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कक्षा 9 विज्ञान अध्याय 3 क्रियाशील ऊतक: Hindi medium नोट्स और 8 प्रश्न-उत्तर

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NCERT की कक्षा 9 की नई विज्ञान पाठ्यपुस्तक अन्वेषण का तीसरा अध्याय "क्रियाशील ऊतक" है, पेज 28 से 47 तक। पिछले अध्याय में हमने एक कोशिका को समझा था; इस अध्याय में देखते हैं कि एक जैसी कोशिकाएँ मिलकर ऊतक कैसे बनाती हैं, पौधे लंबाई और मोटाई में कैसे बढ़ते हैं, पौधों में पानी और भोजन कैसे पहुँचता है, और हमारे शरीर के ऊतक, पेशियाँ, अस्थियाँ और संधियाँ मिलकर गति कैसे करते हैं। यह गाइड दो काम करती है:

पाठ्यपुस्तक साथ में खुली रखें। यहाँ की व्याख्याएँ, उदाहरण और प्रश्न हमारे अपने हैं; अंतिम बात पाठ्यपुस्तक की ही मानें। अंग्रेज़ी में यही अध्याय: Class 9 Tissues in Action, questions with answers।

यह गाइड सीधे हिंदी में लिखी गई है, पर किसी हिंदी-माध्यम शिक्षक ने अभी इसकी भाषा नहीं जाँची है (native review pending)।

परीक्षा में यह अध्याय

CBSE ने 2026-27 के लिए कक्षा 9 विज्ञान की वार्षिक परीक्षा 80 अंकों की रखी है, और 20 अंक आंतरिक मूल्यांकन के हैं। इकाई I, "World of Living" (सजीवों का संसार), के 27 अंक हैं; इसमें अध्याय 2, 3, 11 और 12 आते हैं (CBSE पाठ्यक्रम, पेज 4)। CBSE अध्याय-वार अंक नहीं देता।

पाठ्यक्रम "Tissues" के लिए 13 कालांश रखता है (पेज 5)। उसमें ये बातें हैं: जीवों में संगठन के स्तर, पादप और जंतु ऊतक, विभज्योतक और उनके प्रकार, स्थायी ऊतक की संरचना और कार्य, और संधियों के प्रकार। अंतर पूछे जा सकते हैं: विभज्योतक और स्थायी, सरल और जटिल, मृदूतक-श्लेषोतक-दृढ़ोतक, जाइलम और फ्लोएम, और रेखित, चिकनी व हृदय पेशियाँ।

1. ऊतक क्या है, और पौधों व जंतुओं के ऊतक अलग क्यों हैं

ऊतक उन कोशिकाओं का समूह है जिनकी संरचना मिलती-जुलती है और जो मिलकर एक खास काम करती हैं (पेज 28)। बहुकोशिकीय जीव में संगठन की सीढ़ी यह है: कोशिका → ऊतक → अंग → अंग तंत्र → जीव। अलग-अलग ऊतकों के अलग-अलग काम संभालने को श्रम विभाजन कहते हैं, और इससे शरीर अधिक कुशलता से काम करता है (पेज 28)। एककोशिकीय जीवों (उदाहरण: अमीबा) में अकेली कोशिका ही जीवन के सब काम निपटाती है।

पौधों और जंतुओं के ऊतकों में अंतर उनके जीवन के ढंग से आता है (पेज 29):

बातपौधेजंतु
चलना-फिरनाज़्यादातर एक जगह स्थिर; सीधा खड़ा रहने को सहारा चाहिएज़्यादातर चल-फिर सकते हैं (स्पंज जैसे कुछ नहीं)
कोशिका भित्तिकठोर भित्ति दृढ़ता देती हैभित्ति नहीं, इसलिए कोशिकाएँ आकार बदल पाती हैं
पोषणसूर्य की ऊर्जा से प्रकाश-संश्लेषण करके भोजन बनाने वाले ऊतकअलग-अलग स्रोतों से मिले भोजन को पचाने वाले ऊतक
वृद्धिवृद्धि वाले ऊतक कुछ खास जगहों पर, और जीवन भरवृद्धि का ढंग अलग

2. पौधों में वृद्धि करने वाले ऊतक: विभज्योतक

जिन कोशिकाओं में लगातार विभाजन होता रहता है, उनसे बना ऊतक विभज्योतक कहलाता है (पेज 29)। जगह के हिसाब से इसके तीन प्रकार हैं:

विभज्योतककहाँ होता हैक्या करता है
शीर्षस्थ (apical)जड़ और प्ररोह (तने) के सिरों परलंबाई बढ़ाता है (पेज 30)
पार्श्व (lateral)तने में एक वलय के रूप में, परिधि के साथमोटाई (व्यास या परिधि) बढ़ाता है (पेज 31)
अंतर्वेशी (intercalary)पर्वसंधि से ज़रा ऊपर, यानी पर्व के निचले सिरे परकटने या चरे जाने के बाद फिर से बढ़ने में मदद करता है, जैसे घासों में (पेज 31)

याद रखने लायक शब्द: तने पर जिस बिंदु से पत्ती या शाखा निकलती है, उसे पर्वसंधि कहते हैं, और दो पर्वसंधियों के बीच का हिस्सा पर्व है (पेज 31)।

वार्षिक वृद्धि वलय: पेड़ के कटे तने पर दिखने वाले छल्ले। हर साल लगभग एक वलय बनता है, इसलिए इन्हें गिनकर पेड़ की उम्र का अनुमान लगता है। चौड़ा वलय अच्छे वर्ष का और संकरा वलय कठिन वर्ष का संकेत देता है (पेज 30-31)।

विभज्योतकी कोशिकाओं की पहचान: छोटी कोशिकाएँ, पतली भित्ति, बड़ा और साफ़ दिखने वाला केंद्रक, घना कोशिकाद्रव्य, आमतौर पर रसधानी नहीं, और कोशिकाओं के बीच लगभग कोई खाली जगह नहीं। इसी बनावट से वे तेज़ी से और बार-बार विभाजित हो पाती हैं (पेज 31)।

विभेदन: नई बनी कुछ कोशिकाएँ विभाजन की क्षमता खो देती हैं और किसी एक काम (सहारा, परिवहन, भंडारण) के लिए विशेष बन जाती हैं। यह प्रक्रिया विभेदन है, और इससे बने ऊतक स्थायी ऊतक कहलाते हैं (पेज 31)।

3. स्थायी ऊतक: सुरक्षा, सहारा और परिवहन

स्थायी ऊतक सरल (एक ही प्रकार की कोशिकाएँ) या जटिल (एक से अधिक प्रकार की कोशिकाएँ) हो सकते हैं (पेज 32)।

(क) सुरक्षा: बाह्यत्वचा। पौधे की सबसे बाहरी परत, सटी हुई चपटी कोशिकाओं की एक परत (पेज 32)। इस पर क्यूटिन की मोमी परत, उपत्वचा, होती है; बहुत सूखी जगह के पौधों में यह मोटी होती है ताकि पानी कम उड़े। जड़ में बाह्यत्वचा से मूलरोम निकलते हैं जो पानी और खनिज सोखने की सतह बढ़ाते हैं। पत्ती की बाह्यत्वचा में रंध्र होते हैं, जिनसे गैसों का आदान-प्रदान और वाष्पोत्सर्जन होता है; वाष्पोत्सर्जन जाइलम में पानी को ऊपर खींचने में भी मदद करता है (पेज 32)। पुराने तनों में काग एधा से काग बनता है, जिसकी मृत कोशिकाएँ पानी और गैसों को आर-पार नहीं जाने देतीं; इसी से छाल बनती है (पेज 34)।

(ख) सहारा: सरल स्थायी ऊतक (पेज 32-33)

ऊतककोशिकाएँभित्तिमुख्य काम
मृदूतक (parenchyma)सजीव, ढीली, बीच में खाली जगहपतलीभोजन भंडार; हरे भागों में प्रकाश-संश्लेषण; जलीय पौधों में हवा भरी जगह से तैरना
श्लेषोतक (collenchyma)सजीवकोनों पर असमान रूप से मोटी (पेक्टिन)सहारे के साथ लचीलापन: तना और प्रतान बिना टूटे मुड़ते हैं
दृढ़ोतक (sclerenchyma)ज़्यादातर मृतलिग्निन जमने से बहुत मोटीकठोरता और मज़बूती: तने, पत्तियों की शिराएँ, बीजों और गिरियों के कठोर आवरण

(ग) परिवहन: जटिल स्थायी ऊतक (पेज 33)

जाइलमफ्लोएम
क्या ले जाता हैपानी और खनिज, जड़ से ऊपरपत्तियों में बना भोजन, बाकी भागों तक
घटकवाहिनिकाएँ, वाहिकाएँ, जाइलम मृदूतक, जाइलम तंतुचालनी नलिकाएँ, सहचर कोशिकाएँ, फ्लोएम मृदूतक, फ्लोएम तंतु
सजीव या मृतकेवल जाइलम मृदूतक सजीव; बाकी मुख्यतः दृढ़ोतकीअधिकांश सजीव
खास बातपौधे को मज़बूती भी देता हैसहचर कोशिकाएँ चालनी नलिकाओं में शर्करा के चढ़ने-उतरने पर नज़र रखती हैं

ऊतक तंत्र: पौधे में ये ऊतक तीन बड़े समूहों में मिलकर काम करते हैं (पेज 33-34): त्वचीय ऊतक तंत्र (बाहरी आवरण), भरण ऊतक तंत्र (मृदूतक, श्लेषोतक और दृढ़ोतक से बना मुख्य भाग) और संवहन ऊतक तंत्र (जाइलम और फ्लोएम)।

4. जंतु ऊतक: चार मुख्य प्रकार

(क) उपकला ऊतक शरीर का बाहरी आवरण (त्वचा) बनाता है और मुँह, फेफड़ों, रक्त वाहिकाओं और आँत जैसे अंगों के भीतर अस्तर बनाता है। इसकी कोशिकाएँ पास-पास सटी होती हैं, जिससे कीटाणु कम घुसते हैं और पानी कम निकलता है (पेज 34-35)। बनावट काम के हिसाब से बदलती है (तालिका 3.2, पेज 35):

कामबनावटउदाहरण की जगह
तेज़ विसरण (आदान-प्रदान)पतली, चपटी कोशिकाओं की एक परतरक्त वाहिकाएँ, फेफड़े
सुरक्षाकई परतें, बाहरी कोशिकाएँ चपटी और सटीत्वचा, मुँह, ग्रासनली
स्रवणघनाकार या स्तंभाकार विशेष कोशिकाएँलार ग्रंथियाँ, स्वेद ग्रंथियाँ, आमाशय का अस्तर
संवेदनापक्ष्माभ वाली ग्राही कोशिकाएँनासाछिद्र, स्वाद-कलिकाएँ, आंतर कर्ण
अवशोषणलंबी, खंभे जैसी कोशिकाओं की एक परतछोटी आँत का अस्तर

(ख) संयोजी ऊतक दूसरे ऊतकों को जोड़ता और सहारा देता है। रक्त और अस्थि दोनों संयोजी ऊतक हैं; अंतर उनकी आधात्री (matrix) में है: रक्त में यह तरल, अस्थि में कठोर (पेज 35)।

(ग) पेशी ऊतक (पेज 37-38)

पेशीकोशिकाएँकहाँनियंत्रण
कंकाल पेशीलंबे, बेलनाकार, अशाखित तंतु, कई केंद्रक, धारियाँ (रेखित)कंकाल से जुड़ीऐच्छिक: दौड़ना, लिखना
चिकनी पेशीतर्कुरूप, एक केंद्रक, धारियाँ नहींआमाशय, आँतअनैच्छिक: धीमी, लगातार गति
हृदय पेशीबेलनाकार, शाखित, एक केंद्रक, हल्की धारियाँकेवल हृदयअनैच्छिक: जीवन भर बिना थके लयबद्ध धड़कन

(घ) तंत्रिका ऊतक शरीर का नियंत्रण और समन्वय करता है। इसकी कोशिका न्यूरॉन है, जिसके तीन मुख्य भाग हैं: केंद्रक वाला कोशिका-काय, संकेत लेने वाली द्रुमिकाएँ, और संदेश आगे ले जाने वाला लंबा तंत्रिकाक्ष, जो एक्सॉन टर्मिनल पर खत्म होता है (पेज 38)। पेशियाँ अपने-आप काम नहीं करतीं; उन्हें तंत्रिका ऊतक से निर्देश मिलते हैं।

5. पेशी-कंकाल तंत्र, संधियाँ और कंकाल

पेशी-कंकाल तंत्र पेशियों, अस्थियों, कंडराओं, स्नायुओं, उपास्थियों और संधियों से मिलकर बनता है और तंत्रिका तंत्र के नियंत्रण में काम करता है (पेज 38)। पेशी सिकुड़ती है, कंडरा वह खिंचाव अस्थि तक पहुँचाती है, और संधि पर गति होती है। एक वयस्क के शरीर के भार का लगभग 12 से 15 प्रतिशत कंकाल होता है (पेज 38)।

संधि दो या अधिक अस्थियों के मिलने की जगह है (पेज 39)। प्रकार (पेज 40):

संधिउदाहरणगति
कंदुक-खल्लिकाकंधाआगे, पीछे, बगल में और गोल घुमाव
कोरकोहनी, घुटनादरवाज़े के कब्ज़े की तरह, एक ही दिशा में
धुराग्रखोपड़ी और मेरुदंड के बीचसिर को दाएँ-बाएँ घुमाना
अचलखोपड़ी की अस्थियों के बीचकोई गति नहीं; मस्तिष्क सुरक्षित रहता है

कंकाल तंत्र (पेज 41): खोपड़ी, कशेरुक दंड और पसली पिंजर। मेरुदंड छोटी अस्थियों, कशेरुकाओं, की कड़ी है, और दो कशेरुकाओं के बीच की उपास्थि चक्रिका गद्दी का काम करके झुकने-मुड़ने देती है। पसलियों के 12 जोड़े पसली पिंजर बनाते हैं, जो हृदय और फेफड़ों की रक्षा करता है। पसलियाँ पीछे मेरुदंड से और आगे उरोस्थि से लचीली उपास्थि द्वारा जुड़ी हैं, इसलिए साँस लेते समय पिंजर फैल और सिकुड़ पाता है।

6. पूर्णशक्तता और ऊतक संवर्धन

1958 में एफ.सी. स्टीवर्ड ने गाजर के फ्लोएम की कोशिकाओं को पोषक माध्यम में उगाकर उनसे पूरा पौधा तैयार किया (पेज 42)। कुछ परिपक्व पादप कोशिकाओं की फिर से विभाजित होकर पूरा पौधा बनाने की यह क्षमता पूर्णशक्तता कहलाती है। किरीट पिटिका (crown gall) रोग के जीवाणु एग्रोबैक्टीरियम के अध्ययन से वैज्ञानिकों ने पौधों में उपयोगी जीन डालने का तरीका सीखा (पेज 43)।

7. हमारे 8 प्रश्न, उत्तर सहित

ये प्रश्न हमारे अपने हैं; संख्याएँ और वस्तुएँ हमने चुनी हैं। हर उत्तर के नीचे वह पेज दिया है जहाँ से विचार आता है।

प्रश्न 1. (a) एक अमरूद का पौधा 30 दिनों में 40 cm से 55 cm लंबा हो गया। कौन-सा विभज्योतक यह लंबाई बढ़ाता है, और औसत वृद्धि प्रतिदिन कितनी हुई? (b) एक पीपल के तने की परिधि हर साल थोड़ी बढ़ती है। इसके लिए कौन-सा विभज्योतक ज़िम्मेदार है? (c) तुलसी के एक पौधे का ऊपरी सिरा तोड़ दिया गया। अब उसकी लंबाई और शाखाओं का क्या होगा?

उत्तर: (a) शीर्षस्थ विभज्योतक, 0.5 cm प्रतिदिन; (b) पार्श्व विभज्योतक; (c) लंबाई बढ़ना रुकेगा, पर्वसंधियों से नई शाखाएँ निकलेंगी।

(पेज 30-31।)

प्रश्न 2. शीशम के एक कटे लट्ठे में 32 वार्षिक वलय गिने गए और उसका व्यास 48 cm है। (a) पेड़ की उम्र लगभग कितनी थी? (b) उसकी त्रिज्या हर साल औसतन कितनी बढ़ी? (c) अगर यही औसत चलता और पेड़ 20 साल और खड़ा रहता, तो उसका व्यास लगभग कितना होता?

उत्तर: (a) लगभग 32 वर्ष; (b) 0.75 cm प्रति वर्ष; (c) लगभग 78 cm।

(पेज 30-31।)

प्रश्न 3. तीन पादप भागों की कोशिकाएँ सूक्ष्मदर्शी में देखी गईं: (A) कमल के डंठल में सजीव, पतली भित्ति वाली कोशिकाएँ, जिनके बीच बड़ी-बड़ी हवा भरी जगहें हैं; (B) खीरे की बेल के प्रतान में सजीव कोशिकाएँ, जिनकी भित्ति केवल कोनों पर मोटी है; (C) बादाम के कठोर खोल में मोटी भित्ति वाली कोशिकाएँ, जिनमें से ज़्यादातर मृत हैं। हर एक ऊतक का नाम और उसका काम बताइए।

उत्तर: A मृदूतक, B श्लेषोतक, C दृढ़ोतक।

(पेज 32-33, चित्र 3.8।)

प्रश्न 4. इन आठ प्रकार की कोशिकाओं को जाइलम और फ्लोएम में बाँटिए: वाहिका, चालनी नलिका, जाइलम मृदूतक, सहचर कोशिका, वाहिनिका, फ्लोएम मृदूतक, जाइलम तंतु, फ्लोएम तंतु। फिर बताइए: (a) जाइलम का कौन-सा घटक सजीव है? (b) चालनी नलिका की कोशिकाओं के काम का नियमन कौन करता है? (c) आलू के कंद में जमा स्टार्च पत्तियों में बने भोजन से आता है। यह भोजन पत्तियों से कंद तक किन कोशिकाओं से होकर पहुँचा?

उत्तर: जाइलम: वाहिका, वाहिनिका, जाइलम मृदूतक, जाइलम तंतु। फ्लोएम: चालनी नलिका, सहचर कोशिका, फ्लोएम मृदूतक, फ्लोएम तंतु। (a) जाइलम मृदूतक; (b) सहचर कोशिकाएँ; (c) फ्लोएम की चालनी नलिकाएँ।

(पेज 33, चित्र 3.9।)

प्रश्न 5. शरीर की इन चार जगहों के उपकला ऊतक की बनावट और मुख्य काम लिखिए: (a) फेफड़ों के भीतर का अस्तर; (b) ग्रासनली का अस्तर; (c) छोटी आँत का अस्तर; (d) स्वेद ग्रंथि।

उत्तर:

(तालिका 3.2, पेज 35।)

प्रश्न 6. एक वयस्क के शरीर में लगभग 5 लीटर रक्त है। (a) उसमें प्लाज्मा और निर्मित तत्व कितने-कितने लीटर होंगे? (b) लाल रक्त कोशिकाएँ लगभग 4 महीने जीती हैं। एक साल में लाल रक्त कोशिकाओं का पूरा समूह लगभग कितनी बार बदल जाता है? (c) रक्त का रंग लाल किस पदार्थ से है, और वह किन कोशिकाओं में होता है?

उत्तर: (a) प्लाज्मा 2.75 लीटर, निर्मित तत्व 2.25 लीटर; (b) लगभग 3 बार; (c) हीमोग्लोबिन, लाल रक्त कोशिकाओं में।

(पेज 36, चित्र 3.12।)

प्रश्न 7. एक विद्यार्थी को तीन पेशी-नमूनों का विवरण मिला: (P) कोशिकाएँ तर्कुरूप, हर एक में एक केंद्रक, कोई धारी नहीं; (Q) लंबे बेलनाकार तंतु, शाखाएँ नहीं, कई केंद्रक, साफ़ धारियाँ; (R) बेलनाकार और शाखित तंतु, एक केंद्रक, हल्की धारियाँ। हर नमूने का नाम, शरीर में उसकी एक जगह, और यह बताइए कि वह ऐच्छिक है या अनैच्छिक।

उत्तर: P चिकनी पेशी, Q कंकाल पेशी, R हृदय पेशी।

(पेज 37-38, चित्र 3.13।)

प्रश्न 8. (a) पसली पिंजर में कुल कितनी पसलियाँ होती हैं? (b) पसलियाँ उरोस्थि से कठोर अस्थि की जगह लचीली उपास्थि से जुड़ी हैं। इससे साँस लेने में क्या मदद मिलती है? (c) दो कशेरुकाओं के बीच की उपास्थि चक्रिका के दो काम लिखिए।

उत्तर: (a) 24; (b) पिंजर फैल-सिकुड़ पाता है; (c) गद्दी और लचीलापन।

(पेज 41।)

8. इस अध्याय पर AI का जवाब कैसे परखें

अंग्रेज़ी में इसी अध्याय के प्रश्न: Class 9 Tissues in Action, questions with answers। AI से पढ़ाई पर और: AI से पढ़ाई कैसे करें, नकल किए बिना।

कक्षा 9 विज्ञान का अभ्यास

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स्रोत

सभी 5 नवंबर 2026 को जाँचे गए।

अध्याय की परिभाषाएँ, शब्द और पेज-संख्याएँ ऊपर के दस्तावेज़ों से हैं। इस पेज की सारी व्याख्याएँ, उदाहरण, प्रश्न और उत्तर हमारे अपने हैं; हर संख्या स्क्रिप्ट से जाँची गई है।

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