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कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 5 जैव प्रक्रम: Hindi medium नोट्स और 8 प्रश्न-उत्तर
NCERT की कक्षा 10 की हिंदी माध्यम की विज्ञान पाठ्यपुस्तक विज्ञान का पाँचवाँ अध्याय "जैव प्रक्रम" है, पेज 88 से 110 तक। यह गाइड दो काम करती है:
- अध्याय के मुख्य विचारों को छोटे नोट्स में समझाती है;
- अंत में हमारे अपने 8 प्रश्न देती है, हल और उत्तर के साथ।
पाठ्यपुस्तक साथ में खुली रखें। यहाँ की व्याख्याएँ, उदाहरण और प्रश्न हमारे अपने हैं; अंतिम बात पाठ्यपुस्तक की ही मानें। अंग्रेज़ी में इसी अध्याय के नोट्स चाहिए, तो Class 10 Life Processes notes देखें।
यह गाइड सीधे हिंदी में लिखी गई है, पर किसी हिंदी-माध्यम शिक्षक ने अभी इसकी भाषा नहीं जाँची है (native review pending)।
परीक्षा में यह अध्याय
CBSE ने 2026-27 के लिए कक्षा 10 विज्ञान की वार्षिक परीक्षा 80 अंकों की रखी है। यह अध्याय इकाई II, "World of Living", में आता है, जिसके कुल 25 अंक हैं (CBSE पाठ्यक्रम, पेज 4)। पाठ्यक्रम में इस अध्याय का विषय है: पौधों और जंतुओं में पोषण, श्वसन, परिवहन और उत्सर्जन की मूल अवधारणा (पेज 5)। इसी इकाई में नियंत्रण एवं समन्वय, जनन और आनुवंशिकता भी हैं। CBSE अध्याय-वार अंक नहीं देता।
1. जैव प्रक्रम क्या हैं (पेज 88-90)
- सोते समय भी शरीर की टूट-फूट रोकने और मरम्मत का काम चलता रहता है। जो प्रक्रम मिलकर यह अनुरक्षण करते हैं, वे जैव प्रक्रम हैं (पेज 89)।
- ऊर्जा का स्रोत (भोजन) बाहर से शरीर में लाना पोषण है; बाहर से ऑक्सीजन लेकर भोजन के विखंडन में उसका उपयोग श्वसन है (पेज 89)।
- एककोशिकीय जीव की पूरी सतह बाहर के संपर्क में रहती है। बड़े बहुकोशिकीय जीव में हर कोशिका तक केवल विसरण से काम नहीं चलता, इसलिए भोजन और ऑक्सीजन ले जाने के लिए वहन तंत्र चाहिए (पेज 89)।
- हानिकारक अपशिष्ट उपोत्पादों को शरीर से बाहर निकालना उत्सर्जन है (पेज 90)।
2. पोषण (पेज 90-96)
स्वपोषी और विषमपोषी (पेज 90): हरे पौधे और कुछ जीवाणु कार्बन डाइऑक्साइड और जल जैसे सरल अकार्बनिक पदार्थों से अपना भोजन बनाते हैं; ये स्वपोषी हैं। जंतु और कवक जटिल पदार्थ लेते हैं और उन्हें एंजाइम (जैव-उत्प्रेरक) की मदद से सरल पदार्थों में तोड़ते हैं; ये विषमपोषी हैं।
प्रकाश संश्लेषण (पेज 91-93):
- समीकरण: 6CO₂ + 12H₂O → C₆H₁₂O₆ (ग्लूकोज़) + 6O₂ + 6H₂O, क्लोरोफिल और सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में (पेज 91)।
- तीन घटनाएँ: क्लोरोफिल प्रकाश ऊर्जा सोखता है; प्रकाश ऊर्जा रासायनिक ऊर्जा बनती है और जल के अणु हाइड्रोजन व ऑक्सीजन में टूटते हैं; कार्बन डाइऑक्साइड कार्बोहाइड्रेट में बदलती है (पेज 91)। मरुद्भिद पौधे रात में CO₂ लेते हैं और दिन में अंतिम उत्पाद बनाते हैं।
- तुरंत काम न आने वाला कार्बोहाइड्रेट मंड के रूप में जमा होता है; हमारे शरीर में कुछ ऊर्जा ग्लाइकोजन बनकर जमा होती है (पेज 91)।
- पत्ती की कोशिकाओं के हरे बिंदु क्लोरोप्लास्ट हैं, जिनमें क्लोरोफिल होता है (पेज 91)।
- गैसों का अधिकांश लेन-देन पत्ती के रंध्रों से होता है। द्वार कोशिकाओं में पानी जाने पर वे फूलती हैं और छिद्र खुलता है; वे सिकुड़ें तो छिद्र बंद होता है। CO₂ की ज़रूरत न हो, तो पौधा पानी बचाने के लिए रंध्र बंद रखता है (पेज 92)।
- नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, लोहा, मैग्नीशियम मिट्टी से आते हैं; नाइट्रोजन नाइट्रेट या नाइट्राइट के रूप में, या जीवाणुओं के बनाए कार्बनिक पदार्थों के रूप में ली जाती है (पेज 93)।
दूसरे जीव कैसे खाते हैं (पेज 93-94): फफूँदी, यीस्ट और मशरूम भोजन को शरीर के बाहर तोड़कर सोखते हैं। अमरबेल, किलनी, जूँ, लीच और फीताकृमि जीव को मारे बिना उससे पोषण लेते हैं। अमीबा अस्थायी प्रवर्धों (कूटपाद) से भोजन घेरकर खाद्य रिक्तिका बनाता है; पैरामीशियम पक्ष्माभ की गति से भोजन एक निश्चित स्थान तक लाता है (पेज 94)।
मनुष्य में पाचन (पेज 94-96):
| भाग | क्या होता है |
|---|---|
| मुँह (पेज 95) | लार में लार एमिलेस मंड को सरल शर्करा में तोड़ता है; जिह्वा भोजन को लार के साथ मिलाती है |
| ग्रसिका (पेज 95) | क्रमाकुंचक गति भोजन को आगे बढ़ाती है, जो पूरी आहार नली में होती है |
| आमाशय (पेज 95) | जठर ग्रंथियाँ हाइड्रोक्लोरिक अम्ल, प्रोटीन पचाने वाला पेप्सिन और श्लेष्मा बनाती हैं; श्लेष्मा भीतरी आस्तर को अम्ल से बचाता है |
| क्षुद्रांत्र (पेज 95-96) | सबसे लंबा भाग; यकृत का पित्तरस भोजन को क्षारीय बनाता है और वसा की बड़ी गोलिकाओं को छोटा करता है; अग्न्याशय का ट्रिप्सिन प्रोटीन और लाइपेज इमल्सीकृत वसा पचाता है; आंत्र रस के अंत में प्रोटीन अमीनो अम्ल में, कार्बोहाइड्रेट ग्लूकोज़ में और वसा वसा अम्ल व ग्लिसरॉल में बदलते हैं |
| दीर्घरोम (पेज 96) | क्षुद्रांत्र की भीतरी उँगली जैसी रचनाएँ अवशोषण का क्षेत्रफल बढ़ाती हैं; उनमें रुधिर वाहिकाएँ बहुत होती हैं |
| बृहदांत्र (पेज 96) | बिना पचे भोजन से जल सोखा जाता है; बाकी गुदा से बाहर, जिसे गुदा अवरोधिनी नियंत्रित करती है |
क्षुद्रांत्र की लंबाई भोजन पर निर्भर है: सेल्युलोज़ वाली घास खाने वाले शाकाहारी में यह लंबी, और बाघ जैसे मांसाहारी में छोटी होती है, क्योंकि मांस आसानी से पचता है (पेज 95)।
3. श्वसन (पेज 97-101)
- हर हाल में पहला चरण एक है: कोशिकाद्रव्य में ग्लूकोज़ (6 कार्बन) टूटकर पायरुवेट (3 कार्बन) बनता है (पेज 97)।
- आगे तीन रास्ते (चित्र 5.8, पेज 98):
| स्थिति | कहाँ | उत्पाद |
|---|---|---|
| ऑक्सीजन की अनुपस्थिति | यीस्ट में (किण्वन) | इथेनॉल (2 कार्बन) + कार्बन डाइऑक्साइड + ऊर्जा |
| ऑक्सीजन का अभाव | हमारी पेशी कोशिकाओं में | लैक्टिक अम्ल (3 कार्बन) + ऊर्जा |
| ऑक्सीजन की उपस्थिति | माइटोकॉन्ड्रिया में | कार्बन डाइऑक्साइड + जल + ऊर्जा |
- ऑक्सीजन के बिना वाला रास्ता अवायवीय श्वसन है, ऑक्सीजन वाला वायवीय श्वसन; वायवीय श्वसन में बहुत अधिक ऊर्जा मुक्त होती है। पेशियों में लैक्टिक अम्ल जमने से क्रैम्प हो सकता है (पेज 97-98)।
- मुक्त ऊर्जा से ए.टी.पी. बनता है, जो कोशिका का "ऊर्जा मुद्रा" है; उसके अंतस्थ फॉस्फेट के टूटने पर 30.5 kJ/mol ऊर्जा मिलती है (पेज 98)।
- पौधों में गैसें विसरण से आती-जाती हैं। रात में CO₂ का निकलना मुख्य घटना है; दिन में श्वसन की CO₂ प्रकाश संश्लेषण में खप जाती है, इसलिए ऑक्सीजन का निकलना मुख्य घटना है (पेज 99)।
- जलीय जीव जल में विलेय ऑक्सीजन लेते हैं, जो वायु की तुलना में बहुत कम होती है; इसलिए उनकी श्वास दर तेज़ होती है। मछली मुँह से जल लेकर क्लोम तक भेजती है (पेज 99)।
- मनुष्य में (पेज 100): नासाद्वार के महीन बाल और श्लेष्मा वायु को साफ़ करते हैं; कंठ में उपास्थि के वलय वायु मार्ग को पिचकने नहीं देते; फुफ्फुस में मार्ग अंत में गुब्बारे जैसी कूपिकाओं में खत्म होता है, जहाँ रुधिर वाहिकाओं का जाल गैसों का विनिमय करता है। श्वास अंदर लेते समय पसलियाँ ऊपर उठती हैं और डायाफ्राम चपटा होता है।
- हीमोग्लोबिन (लाल रुधिर कणिकाओं में) ऑक्सीजन ले जाता है; CO₂ जल में अधिक विलेय है, इसलिए वह ज़्यादातर रुधिर में घुलकर जाती है (पेज 101)।
4. वहन (पेज 101-106)
रुधिर (पेज 102): तरल प्लाज़्मा भोजन, CO₂ और नाइट्रोजनी वर्ज्य पदार्थ घुले रूप में ले जाता है; ऑक्सीजन लाल रुधिर कणिकाएँ ले जाती हैं।
हृदय (पेज 102-103): मुट्ठी के आकार का पेशीय अंग, चार कोष्ठों वाला, ताकि ऑक्सीजनित और विऑक्सीजनित रुधिर न मिलें।
- फुफ्फुस से ऑक्सीजनित रुधिर → बायाँ अलिंद → बायाँ निलय → शरीर।
- शरीर से विऑक्सीजनित रुधिर → दायाँ अलिंद → दायाँ निलय → फुफ्फुस।
- निलय की भित्ति अलिंद से मोटी होती है, क्योंकि निलय पूरे शरीर में रुधिर भेजता है; वाल्व रुधिर को उल्टा बहने से रोकते हैं (पेज 102)।
- पक्षी और स्तनधारी को शरीर का तापक्रम बनाए रखने के लिए लगातार ऊर्जा चाहिए, इसलिए यह बँटवारा उनके लिए लाभदायक है। जल-स्थल चर और बहुत से सरीसृपों का हृदय तीन कोष्ठ का होता है; मछली का दो कोष्ठ का, और उसमें एक चक्र में रुधिर एक ही बार हृदय से गुज़रता है। बाकी कशेरुकी में दो बार: यह दोहरा परिसंचरण है (पेज 103)।
रक्तदाब (पेज 103-104): सामान्य प्रकुंचन दाब लगभग 120 mm (पारा) और अनुशिथिलन दाब लगभग 80 mm (पारा)। इसे स्फाईग्मोमैनोमीटर से नापते हैं। ऊँचे रक्तदाब (अति तनाव) का कारण धमनिकाओं का सिकुड़ना है; इससे धमनी फट सकती है।
वाहिकाएँ, प्लेटलैट्स, लसिका (पेज 104): धमनी की भित्ति मोटी और लचीली; शिरा में वाल्व; केशिका की भित्ति एक कोशिका मोटी, जिससे पदार्थों का विनिमय होता है। प्लेटलैट्स चोट की जगह थक्का बनाकर रक्तस्राव रोकते हैं। लसिका (ऊतक तरल) प्लाज़्मा जैसी पर रंगहीन और कम प्रोटीन वाली होती है; यह क्षुद्रांत्र में सोखी गई वसा ले जाती है और अतिरिक्त तरल को वापस रुधिर में लाती है।
पादपों में परिवहन (पेज 104-106):
- जाइलम मिट्टी से जल और खनिज लवण ऊपर ले जाता है; फ्लोएम पत्तियों में बने भोजन को बाकी भागों तक (पेज 105)।
- जड़ की कोशिकाएँ सक्रिय रूप से आयन लेती हैं; आयन सांद्रण के अंतर से जल जड़ में आता है (मूल दाब), जो रात में विशेष रूप से प्रभावी है। दिन में रंध्र खुले हों, तो पत्तियों से जल का वाष्पन (वाष्पोत्सर्जन) एक चूषण बनाता है, और यही वाष्पोत्सर्जन कर्षण जल की गति का मुख्य प्रेरक बल है (पेज 105-106)।
- भोजन का वहन स्थानांतरण है। यह फ्लोएम की चालनी नलिका में, साथी कोशिका की मदद से, ऊपर और नीचे दोनों दिशाओं में होता है, और इसमें ए.टी.पी. की ऊर्जा लगती है; उदाहरण: बसंत में जड़ और तने में जमा शर्करा कलिकाओं तक जाती है (पेज 106)।
5. उत्सर्जन (पेज 107-109)
- मानव उत्सर्जन तंत्र: एक जोड़ा वृक्क, मूत्रवाहिनी, मूत्राशय और मूत्रमार्ग (चित्र 5.13, पेज 107)।
- वृक्क की निस्यंदन इकाई वृक्काणु (नेफ्रॉन) है: पतली केशिकाओं का गुच्छ (ग्लोमेरुलस) एक नलिका के कप जैसे सिरे (बोमन संपुट) में होता है। निस्यंद में से ग्लूकोज़, अमीनो अम्ल, लवण और बहुत-सा जल नलिका में आगे बढ़ते हुए चयनित पुनरवशोषण से वापस ले लिए जाते हैं (पेज 107-108)।
- मूत्राशय पेशीय है और तंत्रिका नियंत्रण में है, इसलिए हम मूत्र निकासी को प्रायः नियंत्रित कर लेते हैं (पेज 108)।
- कृत्रिम वृक्क (अपोहन) (पेज 108): रुधिर अर्धपारगम्य नलिकाओं से बहता है, जो अपोहन द्रव में डूबी रहती हैं। द्रव और रुधिर का परासरण दाब बराबर रखा जाता है, पर द्रव नाइट्रोजनी अपशिष्ट से खाली होता है; इसलिए अपशिष्ट विसरण से द्रव में चले जाते हैं। वृक्क से अंतर: इसमें पुनरवशोषण नहीं होता।
- पादपों में (पेज 109): अतिरिक्त जल वाष्पोत्सर्जन से; कुछ अपशिष्ट कोशिकीय रिक्तिका में, गिरने वाली पत्तियों में, या रेज़िन और गोंद के रूप में पुराने जाइलम में; कुछ आस-पास की मिट्टी में।
6. तीन गलतियाँ जो अंक काटती हैं
- "पौधे केवल दिन में साँस लेते हैं" लिखना। श्वसन दिन-रात चलता है; दिन में उसकी CO₂ प्रकाश संश्लेषण में खप जाती है, इसलिए बाहर ऑक्सीजन निकलती दिखती है।
- अलिंद और निलय का क्रम उलटना। रुधिर पहले अलिंद में आता है, फिर निलय से बाहर जाता है; बायाँ भाग ऑक्सीजनित रुधिर के लिए, दायाँ विऑक्सीजनित के लिए।
- जाइलम और फ्लोएम को मिलाना। जाइलम: जल और खनिज, नीचे से ऊपर; फ्लोएम: भोजन, ऊपर और नीचे दोनों ओर, ऊर्जा के उपयोग से।
7. हमारे 8 प्रश्न, उत्तर के साथ
पहले कॉपी पर खुद हल करें, फिर उत्तर देखें। ये प्रश्न हमारे अपने हैं, किताब के अभ्यास-प्रश्न नहीं।
प्रश्न 1. एक पौधे की पत्तियों ने किसी दिन प्रकाश संश्लेषण से 18 g ग्लूकोज़ बनाया। पेज 91 का समीकरण लीजिए: 6CO₂ + 12H₂O → C₆H₁₂O₆ + 6O₂ + 6H₂O। (a) कितनी CO₂ लगी? (b) कितनी ऑक्सीजन निकली? (c) कितना जल लगा, और कितना जल फिर से बना? (d) द्रव्यमान संरक्षण की जाँच कीजिए। (C = 12, H = 1, O = 16)
उत्तर:
- C₆H₁₂O₆ = 6 × 12 + 12 × 1 + 6 × 16 = 180, इसलिए 18 g = 0.1 भाग।
- (a) 26.4 g CO₂: हर भाग ग्लूकोज़ पर 6 भाग CO₂, यानी 0.6 × 44 = 26.4 g।
- (b) 19.2 g ऑक्सीजन: 0.6 × 32 = 19.2 g।
- (c) 21.6 g जल लगा (1.2 × 18) और 10.8 g जल बना (0.6 × 18)।
- (d) बाईं ओर 26.4 + 21.6 = 48 g; दाईं ओर 18 + 19.2 + 10.8 = 48 g। बराबर।
प्रश्न 2. मई की दोपहर में एक गमले की मिट्टी सूख गई है, और पत्तियों की द्वार कोशिकाओं से पानी निकल गया है। (a) रंध्र खुले रहेंगे या बंद होंगे? (b) इससे पौधे को क्या लाभ है, और प्रकाश संश्लेषण पर क्या असर पड़ेगा? (c) इसी पौधे से आधी रात को मुख्य रूप से कौन-सी गैस बाहर निकलेगी, और क्यों?
उत्तर:
- (a) बंद होंगे। द्वार कोशिकाएँ पानी खोकर सिकुड़ती हैं, तो छिद्र बंद हो जाता है (पेज 92)।
- (b) रंध्रों से जल की भी काफ़ी हानि होती है, इसलिए बंद रंध्र पानी बचाते हैं। पर गैसों का अधिकांश लेन-देन इन्हीं से होता है, इसलिए CO₂ अंदर आना घटेगा और प्रकाश संश्लेषण धीमा होगा (पेज 92)।
- (c) कार्बन डाइऑक्साइड। रात में प्रकाश संश्लेषण नहीं होता, पर श्वसन चलता रहता है, इसलिए CO₂ का निकलना ही मुख्य घटना है (पेज 99)।
प्रश्न 3. रीना ने दाल खाई, जिसमें मुख्य रूप से प्रोटीन है। (a) प्रोटीन का पाचन किस अंग में शुरू होता है, कौन-सा एंजाइम यह करता है, और उसे काम करने के लिए क्या चाहिए? (b) क्षुद्रांत्र में प्रोटीन पर कौन-सा एंजाइम काम करता है, और वह किस अंग से आता है? (c) अंत में प्रोटीन किस रूप में बदलता है, और शरीर में कहाँ से पहुँचता है? (d) शरीर उसका क्या उपयोग करता है? एक बात लिखिए।
उत्तर:
- (a) आमाशय में, पेप्सिन से। जठर ग्रंथियों का हाइड्रोक्लोरिक अम्ल वह अम्लीय माध्यम बनाता है, जिसमें पेप्सिन काम करता है (पेज 95)।
- (b) ट्रिप्सिन, जो अग्न्याशय से आता है (अग्न्याशयिक रस, पेज 96)।
- (c) अमीनो अम्ल। आंत्र रस के एंजाइम यह अंतिम बदलाव करते हैं; क्षुद्रांत्र के दीर्घरोम इन्हें सोखकर रुधिर वाहिकाओं के ज़रिए हर कोशिका तक भेजते हैं (पेज 96)।
- (d) कोई एक: नए ऊतकों का निर्माण, पुराने ऊतकों की मरम्मत, या ऊर्जा (पेज 96)।
प्रश्न 4. तीन स्थितियाँ हैं: (i) रोटी के आटे में यीस्ट डालकर बंद डिब्बे में रखा गया; (ii) भारी बाल्टी उठाते समय बाँह की पेशी कोशिकाओं में ऑक्सीजन कम पड़ गई; (iii) आराम करते व्यक्ति की यकृत कोशिकाओं को पूरी ऑक्सीजन मिल रही है। हर स्थिति के लिए लिखिए: पायरुवेट से क्या बनता है, और बने कार्बनिक अणु में कितने कार्बन हैं (जहाँ बचे)। फिर बताइए कि किस स्थिति में एक ग्लूकोज़ से सबसे ज़्यादा ऊर्जा मिलती है।
उत्तर:
- तीनों में पहले कोशिकाद्रव्य में ग्लूकोज़ (6 कार्बन) से पायरुवेट (3 कार्बन) बनता है (पेज 97)।
- (i) इथेनॉल (2 कार्बन) + कार्बन डाइऑक्साइड + ऊर्जा। यह किण्वन है (चित्र 5.8, पेज 97-98)।
- (ii) लैक्टिक अम्ल (3 कार्बन) + ऊर्जा (पेज 98)।
- (iii) कार्बन डाइऑक्साइड + जल + ऊर्जा, माइटोकॉन्ड्रिया में; कोई कार्बनिक अणु नहीं बचता।
- सबसे ज़्यादा ऊर्जा (iii) में, क्योंकि ऑक्सीजन वाला रास्ता बिना ऑक्सीजन वाले रास्तों से कहीं ज़्यादा ऊर्जा देता है (पेज 98)।
प्रश्न 5. एक डॉक्टर तीन लोगों का रक्तदाब नापती हैं: अमन 150/95, सलमा 118/78, जोसेफ़ 135/92 (सब mm पारा में)। (a) हर रीडिंग में पहली और दूसरी संख्या क्या बताती है? (b) पेज 103 के सामान्य मानों (120 और 80) से अमन का हर दाब कितना अधिक है? (c) किसका रक्तदाब सामान्य के सबसे पास है? (d) ऊँचे रक्तदाब को क्या कहते हैं, इसका कारण क्या है, और इससे क्या खतरा है?
उत्तर:
- (a) पहली संख्या प्रकुंचन दाब (निलय सिकुड़ते समय धमनी में दाब), दूसरी अनुशिथिलन दाब (निलय शिथिल होते समय) (पेज 103)।
- (b) 30 और 15 mm पारा: 150 − 120 = 30; 95 − 80 = 15।
- (c) सलमा: 120 − 118 = 2 और 80 − 78 = 2 का ही अंतर।
- (d) अति तनाव। कारण धमनिकाओं का सिकुड़ना है, जिससे रक्त प्रवाह में प्रतिरोध बढ़ता है; धमनी फट सकती है और आंतरिक रक्तस्राव हो सकता है (पेज 104)।
प्रश्न 6. हाथ की उँगली से लौटती रुधिर की एक बूँद का रास्ता सही क्रम में लगाइए: P. बायाँ निलय; Q. फुफ्फुस; R. दायाँ अलिंद; S. बायाँ अलिंद; T. दायाँ निलय। (a) क्रम लिखिए, महाशिरा से शुरू करके महाधमनी तक। (b) इस पूरे चक्र में बूँद हृदय से कितनी बार गुज़री? (c) मछली में एक चक्र में यह संख्या कितनी है, और क्यों?
उत्तर:
- (a) महाशिरा → R → T → Q → S → P → महाधमनी। शरीर का विऑक्सीजनित रुधिर दाएँ अलिंद में आता है, दायाँ निलय उसे फुफ्फुस में भेजता है; ऑक्सीजनित होकर वह बाएँ अलिंद में लौटता है और बायाँ निलय उसे शरीर में भेजता है (पेज 102, चित्र 5.11)।
- (b) 2 बार: एक बार दाएँ भाग से, एक बार बाएँ भाग से। यही दोहरा परिसंचरण है (पेज 103)।
- (c) 1 बार। मछली के हृदय में केवल दो कोष्ठ हैं; रुधिर क्लोम में ऑक्सीजनित होकर सीधे शरीर में जाता है (पेज 103)।
प्रश्न 7. एक विद्यार्थी लिखता है: "लसिका और रुधिर प्लाज़्मा बिल्कुल एक जैसे हैं, और लसिका का कोई अलग काम नहीं है।" (a) लसिका कैसे बनती है? (b) प्लाज़्मा से इसके दो अंतर लिखिए। (c) लसिका के दो काम लिखिए, जो इस कथन को गलत साबित करते हैं।
उत्तर:
- (a) केशिकाओं की भित्ति के छिद्रों से कुछ प्लाज़्मा, प्रोटीन और रुधिर कोशिकाएँ निकलकर ऊतकों के अंतर्कोशिकीय अवकाश में आती हैं और ऊतक तरल या लसिका बनाती हैं (पेज 104)।
- (b) लसिका रंगहीन है और इसमें प्रोटीन अल्पमात्रा में होता है (पेज 104)।
- (c) (1) क्षुद्रांत्र में सोखी गई पची वसा का वहन लसिका करती है; (2) अतिरिक्त तरल को ऊतकों के बीच की जगह से लौटाकर रुधिर में ले जाती है। लसिका केशिकाएँ मिलकर बड़ी लसिका वाहिका बनाती हैं, जो बड़ी शिरा में खुलती है (पेज 104)।
प्रश्न 8. किसी व्यक्ति के दोनों वृक्क ठीक से काम नहीं कर रहे, और उसे हफ़्ते में कई बार अपोहन (डायलिसिस) कराना पड़ता है। (a) अपोहन मशीन और वृक्क में एक समानता लिखिए। (b) एक मुख्य अंतर लिखिए। (c) मशीन के द्रव का परासरण दाब रुधिर के बराबर क्यों रखते हैं, और उसमें यूरिया जैसे अपशिष्ट क्यों नहीं डालते? (d) स्वस्थ व्यक्ति के मूत्र में सामान्यतः ग्लूकोज़ क्यों नहीं मिलता?
उत्तर:
- (a) दोनों नाइट्रोजनी अपशिष्ट (जैसे यूरिया) रुधिर से अलग करते हैं; मशीन में यह अर्धपारगम्य नलिकाओं के आर-पार विसरण से होता है (पेज 108)।
- (b) अपोहन में पुनरवशोषण नहीं होता, जबकि वृक्काणु की नलिका उपयोगी पदार्थ वापस ले लेती है (पेज 108)।
- (c) परासरण दाब बराबर होने से रुधिर का ज़रूरी तरल और लवण द्रव में नहीं खिंचते; नाइट्रोजनी अपशिष्ट द्रव में न होने से वे सांद्रता के अंतर के कारण रुधिर से द्रव में विसरित हो जाते हैं (पेज 108)।
- (d) प्रारंभिक निस्यंद में ग्लूकोज़ रहता है, पर नलिका में आगे बढ़ते हुए उसका चयनित पुनरवशोषण हो जाता है (पेज 108)।
8. इस अध्याय पर AI का जवाब कैसे परखें
- रास्ता खुद बनाइए। AI हृदय या पाचन का क्रम बताए, तो उसे अलिंद → निलय और मुँह → आमाशय → क्षुद्रांत्र → बृहदांत्र के क्रम से मिलाइए।
- हर गिनती दोहराइए। प्रकाश संश्लेषण या रक्तदाब की गिनती में हर तत्व दोनों ओर बराबर होना चाहिए, और हर अंतर दोबारा घटाकर देखिए।
- शब्द किताब से मिलाइए। परीक्षा में किताब के शब्द लिखिए: स्वपोषी, विषमपोषी, क्रमाकुंचक गति, दीर्घरोम, पायरुवेट, कूपिका, दोहरा परिसंचरण, वाष्पोत्सर्जन, स्थानांतरण, वृक्काणु।
AI से पढ़ाई पर और: AI से पढ़ाई कैसे करें, नकल किए बिना।
कक्षा 10 विज्ञान का अभ्यास
- ऑनलाइन, तुरंत जाँच के साथ: अभ्यास पेज पर कक्षा 10 और विज्ञान का कोई विषय चुनें।
- अंग्रेज़ी में इसी अध्याय के प्रश्न-उत्तर: Class 10 Life Processes, questions with answers।
- पिछला अध्याय हिंदी में: कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 4 कार्बन एवं उसके यौगिक।
- अगला अध्याय हिंदी में: कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 6 नियंत्रण एवं समन्वय।
- बोर्ड की तैयारी: कक्षा 10 बोर्ड परीक्षा की तैयारी कैसे करें।
CMDLearn कहाँ फिट होता है
CMDLearn कक्षा 1 से 10 के लिए हिंदी, मराठी और अंग्रेज़ी में एक AI ट्यूटर बना रहा है, जो एक कदम समझाता है और बच्चे का काम जाँचता है, पर लिखना बच्चे पर छोड़ता है। यह अभी तैयार हो रहा है और अभी कोई बच्चा इसका इस्तेमाल नहीं करता। जब आज़माने को कुछ हो, तब ख़बर पाने के लिए वेटलिस्ट से जुड़ें।
स्रोत
सभी 5 नवंबर 2026 को जाँचे गए।
- NCERT, विज्ञान, कक्षा 10 की पाठ्यपुस्तक (हिंदी माध्यम, Reprint 2026-27), विषय-सूची और अध्याय 5 "जैव प्रक्रम", पेज 88 से 110: ncert.nic.in/textbook/pdf/jhsc1ps.pdf, ncert.nic.in/textbook/pdf/jhsc105.pdf
- NCERT, Science (अंग्रेज़ी संस्करण), Class X, Chapter 5 "Life Processes": ncert.nic.in/textbook/pdf/jesc105.pdf
- CBSE, Science (086), Class X 2026-27, course structure (पेज 4-5): cbseacademic.nic.in, Science_SecP1_2026-27.pdf
अध्याय के विचार, शब्द और पेज-संख्याएँ ऊपर के दस्तावेज़ों से हैं। इस पेज की सारी व्याख्याएँ, उदाहरण, प्रश्न और उत्तर हमारे अपने हैं; हर गिनती स्क्रिप्ट से जाँची गई है।
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