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कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 10 मानव नेत्र तथा रंग-बिरंगा संसार: Hindi medium नोट्स और 8 प्रश्न-उत्तर
NCERT की कक्षा 10 की हिंदी माध्यम की विज्ञान पाठ्यपुस्तक विज्ञान का दसवाँ अध्याय "मानव नेत्र तथा रंग-बिरंगा संसार" है, पेज 178 से 189 तक। पिछले अध्याय के लेंस यहाँ हमारी अपनी आँख में मिलते हैं, और फिर बात प्रिज़्म, इंद्रधनुष और नीले आकाश तक जाती है। यह गाइड दो काम करती है:
- अध्याय के मुख्य विचारों को, किताब के अनुभागों के क्रम में, छोटे नोट्स में समझाती है;
- अंत में हमारे अपने 8 प्रश्न देती है, पूरे हल के साथ।
पाठ्यपुस्तक साथ में खुली रखें। यहाँ की व्याख्याएँ, उदाहरण और प्रश्न हमारे अपने हैं; अंतिम बात पाठ्यपुस्तक की ही मानें। अंग्रेज़ी में इसी अध्याय के नोट्स चाहिए, तो Class 10 Human Eye notes देखें।
यह गाइड सीधे हिंदी में लिखी गई है, पर किसी हिंदी-माध्यम शिक्षक ने अभी इसकी भाषा नहीं जाँची है (native review pending)। प्रश्न हमारे अपने हैं; किसी शिक्षक ने अभी इन्हें नहीं जाँचा है (teacher review pending)।
परीक्षा में यह अध्याय
CBSE ने 2026-27 के लिए कक्षा 10 विज्ञान की वार्षिक परीक्षा 80 अंकों की रखी है। यह अध्याय इकाई III, "Natural Phenomena", में आता है, जिसके कुल 12 अंक हैं, और यही अंक पिछले अध्याय "प्रकाश – परावर्तन तथा अपवर्तन" के साथ बँटते हैं (CBSE पाठ्यक्रम, पेज 4)। इस अध्याय से पाठ्यक्रम में नेत्र का लेंस और उसका काम, दृष्टि दोष और उनका संशोधन, प्रिज़्म से अपवर्तन, विक्षेपण और प्रकीर्णन, और रोज़मर्रा में इनके उदाहरण हैं। सूर्योदय और सूर्यास्त के समय सूर्य का रंग पाठ्यक्रम से बाहर रखा गया है (पेज 6)। CBSE अध्याय-वार अंक नहीं देता।
1. मानव नेत्र कैसे देखता है (10.1, पेज 178-179)
- नेत्र एक कैमरे जैसा है: इसका लेंस-निकाय प्रकाश के प्रति संवेदनशील परदे, रेटिना (दृष्टिपटल), पर प्रतिबिंब बनाता है (पेज 178)।
- प्रकाश सबसे पहले कॉर्निया (स्वच्छ मंडल) से अंदर आता है। यह पतली पारदर्शी झिल्ली नेत्र गोलक के आगे उभार बनाती है। नेत्र गोलक लगभग गोल है और उसका व्यास करीब 2.3 cm है (पेज 178-179)।
- नेत्र में आने वाली किरणों का ज़्यादातर अपवर्तन कॉर्निया की बाहरी सतह पर होता है। क्रिस्टलीय लेंस केवल बारीक समायोजन करता है, ताकि अलग-अलग दूरी की वस्तुएँ रेटिना पर फोकस हों (पेज 179)।
- कॉर्निया के पीछे परितारिका है, एक गहरा पेशीय डायफ्राम, जो पुतली का साइज़ बदलती है। पुतली तय करती है कि कितना प्रकाश अंदर जाए (पेज 179)।
- अभिनेत्र लेंस रेटिना पर उलटा और वास्तविक प्रतिबिंब बनाता है। रेटिना की प्रकाश-सुग्राही कोशिकाएँ प्रकाश पड़ने पर विद्युत सिग्नल बनाती हैं, जिन्हें दृक् तंत्रिकाएँ मस्तिष्क तक ले जाती हैं; मस्तिष्क उन्हें समझकर हमें वस्तु दिखाता है (पेज 179)।
| भाग | काम |
|---|---|
| कॉर्निया | प्रकाश का प्रवेश; सबसे ज़्यादा अपवर्तन |
| परितारिका | पुतली का साइज़ बदलना |
| पुतली | अंदर जाने वाले प्रकाश की मात्रा तय करना |
| अभिनेत्र लेंस | फोकस दूरी का बारीक समायोजन |
| रेटिना | प्रतिबिंब बनना; प्रकाश से विद्युत सिग्नल |
| दृक् तंत्रिका | सिग्नल मस्तिष्क तक ले जाना |
2. समंजन, निकट बिंदु और दूर बिंदु (10.1.1, पेज 179)
- अभिनेत्र लेंस रेशेदार, जेली जैसे पदार्थ से बना है। पक्ष्माभी पेशियाँ इसकी वक्रता कुछ हद तक बदल सकती हैं, और वक्रता बदलने से फोकस दूरी बदलती है।
- दूर देखते समय पेशियाँ ढीली (शिथिल): लेंस पतला, फोकस दूरी ज़्यादा। पास देखते समय पेशियाँ सिकुड़ती हैं: लेंस मोटा, वक्रता ज़्यादा, फोकस दूरी कम।
- फोकस दूरी को इस तरह बदल लेने की क्षमता समंजन है। पर फोकस दूरी एक न्यूनतम सीमा से कम नहीं हो सकती।
- निकट बिंदु (सुस्पष्ट दर्शन की अल्पतम दूरी): सबसे पास की वह दूरी जहाँ वस्तु बिना तनाव के साफ़ दिखे; सामान्य दृष्टि वाले युवा के लिए लगभग 25 cm। दूर बिंदु: सबसे दूर का वह बिंदु जहाँ तक साफ़ दिखे; सामान्य नेत्र के लिए अनंत। यानी सामान्य नेत्र 25 cm से अनंत तक सब साफ़ देखता है।
- बढ़ती उम्र में कभी-कभी क्रिस्टलीय लेंस दूधिया और धुँधला हो जाता है। इसे मोतियाबिंद कहते हैं; दृष्टि घटती है या चली जाती है, और शल्य चिकित्सा से लौट सकती है (पेज 179)।
3. दृष्टि दोष और उनका संशोधन (10.2, पेज 180-181)
| दोष | क्या साफ़ नहीं दिखता | प्रतिबिंब कहाँ बनता है | कारण | संशोधन |
|---|---|---|---|---|
| निकट-दृष्टि (मायोपिया) | दूर की वस्तुएँ; दूर बिंदु पास आ जाता है | रेटिना के सामने | लेंस की वक्रता बहुत ज़्यादा, या नेत्र गोलक लंबा | उचित क्षमता का अवतल (अपसारी) लेंस |
| दीर्घ-दृष्टि (हाइपरमेट्रोपिया) | पास की वस्तुएँ; निकट बिंदु 25 cm से दूर | रेटिना के पीछे | लेंस की फोकस दूरी बहुत ज़्यादा, या नेत्र गोलक छोटा | उचित क्षमता का उत्तल (अभिसारी) लेंस |
| जरा-दूरदृष्टिता | उम्र के साथ पास की वस्तुएँ | पक्ष्माभी पेशियाँ कमज़ोर, लेंस का लचीलापन कम | उत्तल लेंस; दोनों दोष हों तो द्विफोकसी लेंस |
- द्विफोकसी लेंस में ऊपर का हिस्सा अवतल (दूर देखने के लिए) और नीचे का हिस्सा उत्तल (पास पढ़ने के लिए) होता है (पेज 181)।
- आजकल संस्पर्श लेंस (कॉन्टैक्ट लेंस) या शल्य चिकित्सा से भी दृष्टि दोष ठीक किए जा सकते हैं (पेज 181)।
- हल किया उदाहरण (हमारी संख्याएँ, पिछले अध्याय का लेंस सूत्र): किसी का दूर बिंदु 4 m है। अनंत पर रखी वस्तु का प्रतिबिंब अवतल लेंस को उसके दूर बिंदु पर बनाना है, यानी v = −4 m, u = ∞। 1/f = 1/v − 1/u = −1/4 − 0, तो f = −4 m और क्षमता P = 1/f = −0.25 D।
4. प्रिज़्म से अपवर्तन (10.3, पेज 181-184)
- काँच के स्लैब में निर्गत किरण आपतित किरण के समांतर रहती है, बस बगल में खिसकती है। त्रिभुज प्रिज़्म में ऐसा नहीं होता, क्योंकि उसके फलक एक-दूसरे पर झुके हैं (पेज 181)।
- प्रिज़्म के दो त्रिभुजाकार आधार और तीन आयताकार पार्श्व फलक होते हैं; दो पार्श्व फलकों के बीच का कोण प्रिज़्म कोण है (पेज 181)।
- पहले फलक पर किरण हवा से काँच में जाती है और अभिलंब की ओर मुड़ती है; दूसरे फलक पर काँच से हवा में आते समय अभिलंब से दूर मुड़ती है (पेज 183)।
- निर्गत किरण, आपतित किरण की मूल दिशा से जो कोण बनाती है, वह विचलन कोण (∠D) है (पेज 184)।
5. श्वेत प्रकाश का विक्षेपण और इंद्रधनुष (10.4, पेज 184-185)
- प्रिज़्म श्वेत प्रकाश को रंगों की एक पट्टी में बाँट देता है। रंगों का क्रम: बैंगनी, जामुनी, नीला, हरा, पीला, नारंगी, लाल; याद रखने का शब्द VIBGYOR। इस पट्टी को स्पेक्ट्रम और प्रकाश के इस बँटवारे को विक्षेपण कहते हैं (पेज 184)।
- कारण: प्रिज़्म में हर रंग अलग कोण से मुड़ता है। लाल सबसे कम और बैंगनी सबसे ज़्यादा मुड़ता है, इसलिए रंग अलग-अलग रास्तों से निकलते हैं (पेज 184)।
- न्यूटन ने एक दूसरा, वैसा ही प्रिज़्म उलटा रखा, तो सारे रंग फिर मिलकर श्वेत प्रकाश बन गए। इससे उन्होंने समझा कि सूर्य का प्रकाश सात रंगों से बना है (पेज 185)।
- इंद्रधनुष बारिश के बाद हवा में पानी की नन्हीं बूँदों से बना प्राकृतिक स्पेक्ट्रम है। हर बूँद छोटे प्रिज़्म जैसा काम करती है: प्रकाश अंदर जाते समय अपवर्तित और विक्षेपित होता है, बूँद के अंदर परावर्तित होता है, और बाहर निकलते समय फिर अपवर्तित होता है। इंद्रधनुष हमेशा सूर्य की उलटी दिशा में दिखता है (पेज 185)।
6. वायुमंडलीय अपवर्तन (10.5, पेज 185-186)
- आग या भट्टी के ठीक ऊपर की हवा ज़्यादा गरम, हल्की और थोड़े कम अपवर्तनांक वाली होती है। हवा की हालत लगातार बदलती रहती है, इसलिए उसके पार दिखने वाली चीज़ की आभासी स्थिति हिलती-डुलती लगती है (पेज 185)।
- तारों का टिमटिमाना इसी का बड़ा रूप है। पृथ्वी के वायुमंडल में तारे का प्रकाश बार-बार अपवर्तित होता है और अभिलंब की ओर मुड़ता है, इसलिए क्षितिज के पास तारा अपनी असली जगह से थोड़ा ऊँचा दिखता है। तारे बहुत दूर हैं, लगभग बिंदु-स्रोत; उनकी आभासी स्थिति और आँख तक पहुँचने वाला प्रकाश लगातार बदलता है, इसलिए वे कभी चमकीले, कभी धुँधले लगते हैं (पेज 186)।
- ग्रह नहीं टिमटिमाते, क्योंकि वे पास हैं और विस्तृत स्रोत जैसे हैं; उनके अनेक बिंदुओं से आने वाले प्रकाश के बदलाव औसत में मिटा जाते हैं (पेज 186)।
- सूर्य असली सूर्योदय से लगभग 2 मिनट पहले दिखने लगता है और असली सूर्यास्त के लगभग 2 मिनट बाद तक दिखता है; उस समय सूर्य की चक्रिका चपटी भी लगती है (पेज 186)।
7. प्रकाश का प्रकीर्णन (10.6, पेज 186-187)
- टिंडल प्रभाव: वायुमंडल धुआँ, पानी की नन्हीं बूँदें, धूल और हवा के अणुओं जैसे महीन कणों का मिश्रण है। ऐसे कणों से टकराने पर प्रकाश-पुंज का रास्ता दिखने लगता है, क्योंकि कण प्रकाश को चारों ओर बिखेरते हैं। सच्चे विलयन में किरण-पथ नहीं दिखता, कोलॉइडी विलयन में दिखता है। घने जंगल की पत्तियों के बीच से आती धूप में भी यह दिखता है (पेज 186-187)।
- कण का साइज़ रंग तय करता है: बहुत महीन कण मुख्यतः नीला प्रकाश बिखेरते हैं, बड़े कण लंबी तरंगदैर्घ्य वाला, और बहुत बड़े कणों का बिखरा प्रकाश सफ़ेद भी लग सकता है (पेज 187)।
- आकाश नीला क्यों: हवा के अणु और महीन कण नीले (कम तरंगदैर्घ्य) प्रकाश को लाल से कहीं ज़्यादा बिखेरते हैं। लाल प्रकाश की तरंगदैर्घ्य नीले की लगभग 1.8 गुना है। वायुमंडल न हो तो प्रकीर्णन नहीं होगा और आकाश काला दिखेगा; बहुत ऊँचाई पर उड़ने वालों को आकाश काला ही दिखता है (पेज 187)।
- खतरे के संकेत लाल क्यों: कोहरे या धुएँ में लाल प्रकाश सबसे कम बिखरता है, इसलिए दूर से भी लाल ही दिखता है (पेज 187)।
मुख्य शब्द एक नज़र में
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| समंजन | अभिनेत्र लेंस की अपनी फोकस दूरी बदलने की क्षमता |
| निकट बिंदु | बिना तनाव के साफ़ दिखने की सबसे कम दूरी; सामान्य युवा के लिए लगभग 25 cm |
| दूर बिंदु | साफ़ दिखने की सबसे ज़्यादा दूरी; सामान्य नेत्र के लिए अनंत |
| विचलन कोण | निर्गत किरण और आपतित किरण की मूल दिशा के बीच का कोण |
| विक्षेपण | श्वेत प्रकाश का अपने रंगों में बँटना |
| स्पेक्ट्रम | रंगों की पट्टी (VIBGYOR) |
| प्रकीर्णन | कणों से प्रकाश का चारों ओर बिखरना |
| टिंडल प्रभाव | कणों से बिखरने के कारण प्रकाश-पुंज का रास्ता दिखना |
8. तीन गलतियाँ जो अंक काटती हैं
- दोष और लेंस उलट देना। निकट-दृष्टि में दूर की चीज़ नहीं दिखती और लेंस अवतल लगता है; दीर्घ-दृष्टि में पास की चीज़ नहीं दिखती और लेंस उत्तल। नाम में "निकट" देखकर उलटा न लिखें।
- समंजन में पेशियों का काम उलटा लिखना। पास देखने पर पेशियाँ सिकुड़ती हैं और लेंस मोटा होता है; दूर देखने पर ढीली पड़ती हैं और लेंस पतला।
- "लाल सबसे ज़्यादा मुड़ता है" लिखना। प्रिज़्म में लाल सबसे कम और बैंगनी सबसे ज़्यादा मुड़ता है; प्रकीर्णन में भी नीला ज़्यादा बिखरता है, लाल कम।
9. हमारे 8 प्रश्न, उत्तर के साथ
पहले कॉपी पर खुद हल करें, फिर उत्तर देखें। ये प्रश्न हमारे अपने हैं, किताब के अभ्यास-प्रश्न नहीं। लेंस वाले हल पिछले अध्याय की नई कार्तीय चिह्न परिपाटी से हैं।
प्रश्न 1. तेज़ धूप से निकलकर पूजा एक अंधेरे सिनेमा हॉल में जाती है। पहले उसे कुछ नहीं दिखता, फिर धीरे-धीरे सीटें दिखने लगती हैं। (a) इस बीच उसकी पुतली बड़ी हुई होगी या छोटी, और क्यों? (b) परदे का जो प्रतिबिंब उसके रेटिना पर बनता है, वह वास्तविक है या आभासी, सीधा या उलटा? (c) रेटिना पर प्रकाश पड़ने के बाद "देखने" तक क्या-क्या होता है?
उत्तर: (a) बड़ी, ताकि ज़्यादा प्रकाश अंदर जाए; (b) वास्तविक और उलटा; (c) प्रकाश-सुग्राही कोशिकाएँ विद्युत सिग्नल बनाती हैं, दृक् तंत्रिकाएँ उन्हें मस्तिष्क तक ले जाती हैं, और मस्तिष्क उन्हें समझता है। (a) पुतली ही तय करती है कि कितना प्रकाश नेत्र में जाए (पेज 179); कम रोशनी में देखने के लिए ज़्यादा प्रकाश चाहिए, इसलिए वह फैलती है। (b) अभिनेत्र लेंस रेटिना पर उलटा, वास्तविक प्रतिबिंब बनाता है (पेज 179)। (c) पेज 179 का क्रम: कोशिकाएँ सक्रिय होकर सिग्नल बनाती हैं, तंत्रिकाएँ उन्हें ले जाती हैं, मस्तिष्क व्याख्या करता है।
प्रश्न 2. पिछले दो साल में रोहन का दूर बिंदु अनंत से खिसककर 2.5 m पर आ गया है, जबकि उसका निकट बिंदु अब भी 25 cm है। (a) उसे कौन-सा दोष है? (b) बिना चश्मे के वह किस दूरी से किस दूरी तक की चीज़ें साफ़ देख सकता है? (c) 10 m दूर खड़ी बस के नंबर का प्रतिबिंब उसकी आँख में कहाँ बनता है? (d) क्या उसे किताब पढ़ने के लिए चश्मा चाहिए?
उत्तर: (a) निकट-दृष्टि दोष; (b) 25 cm से 2.5 m तक; (c) रेटिना के सामने; (d) नहीं। (a) दूर बिंदु का अनंत से पास आ जाना और दूर की चीज़ें साफ़ न दिखना निकट-दृष्टि है (पेज 180)। (b) साफ़ दिखने की सीमा निकट बिंदु से दूर बिंदु तक है (पेज 179): यहाँ 25 cm से 2.5 m। (c) बस 2.5 m से आगे है; ऐसे नेत्र में दूर की वस्तु का प्रतिबिंब रेटिना पर न बनकर उसके सामने बनता है, इसलिए नंबर धुँधला दिखता है (पेज 180)। (d) किताब आम तौर पर 25-40 cm पर पढ़ी जाती है, जो उसकी साफ़ सीमा के अंदर है।
प्रश्न 3. सलमा दूर के पहाड़ साफ़ देखती है। उसके पढ़ने के चश्मे पर +2 D लिखा है, और वह किताब को आँख से 25 cm दूर रखकर उसी चश्मे से आराम से पढ़ती है। (a) चश्मे के लेंस की फोकस दूरी कितनी है, और लेंस किस प्रकार का है? (b) 25 cm पर रखी किताब का प्रतिबिंब यह लेंस कहाँ बनाता है? (c) इससे सलमा के निकट बिंदु के बारे में क्या पता चलता है, और उसका दोष क्या है?
उत्तर: (a) +50 cm, उत्तल (अभिसारी) लेंस; (b) किताब की ही ओर, लेंस से 50 cm पर (v = −50 cm); (c) उसका निकट बिंदु लगभग 50 cm है, यानी 25 cm से दूर: दीर्घ-दृष्टि दोष। (a) f = 1/P = 1/2 m = 0.5 m = +50 cm; धनात्मक क्षमता उत्तल लेंस की होती है (अध्याय 9, पेज 173)। (b) u = −25 cm: 1/v = 1/f + 1/u = 1/50 − 1/25 = (1 − 2)/50 = −1/50, तो v = −50 cm, यानी आभासी, सीधा प्रतिबिंब किताब की ओर 50 cm पर (अध्याय 9, पेज 171)। (c) चश्मा किताब को वहाँ "दिखाता" है जहाँ से सलमा साफ़ देख पाती है, इसलिए उसका निकट बिंदु लगभग 50 cm है। निकट बिंदु का 25 cm से दूर हट जाना दीर्घ-दृष्टि है, जो उत्तल लेंस से ठीक होती है (पेज 180-181)।
प्रश्न 4. काँच के एक प्रिज़्म का आधार नीचे है और उस पर बाईं ओर से श्वेत प्रकाश की पतली किरण पड़ती है। सामने के परदे पर स्पेक्ट्रम बनता है। (a) कौन-सा रंग सबसे कम मुड़ा, और कौन-सा सबसे ज़्यादा? (b) प्रिज़्म किरणों को अपने आधार की ओर, यानी नीचे की ओर मोड़ता है। तो परदे पर सबसे ऊपर कौन-सा रंग दिखेगा, और सबसे नीचे कौन-सा? (c) VIBGYOR में पीले के ठीक दोनों ओर कौन-से रंग हैं?
उत्तर: (a) लाल सबसे कम, बैंगनी सबसे ज़्यादा; (b) सबसे ऊपर लाल, सबसे नीचे बैंगनी; (c) हरा और नारंगी। (a) पेज 184 के अनुसार प्रिज़्म में लाल सबसे कम और बैंगनी सबसे ज़्यादा झुकता है। (b) सब रंग नीचे की ओर मुड़ते हैं; लाल सबसे कम मुड़ता है, इसलिए वह अपनी मूल दिशा के सबसे पास, सबसे ऊपर रहता है, और बैंगनी सबसे ज़्यादा मुड़कर सबसे नीचे पहुँचता है। (c) क्रम बैंगनी, जामुनी, नीला, हरा, पीला, नारंगी, लाल है (पेज 184), इसलिए पीले के एक ओर हरा और दूसरी ओर नारंगी।
प्रश्न 5. किताब कहती है कि लाल प्रकाश की तरंगदैर्घ्य नीले प्रकाश की लगभग 1.8 गुना है। (a) अगर किसी नीले प्रकाश की तरंगदैर्घ्य 400 nm मानें, तो उस हिसाब से लाल की तरंगदैर्घ्य लगभग कितनी होगी? (b) हवा के अणु इन दोनों में से किसे ज़्यादा बिखेरते हैं? (c) एक धुंध भरी शाम को समुद्र किनारे के एक लाइटहाउस को अपनी चेतावनी बत्ती के लिए नीला और लाल में से एक रंग चुनना है। कौन-सा रंग दूर के जहाज़ों तक ज़्यादा अच्छी तरह पहुँचेगा, और क्यों?
उत्तर: (a) लगभग 720 nm; (b) नीले को; (c) लाल, क्योंकि धुंध में वह सबसे कम बिखरता है। (a) 400 × 1.8 = 720 nm। (b) हवा के अणु जैसे महीन कण कम तरंगदैर्घ्य वाले नीले प्रकाश को लाल से कहीं ज़्यादा प्रबलता से बिखेरते हैं (पेज 187)। (c) कोहरे या धुएँ में लाल प्रकाश का प्रकीर्णन सबसे कम होता है, इसलिए उसका ज़्यादातर प्रकाश सीधा आगे जाता है और दूर से भी लाल ही दिखता है (पेज 187)।
प्रश्न 6. अंधेरे कमरे में दो काँच के गिलास रखे हैं: एक में साफ़ नमक का घोल, दूसरे में पानी में घुली थोड़ी-सी दूध की बूँदें। दोनों के आर-पार बगल से टॉर्च की पतली किरण डाली जाती है। (a) किस गिलास में किरण का रास्ता दिखेगा? (b) इस प्रभाव का नाम क्या है, और यह क्यों होता है? (c) दूसरे गिलास के कणों के बारे में इससे क्या पता चलता है?
उत्तर: (a) दूध वाले गिलास में; (b) टिंडल प्रभाव, कणों से प्रकाश के प्रकीर्णन के कारण; (c) उसके कण इतने बड़े हैं कि प्रकाश बिखेर सकें, यानी वह कोलॉइडी विलयन जैसा है, जबकि नमक का घोल सच्चा विलयन है। (a)-(b) सच्चे विलयन से गुज़रते प्रकाश-पुंज का रास्ता नहीं दिखता, पर कोलॉइडी विलयन में, जहाँ कण अपेक्षाकृत बड़े हैं, दिखता है; कोलॉइडी कणों से यह प्रकीर्णन ही टिंडल प्रभाव है (पेज 186-187)। (c) नमक के घोल के कण प्रकाश बिखेरने लायक बड़े नहीं हैं, इसलिए वहाँ किरण अदृश्य रहती है।
प्रश्न 7. एक नेत्र-विशेषज्ञ दो मरीज़ों की जाँच के बाद लिखती हैं: (A) "अभिनेत्र लेंस की वक्रता बहुत अधिक है।" (B) "अभिनेत्र लेंस की फोकस दूरी बहुत अधिक हो गई है।" हर मरीज़ के लिए बताइए: (a) कौन-सा दोष होगा; (b) जिस वस्तु को वह साफ़ नहीं देख पाता, उसका प्रतिबिंब रेटिना के सामने बनेगा या पीछे; (c) कौन-सा लेंस लगेगा।
उत्तर: A: निकट-दृष्टि, रेटिना के सामने, अवतल लेंस। B: दीर्घ-दृष्टि, रेटिना के पीछे, उत्तल लेंस। (A) लेंस की अत्यधिक वक्रता निकट-दृष्टि का एक कारण है; ज़्यादा वक्र लेंस किरणों को जल्दी मिला देता है, इसलिए दूर की वस्तु का प्रतिबिंब रेटिना के सामने बनता है, और अवतल (अपसारी) लेंस उसे पीछे रेटिना पर लाता है (पेज 180)। (B) फोकस दूरी का बहुत बढ़ जाना दीर्घ-दृष्टि का एक कारण है; पास की वस्तु की किरणें रेटिना के पीछे फोकस होती हैं, और उत्तल (अभिसारी) लेंस अतिरिक्त क्षमता देकर उन्हें रेटिना पर लाता है (पेज 180-181)।
प्रश्न 8. आँखों की जाँच में डॉक्टर परीक्षण-फ्रेम में दो पतले लेंस एक साथ (संपर्क में) रखते हैं: −0.75 D और −0.25 D। इससे मरीज़ को दूर की चीज़ें साफ़ दिखने लगती हैं। (a) दोनों लेंसों की कुल क्षमता कितनी है? (b) एक अकेले लेंस से यही काम लेना हो, तो उसकी फोकस दूरी क्या होगी, और वह कौन-सा लेंस है? (c) मरीज़ का दूर बिंदु कितनी दूर है, और उसे कौन-सा दोष है?
उत्तर: (a) −1.0 D; (b) −1 m (−100 cm), अवतल लेंस; (c) 1 m, निकट-दृष्टि दोष। (a) संपर्क में रखे लेंसों की क्षमताएँ जुड़ती हैं: −0.75 + (−0.25) = −1.0 D (अध्याय 9, पेज 174)। (b) f = 1/P = 1/(−1.0) m = −1 m; ऋणात्मक क्षमता अवतल लेंस की होती है (अध्याय 9, पेज 173)। (c) यह लेंस अनंत पर रखी वस्तु का प्रतिबिंब अपनी फोकस दूरी पर, यानी आँख से 1 m पर बनाता है; वहीं मरीज़ का दूर बिंदु है। दूर बिंदु अनंत से पास आ जाना और अवतल लेंस से सुधार, दोनों निकट-दृष्टि के लक्षण हैं (पेज 180)।
10. इस अध्याय पर AI का जवाब कैसे परखें
- दोष और लेंस की जोड़ी देखिए। AI अगर निकट-दृष्टि के लिए उत्तल लेंस बताए, तो वह गलत है; ऊपर की सारणी और पेज 180-181 से मिलाइए।
- क्षमता का चिह्न और मात्रक। चश्मे की क्षमता D में होती है और f मीटर में लेकर निकलती है। अवतल लेंस की क्षमता ऋणात्मक लिखी होनी चाहिए।
- कौन ज़्यादा मुड़ता है, कौन ज़्यादा बिखरता है। प्रिज़्म में बैंगनी ज़्यादा मुड़ता है (पेज 184), और हवा में नीला ज़्यादा बिखरता है (पेज 187)। AI लाल को "सबसे ज़्यादा" कहे, तो उसे वापस जाँचें।
AI से पढ़ाई पर और: AI से पढ़ाई कैसे करें, नकल किए बिना।
कक्षा 10 विज्ञान का अभ्यास
- ऑनलाइन, तुरंत जाँच के साथ: अभ्यास पेज पर कक्षा 10 और विज्ञान का कोई विषय चुनें।
- अंग्रेज़ी में इसी अध्याय के प्रश्न-उत्तर: Class 10 Human Eye, questions with answers।
- नेत्र और किरण आरेख बनाने का अभ्यास (अंग्रेज़ी में): Class 10 Science diagrams।
- सारे सूत्र एक पेज पर (अंग्रेज़ी में): Class 10 Science formula sheet 2026-27।
- पिछला अध्याय हिंदी में: कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 9 प्रकाश – परावर्तन तथा अपवर्तन।
- बोर्ड की तैयारी: कक्षा 10 बोर्ड परीक्षा की तैयारी कैसे करें।
CMDLearn कहाँ फिट होता है
CMDLearn कक्षा 1 से 10 के लिए हिंदी, मराठी और अंग्रेज़ी में एक AI ट्यूटर बना रहा है, जो एक कदम समझाता है और बच्चे का काम जाँचता है, पर लिखना बच्चे पर छोड़ता है। यह अभी तैयार हो रहा है और अभी कोई बच्चा इसका इस्तेमाल नहीं करता। जब कुछ आज़माने लायक होगा, तब खबर पाने के लिए आप वेटलिस्ट से जुड़ सकते हैं।
स्रोत
सभी 5 नवंबर 2026 को जाँचे गए।
- NCERT, विज्ञान, कक्षा 10 की पाठ्यपुस्तक (हिंदी माध्यम, Reprint 2026-27), अध्याय 10 "मानव नेत्र तथा रंग-बिरंगा संसार", पेज 178 से 189: ncert.nic.in/textbook/pdf/jhsc110.pdf
- NCERT, विज्ञान, कक्षा 10, अध्याय 9 "प्रकाश – परावर्तन तथा अपवर्तन" (लेंस सूत्र और क्षमता, पेज 171-174): ncert.nic.in/textbook/pdf/jhsc109.pdf
- NCERT, Science (अंग्रेज़ी संस्करण), Class X, Chapter 10 "The Human Eye and the Colourful World": ncert.nic.in/textbook/pdf/jesc110.pdf
- CBSE, Science (086), Class X 2026-27, course structure (पेज 4-6): cbseacademic.nic.in, Science_SecP1_2026-27.pdf
अध्याय के विचार, शब्द और पेज-संख्याएँ ऊपर के दस्तावेज़ों से हैं। इस पेज की सारी व्याख्याएँ, उदाहरण, प्रश्न और उत्तर हमारे अपने हैं; हर गिनती स्क्रिप्ट से जाँची गई है।
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