि आधार को छूने वाला भाग दूर वाले भाग से धीरे बढ़ता है (पेज 118)।
- (c) 6 ÷ 4 = 1.5 mm प्रति दिन।
- (d) स्पर्श, यानी आधार (तार) से संपर्क। प्रतान स्पर्श के प्रति संवेदनशील होते हैं (पेज 118)।
- (e) नहीं। प्रतान का लिपटना वृद्धि से होने वाली गति है। किताब बताती है कि वृद्धि वाली दिशिक गति में पौधे को बढ़ने से रोक दिया जाए, तो वह गति नहीं दिखाता (पेज 117-118)। (नाप हमारे उदाहरण के हैं।)
प्रश्न 5. एक प्रयोग में एक पौधे पर दो दिन तक केवल बाईं ओर से प्रकाश पड़ा। इस दौरान प्ररोह का बायाँ भाग 3 mm लंबा हुआ और दायाँ भाग 5 mm। (a) प्ररोह किस ओर मुड़ेगा? (b) इसके लिए कौन-सा हॉर्मोन ज़िम्मेदार है, वह कहाँ बनता है, और दाएँ भाग में क्यों ज़्यादा है? (c) दोनों भागों की वृद्धि का अंतर कितना है, और दायाँ भाग बाएँ से कितने गुना बढ़ा? (d) दाएँ भाग की औसत वृद्धि प्रति दिन कितनी रही?
उत्तर:
- (a) बाईं ओर, यानी प्रकाश की ओर। छाया वाला दायाँ भाग ज़्यादा लंबा हुआ, इसलिए प्ररोह बाईं ओर झुकेगा।
- (b) ऑक्सिन। यह प्ररोह के अग्रभाग में बनता है। एक ओर से प्रकाश आने पर यह विसरित होकर छाया वाले भाग में चला जाता है और वहाँ कोशिकाओं को लंबा होने के लिए उद्दीपित करता है (पेज 120)।
- (c) अंतर 5 − 3 = 2 mm; 5 ÷ 3 ≈ 1.67 गुना।
- (d) 5 ÷ 2 = 2.5 mm प्रति दिन।
प्रश्न 6. दो लोगों के रुधिर में शर्करा की जाँच (mg/dL में) तीन समय पर हुई: सुबह 8 बजे (खाली पेट), 9 बजे (नाश्ते के बाद) और 11 बजे। व्यक्ति P: 85, 150, 95। व्यक्ति Q: 130, 240, 210। (a) नाश्ते के बाद हर व्यक्ति की शर्करा कितनी बढ़ी, और 9 से 11 बजे के बीच कितनी घटी? (b) 9 बजे P के अग्न्याशय से इंसुलिन का स्रावण बढ़ा होगा या घटा होगा? 11 बजे तक क्या हुआ होगा? (c) शर्करा के हिसाब से इंसुलिन का घटना-बढ़ना किस क्रियाविधि का उदाहरण है? (d) किसका अग्न्याशय ठीक काम करता नहीं दिखता, और रुधिर में शर्करा देर तक ऊँची रहने का कारण क्या हो सकता है?
उत्तर:
- (a) P: बढ़ी 150 − 85 = 65, घटी 150 − 95 = 55। Q: बढ़ी 240 − 130 = 110, घटी 240 − 210 = 30।
- (b) बढ़ा होगा। शर्करा बढ़ने पर अग्न्याशय की कोशिकाएँ इसे पहचानकर अधिक इंसुलिन छोड़ती हैं। 11 बजे तक शर्करा 95 पर लौट आई, इसलिए इंसुलिन का स्रावण भी घट गया होगा (पेज 123)।
- (c) पुनर्भरण क्रियाविधि (पेज 123)।
- (d) Q का। उसकी शर्करा ज़्यादा बढ़ी और बहुत कम घटी। यदि इंसुलिन उचित मात्रा में न छूटे, तो रुधिर में शर्करा का स्तर बढ़ जाता है; यही मधुमेह है (पेज 123)। (संख्याएँ हमारे उदाहरण की हैं; किसी की जाँच का फ़ैसला डॉक्टर करते हैं।)
प्रश्न 7. अमन कहता है: "शरीर और पौधे, दोनों में हर संदेश के लिए विद्युत आवेग काफ़ी है; रासायनिक संकेतों की कोई ज़रूरत नहीं।" (a) पेज 119 के आधार पर विद्युत आवेग की दो सीमाएँ लिखिए। (b) रासायनिक संचरण इन दोनों कमियों को कैसे दूर करता है, और इसमें क्या कमी है? (c) पौधे का एक हॉर्मोन बताइए जो बनता एक जगह है और काम दूसरी जगह करता है।
उत्तर:
- (a) (1) आवेग केवल तंत्रिका ऊतक से जुड़ी कोशिकाओं तक पहुँचता है, शरीर की हर कोशिका तक नहीं। (2) एक आवेग के बाद कोशिका को नया आवेग बनाने से पहले कुछ समय चाहिए, इसलिए वह लगातार आवेग नहीं भेज सकती (पेज 119)।
- (b) रासायनिक यौगिक आस-पास की सब कोशिकाओं में फैल जाता है, और जिन कोशिकाओं की सतह पर उसे पहचानने वाले अणु हैं, वे उस पर काम करती हैं। तंत्रिका संबंधन के बिना भी यह सब कोशिकाओं तक पहुँचता है और लगातार, स्थायी रूप से चल सकता है। कमी: यह बहुत धीमा है (पेज 120)।
- (c) ऑक्सिन: प्ररोह के अग्रभाग में बनता है और नीचे की कोशिकाओं की लंबाई बढ़ाता है (पेज 120)। इसलिए अमन का कथन गलत है।
प्रश्न 8. प्रिया ब्लैकबोर्ड पर लिखा प्रश्न पढ़ती है और कॉपी में उत्तर लिखती है। नीचे के चार भागों को केंद्रीय तंत्रिका तंत्र या परिधीय तंत्रिका तंत्र में बाँटिए: मस्तिष्क, मेरुरज्जु, कपाल तंत्रिकाएँ, मेरु तंत्रिकाएँ। फिर बताइए: (a) आँख से मस्तिष्क तक सूचना किस तरह की तंत्रिका ले जाती है? (b) हाथ की पेशियों तक आदेश मस्तिष्क से निकलकर किन दो भागों से होकर पहुँचता है? (c) पढ़ने से लिखने तक, इस पूरे काम में सूचना कम से कम कितनी बार परिधीय तंत्र से केंद्रीय तंत्र में आती है, और आदेश कितनी बार केंद्रीय तंत्र से परिधीय तंत्र में जाता है? हर बार कौन-सी तंत्रिका काम आती है?
उत्तर:
- केंद्रीय तंत्रिका तंत्र: मस्तिष्क और मेरुरज्जु। परिधीय तंत्रिका तंत्र: कपाल तंत्रिकाएँ और मेरु तंत्रिकाएँ (पेज 115)।
- (a) कपाल तंत्रिका, क्योंकि वह सीधे मस्तिष्क से जुड़ी होती है (पेज 115)।
- (b) मेरुरज्जु और मेरु तंत्रिकाएँ: आदेश मस्तिष्क से मेरुरज्जु में उतरता है और वहाँ से निकलने वाली मेरु तंत्रिकाएँ उसे हाथ की पेशियों तक ले जाती हैं (पेज 115)।
- (c) एक-एक बार। सूचना आँख से कपाल तंत्रिका के रास्ते मस्तिष्क में आती है (परिधीय से केंद्रीय), और आदेश मेरुरज्जु से मेरु तंत्रिकाओं के रास्ते हाथ की ओर निकलता है (केंद्रीय से परिधीय)। मस्तिष्क से मेरुरज्जु तक का रास्ता केंद्रीय तंत्र के भीतर ही है; दोनों तंत्रों के बीच संचार परिधीय तंत्र कराता है (पेज 115)।
10. इस अध्याय पर AI का जवाब कैसे परखें
- क्रम खुद बनाइए। AI प्रतिवर्ती चाप या तंत्रिका कोशिका का क्रम बताए, तो उसे चित्र 6.1 और 6.2 के लेबल से मिलाइए: ग्राही, संवेदी, प्रतिसारण, प्रेरक, कार्यकर।
- दिशा जाँचिए। ऑक्सिन किस ओर जाता है, जड़ किस ओर मुड़ती है, यह गलत होना आम है। हर बार पूछिए: कौन-सा भाग ज़्यादा लंबा हुआ?
- शब्द किताब से मिलाइए। परीक्षा में किताब के शब्द लिखिए: द्रुमिका, तंत्रिकाक्ष, सिनेप्स, प्रतिवर्ती चाप, अनुमस्तिष्क, मेडुला, प्रकाशानुवर्तन, गुरुत्वानुवर्तन, ऑक्सिन, पुनर्भरण क्रियाविधि।
AI से पढ़ाई पर और: AI से पढ़ाई कैसे करें, नकल किए बिना।
कक्षा 10 विज्ञान का अभ्यास
- ऑनलाइन, तुरंत जाँच के साथ: अभ्यास पेज पर कक्षा 10 और विज्ञान का कोई विषय चुनें।
- अंग्रेज़ी में इसी अध्याय के प्रश्न-उत्तर: Class 10 Control and Coordination, questions with answers।
- पिछला अध्याय हिंदी में: कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 5 जैव प्रक्रम।
- बोर्ड की तैयारी: कक्षा 10 बोर्ड परीक्षा की तैयारी कैसे करें।
CMDLearn कहाँ फिट होता है
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स्रोत
सभी 5 नवंबर 2026 को जाँचे गए।
- NCERT, विज्ञान, कक्षा 10 की पाठ्यपुस्तक (हिंदी माध्यम, Reprint 2026-27), विषय-सूची और अध्याय 6 "नियंत्रण एवं समन्वय", पेज 111 से 124: ncert.nic.in/textbook/pdf/jhsc1ps.pdf, ncert.nic.in/textbook/pdf/jhsc106.pdf
- NCERT, Science (अंग्रेज़ी संस्करण), Class X, Chapter 6 "Control and Coordination": ncert.nic.in/textbook/pdf/jesc106.pdf
- CBSE, Science (086), Class X 2026-27, course structure (पेज 4-5): cbseacademic.nic.in, Science_SecP1_2026-27.pdf
अध्याय के विचार, शब्द और पेज-संख्याएँ ऊपर के दस्तावेज़ों से हैं। इस पेज की सारी व्याख्याएँ, उदाहरण, प्रश्न और उत्तर हमारे अपने हैं; हर गिनती स्क्रिप्ट से जाँची गई है।
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