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कक्षा 9 गणित अध्याय 3 संख्याओं का संसार: Hindi medium नोट्स और 8 प्रश्न-उत्तर
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कक्षा 9 की नई गणित की पाठ्यपुस्तक गणित मंजरी (भाग 1) का तीसरा अध्याय "संख्याओं का संसार" है, पेज 41 से 67 तक। अंग्रेज़ी किताब में इसी अध्याय का नाम "The World of Numbers" है। यह गाइड दो काम करती है:
- अध्याय के मुख्य विचारों को छोटे नोट्स में समझाती है;
- अंत में हमारे अपने 8 प्रश्न देती है, हल और उत्तर के साथ।
पाठ्यपुस्तक साथ में खुली रखें। यहाँ की व्याख्याएँ, उदाहरण और प्रश्न हमारे अपने हैं; अंतिम बात पाठ्यपुस्तक की ही मानें। पिछला अध्याय: कक्षा 9 गणित अध्याय 2 रैखिक बहुपदों का परिचय। अंग्रेज़ी में यही अध्याय: Class 9 The World of Numbers, practice questions with answers।
यह गाइड सीधे हिंदी में लिखी गई है, पर किसी हिंदी-माध्यम शिक्षक ने अभी इसकी भाषा नहीं जाँची है (native review pending)।
1. संख्याएँ कैसे बढ़ती गईं: एक नज़र में
यह अध्याय संख्याओं की कहानी इतिहास के क्रम में सुनाता है: पहले गिनती, फिर शून्य, फिर ऋण संख्याएँ, फिर भिन्न, और अंत में वे संख्याएँ जो भिन्न के रूप में लिखी ही नहीं जा सकतीं। हर नया समूह पुराने को अपने अंदर रख लेता है:
| समूह | चिह्न | क्या जुड़ा | हमारा उदाहरण |
|---|---|---|---|
| प्राकृत संख्याएँ | N | गिनती: 1, 2, 3, … | 25 |
| पूर्णांक | Z | शून्य और ऋण संख्याएँ | −8, 0, 13 |
| परिमेय संख्याएँ | Q | p/q रूप वाली सब संख्याएँ (भिन्न भी) | −2/9, 1.75 |
| अपरिमेय संख्याएँ | — | जो p/q रूप में नहीं आतीं | √3, π |
| वास्तविक संख्याएँ | R | परिमेय और अपरिमेय, दोनों मिलाकर | ऊपर की सब |
किताब बताती है कि गिनती की ज़रूरत हज़ारों साल पुरानी है; लेबोम्बो और इशांगो जैसी अस्थियों पर बने निशान इसके प्रमाण हैं (पेज 41-42)।
2. शून्य और ब्रह्मगुप्त के नियम
"शून्य" का विचार भारत में पहले दर्शन में आया और फिर ब्रह्मगुप्त ने उसे एक ऐसी संख्या बनाया जिस पर जोड़-घटाव-गुणा किया जा सके (पेज 43-44)। शून्य के तीन मूल नियम (पेज 44), हमारे उदाहरणों के साथ:
- किसी संख्या में शून्य जोड़ें, संख्या वही रहती है: 17 + 0 = 17;
- किसी संख्या में से शून्य घटाएँ, संख्या वही रहती है: 17 − 0 = 17;
- किसी संख्या को शून्य से गुणा करें, फल शून्य होता है: 17 × 0 = 0।
3. पूर्णांक: धन-संपत्ति और ऋणभार
ब्रह्मगुप्त ने धनात्मक संख्याओं को धन-संपत्ति (धन) और ऋणात्मक संख्याओं को ऋणभार (ऋण) की तरह समझा (पेज 45)। संख्या रेखा पर शून्य के बाईं ओर ऋणात्मक पूर्णांक और दाईं ओर धनात्मक पूर्णांक होते हैं। धनात्मक संख्याएँ, उनकी ऋणात्मक संख्याएँ और शून्य मिलकर पूर्णांकों का समूह Z बनाते हैं।
चिह्नों के नियम, हमारे उदाहरणों में (नियम पेज 45 पर):
| स्थिति | नियम | उदाहरण |
|---|---|---|
| धन + धन | धन | 6 + 9 = 15 |
| ऋण + ऋण | ऋण | (−6) + (−9) = −15 |
| धन × ऋण | ऋण | 6 × (−9) = −54 |
| ऋण × ऋण | धन | (−6) × (−9) = 54 |
ऋण × ऋण = धन को ऐसे सोचिए: किसी के ऊपर का कर्ज़ हटा देना उसे अमीर बनाता है।
4. परिमेय संख्याएँ
परिमेय संख्या वह है जिसे दो पूर्णांकों के भागफल p/q की तरह लिखा जा सकता है; शर्त बस इतनी है कि हर q ≠ 0 हो (पेज 47)। इसका समूह Q है। ध्यान रखने वाली बातें (पेज 47-48):
- हर पूर्णांक परिमेय है, क्योंकि −11 = −11/1।
- एक परिमेय संख्या के अनगिनत समतुल्य रूप होते हैं: 3/5 = 6/10 = 30/50। संख्या रेखा पर हम उसका सरलतम रूप लेते हैं, जिसमें p और q सह-अभाज्य हों (1 के अलावा कोई सार्व गुणनखंड नहीं)।
- a/b = c/d तभी होता है, जब ad और bc बराबर निकलें (पेज 48)।
- जोड़ने-घटाने के लिए पहले हर बराबर करें; गुणा में अंश × अंश और हर × हर; भाग में दूसरी संख्या का व्युत्क्रम लेकर गुणा करें (पेज 48)।
5. संख्या रेखा, निरपेक्ष मान और सघनता
परिमेय संख्या को संख्या रेखा पर रखने के लिए दो पूर्णांकों के बीच के भाग को हर जितने बराबर हिस्सों में बाँटते हैं (पेज 50-51)। जैसे 7/3 = 2 1/3, तो यह 2 और 3 के बीच, 2 से एक-तिहाई आगे है।
- निरपेक्ष मान |x| = शून्य से x की दूरी, जो कभी ऋणात्मक नहीं होती: |−2/7| = 2/7 (पेज 51)।
- दो संख्याओं a और b के बीच की दूरी |a − b| होती है (पेज 52)।
- सघनता: किन्हीं भी दो परिमेय संख्याओं के बीच एक और परिमेय संख्या ज़रूर होती है; उनका माध्य (a + b)/2 ऐसी ही एक संख्या है (पेज 52)। इसलिए दो परिमेय संख्याओं के बीच अनगिनत परिमेय संख्याएँ हैं।
6. अपरिमेय संख्याएँ
1 इकाई भुजा वाले वर्ग का विकर्ण √2 इकाई होता है, और √2 को p/q के रूप में नहीं लिखा जा सकता (पेज 53)। ऐसी संख्याएँ अपरिमेय संख्याएँ कहलाती हैं। √2 की अपरिमेयता किताब विरोधाभास द्वारा उपपत्ति से सिद्ध करती है (पेज 53-55): मान लो √2 = p/q सरलतम रूप में है, फिर दिखाओ कि p और q दोनों सम निकलते हैं, जो "सरलतम रूप" वाली बात के विपरीत है।
√2 को संख्या रेखा पर दिखाने का तरीका (पेज 55-56): 0 से 1 इकाई पर लंब खड़ा करें, उस पर 1 इकाई नापें, 0 से उस बिंदु तक की दूरी √2 है; परकार से यही दूरी संख्या रेखा पर उतार दें। π भी अपरिमेय है (पेज 56)।
7. दशमलव से पहचान: सांत, आवर्ती और अपरिमेय
किसी संख्या का दशमलव प्रसार बता देता है कि वह परिमेय है या अपरिमेय (पेज 57):
| दशमलव | संख्या | हमारा उदाहरण |
|---|---|---|
| सांत (कुछ अंकों के बाद ख़त्म) | परिमेय | 9/16 = 0.5625 |
| असांत आवर्ती (एक खंड बार-बार दोहराता है) | परिमेय | 4/33 = 0.121212… |
| असांत अनावर्ती (न ख़त्म, न दोहराव) | अपरिमेय | √3 = 1.7320508… |
बिना भाग किए अनुमान (पेज 58): p/q को सरलतम रूप में लाइए। अगर हर q के अभाज्य गुणनखंड में केवल 2 और/या 5 हों, तो दशमलव सांत होगा; कोई और अभाज्य गुणनखंड हो, तो आवर्ती। कारण: तभी हर को 10 की किसी घात में बदला जा सकता है।
आवर्ती दशमलव को p/q में बदलना (पेज 59-61): दशमलव को x मानें। जितने अंक दोहराते हैं, उतनी 10 की घात से गुणा करें; अगर दशमलव के ठीक बाद कुछ अंक नहीं दोहराते (सामान्य आवर्ती), तो पहले उतनी 10 की घात से गुणा करके उन्हें दशमलव बिंदु के बाएँ ले आएँ। फिर दो समीकरण घटाएँ और x निकालें।
चक्रीय संख्या (पेज 61): 1/7 का आवर्ती खंड 142857 है; इसे 1 से 6 तक गुणा करने पर वही अंक घूमकर आते हैं।
8. तीन गलतियाँ जो अंक काटती हैं
- सरलतम रूप में लाए बिना हर जाँचना। 21/60 का हर 60 = 2² × 3 × 5 है, जिसमें 3 है, पर 21/60 = 7/20 और 20 में केवल 2 और 5 हैं: दशमलव सांत है (0.35)।
- q = 0 भूल जाना। 5/0 कोई परिमेय संख्या नहीं है; परिभाषा में q ≠ 0 ज़रूरी है।
- हर लंबे दशमलव को अपरिमेय मान लेना। 0.142857142857… लंबा है पर दोहराता है, इसलिए परिमेय (1/7) है।
9. हमारे 8 प्रश्न, उत्तर के साथ
प्रश्न 1. (a) एक पनडुब्बी समुद्र तल से 120 मीटर नीचे (−120 मीटर) है। वह 45 मीटर ऊपर आती है और फिर 30 मीटर नीचे जाती है। अब वह कहाँ है? (b) ब्रह्मगुप्त के चिह्न-नियमों से हल कीजिए: (−9) × (−4), (−56) ÷ (−7) और (−13) − 0।
उत्तर: (a) −105 मीटर, यानी समुद्र तल से 105 मीटर नीचे; (b) 36, 8, −13। (a) −120 + 45 − 30 = −105। (b) ऋण × ऋण = धन, इसलिए (−9) × (−4) = 36; भाग गुणा का उलटा है, और 8 × (−7) = −56, इसलिए (−56) ÷ (−7) = 8 (ऋण ÷ ऋण = धन); किसी संख्या में से शून्य घटाने पर वही संख्या बचती है, इसलिए −13। (पूर्णांक और शून्य के नियम, पेज 44-45।)
प्रश्न 2. इन संख्याओं को देखिए: 12, −5, 0, −3/8, √49, √20, 0.777… (7 दोहराता है)। बताइए कौन-सी (a) प्राकृत संख्याएँ हैं, (b) पूर्णांक हैं, (c) परिमेय हैं, (d) अपरिमेय हैं।
उत्तर: (a) प्राकृत: 12 और √49 (√49 = 7)। (b) पूर्णांक: 12, −5, 0, √49। (c) परिमेय: 12, −5, 0, −3/8, √49, 0.777… (0.777… = 7/9)। (d) अपरिमेय: √20, क्योंकि 20 किसी पूर्णांक का वर्ग नहीं है (4² = 16, 5² = 25)। सब की सब वास्तविक संख्याएँ हैं। (संख्याओं के समूह, पेज 45-47, 53 और 57।)
प्रश्न 3. (a) क्या −4/6 और 10/(−15) बराबर परिमेय संख्याएँ हैं? ad = bc वाले नियम से जाँचिए। (b) एक पानी की टंकी 7/8 भरी है। सुबह पूरी टंकी का 1/3 भाग और शाम को पूरी टंकी का 1/4 भाग पानी इस्तेमाल होता है। अब टंकी का कितना भाग भरा है?
उत्तर: (a) हाँ, बराबर हैं; (b) 7/24 भाग। (a) a = −4, b = 6, c = 10, d = −15: ad = (−4) × (−15) = 60 और bc = 6 × 10 = 60। दोनों बराबर हैं, इसलिए संख्याएँ बराबर हैं (दोनों −2/3 हैं)। (b) हर 24 बनाइए: 7/8 = 21/24, 1/3 = 8/24, 1/4 = 6/24। 21/24 − 8/24 − 6/24 = 7/24। (समानता और जोड़-घटाव के नियम, पेज 48।)
प्रश्न 4. संख्या रेखा पर बिंदु A = −7/4 और B = 5/6 हैं। (a) |A| और |B| लिखिए। (b) A और B के बीच की दूरी ज्ञात कीजिए।
उत्तर: (a) |A| = 7/4, |B| = 5/6; (b) 31/12 इकाई (= 2 7/12)। (a) निरपेक्ष मान शून्य से दूरी है, इसलिए चिह्न हट जाता है। (b) दूरी = |A − B| = |−7/4 − 5/6| = |−21/12 − 10/12| = |−31/12| = 31/12। जाँच: A शून्य से 21/12 बाईं ओर है और B 10/12 दाईं ओर, कुल 31/12। (निरपेक्ष मान और दूरी, पेज 51-52।)
प्रश्न 5. माध्य वाली विधि से −1/3 और −1/4 के बीच दो परिमेय संख्याएँ ज्ञात कीजिए। फिर हर 48 लेकर एक तीसरी संख्या भी लिखिए, और इन तीनों संख्याओं को −1/3 और −1/4 के साथ छोटे से बड़े क्रम में रखिए।
उत्तर: −7/24, −13/48 और −5/16। पहला माध्य: (−1/3 + (−1/4)) ÷ 2 = (−7/12) ÷ 2 = −7/24। दूसरा माध्य, −7/24 और −1/4 का: (−7/24 − 6/24) ÷ 2 = −13/48। हर 48 करने पर −1/3 = −16/48 और −1/4 = −12/48; बीच की −15/48 = −5/16 तीसरी संख्या है। क्रम: −16/48 < −15/48 < −14/48 < −13/48 < −12/48, अर्थात −1/3 < −5/16 < −7/24 < −13/48 < −1/4। (सघनता, पेज 52।)
प्रश्न 6. बिना लंबा भाग किए बताइए कि इनका दशमलव प्रसार सांत होगा या आवर्ती। सांत हो तो दशमलव भी लिखिए। (a) 21/40 (b) 9/75 (c) 5/24
उत्तर: (a) सांत, 0.525; (b) सांत, 0.12; (c) आवर्ती। (a) 21/40 सरलतम है, 40 = 2³ × 5, इसलिए सांत: 21/40 = 525/1000 = 0.525। (b) पहले सरलतम रूप: 9/75 = 3/25, और 25 = 5², इसलिए सांत: 3/25 = 12/100 = 0.12। (75 = 3 × 5² देखकर "आवर्ती" कहना गलत होता।) (c) 5/24 सरलतम है, 24 = 2³ × 3; हर में 3 है, इसलिए आवर्ती: 5/24 = 0.208333… (3 दोहराता है)। (दशमलव प्रसार का अनुमान, पेज 58।)
प्रश्न 7. p/q रूप में बदलिए: (a) 0.818181… (81 दोहराता है) (b) 1.2777… (केवल 7 दोहराता है)
उत्तर: (a) 9/11; (b) 23/18। (a) x = 0.8181… लें। दो अंक दोहराते हैं, इसलिए 100 से गुणा: 100x = 81.8181…। घटाने पर 99x = 81, x = 81/99 = 9/11। (b) x = 1.2777… लें। 2 नहीं दोहराता, इसलिए पहले 10x = 12.777…; फिर एक दोहराता अंक, इसलिए 100x = 127.777…। घटाने पर 90x = 115, x = 115/90 = 23/18। जाँच: 23 ÷ 18 = 1.2777…। (शुद्ध और सामान्य आवर्ती दशमलव, पेज 59-61।)
प्रश्न 8. (a) संख्या रेखा पर √10 की लंबाई कैसे बनाएँगे? बताइए कि वह किन दो क्रमागत पूर्णांकों के बीच पड़ेगी। (b) √10 और π के बीच एक परिमेय संख्या लिखिए।
उत्तर: (a) 0 से 3 इकाई पर लंब खड़ा करके उस पर 1 इकाई; √10 संख्या 3 और 4 के बीच है। (b) जैसे 3.15। (a) संख्या रेखा पर OA = 3 इकाई लें, A पर लंब खड़ा करें और उस पर AB = 1 इकाई नापें। तब OB² = 3² + 1² = 10, इसलिए OB = √10। O को केंद्र और OB को त्रिज्या मानकर परकार से चाप खींचें; जहाँ चाप संख्या रेखा को काटे, वह बिंदु √10 है। 3² = 9 < 10 < 16 = 4², इसलिए √10 संख्या 3 और 4 के बीच है। (b) π ≈ 3.1416 और √10 ≈ 3.1623 हैं, इसलिए 3.15 = 63/20 दोनों के बीच की परिमेय संख्या है। (लंबाई की रचना, पेज 55-56; दशमलव प्रसार, पेज 61।)
10. इस अध्याय पर AI का जवाब कैसे परखें
- सरलतम रूप जाँचें। AI किसी भिन्न के दशमलव को "आवर्ती" बताए, तो पहले भिन्न को सरलतम रूप में लाकर हर के अभाज्य गुणनखंड खुद देखें।
- उलटा भाग करके परखें। आवर्ती दशमलव का p/q मिले, तो p ÷ q करके देखें कि वही अंक दोहराते हैं या नहीं।
- वर्ग से परखें। AI कहे कि √n अपरिमेय है, तो देखें कि n किसी पूर्णांक का वर्ग तो नहीं है (√49 = 7 परिमेय है)।
कक्षा 9 गणित का अभ्यास
- ऑनलाइन, तुरंत जाँच के साथ: अभ्यास पेज पर कक्षा 9 के संख्याओं वाले प्रश्न।
- छापने लायक, उत्तर के साथ: The World of Numbers (परिमेय और अपरिमेय संख्याएँ) की वर्कशीट।
- पिछला अध्याय: अध्याय 2 रैखिक बहुपदों का परिचय।
- आगे कक्षा 10 में यही विषय: कक्षा 10 गणित अध्याय 1 वास्तविक संख्याएँ।
CMDLearn कहाँ फिट होता है
CMDLearn कक्षा 1 से 10 के लिए एक AI ट्यूटर बना रहा है, जो एक-एक कदम समझाता है और बच्चे के हल की जाँच करता है, पर लिखने का काम बच्चे पर ही छोड़ता है। यह अभी विकसित हो रहा है और अभी कोई बच्चा इसका उपयोग नहीं करता। जब आज़माने लायक कुछ हो, तब खबर पाने के लिए आप वेटलिस्ट से जुड़ सकते हैं।
स्रोत
सब 5 नवंबर 2026 को खोलकर पढ़े गए। पेज संख्याएँ पाठ्यपुस्तक की छपी हुई पेज संख्याएँ हैं।
- NCERT, गणित मंजरी, कक्षा 9, भाग 1 (हिंदी माध्यम, प्रथम संस्करण जून 2026), अध्याय 3 "संख्याओं का संसार", पेज 41 से 67: ncert.nic.in/textbook/pdf/ihmh103.pdf
- NCERT, Ganita Manjari, Grade 9, Part I (अंग्रेज़ी संस्करण), Chapter 3 "The World of Numbers": ncert.nic.in/textbook/pdf/iemh103.pdf
अध्याय का नाम, पेज संख्याएँ और परिभाषाएँ ऊपर की पाठ्यपुस्तक से हैं। व्याख्याएँ, उदाहरण, प्रश्न और हल हमारे अपने हैं, और हर संख्या स्क्रिप्ट से दोबारा जाँची गई है। यह गाइड सामान्य जानकारी है; अपने शिक्षक और पाठ्यपुस्तक की बात मानें।
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