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कक्षा 9 विज्ञान अध्याय 3 क्रियाशील ऊतक: Hindi medium नोट्स और 8 प्रश्न-उत्तर
NCERT की कक्षा 9 की नई विज्ञान पाठ्यपुस्तक अन्वेषण का तीसरा अध्याय "क्रियाशील ऊतक" है, पेज 28 से 47 तक। पिछले अध्याय में हमने एक कोशिका को समझा था; इस अध्याय में देखते हैं कि एक जैसी कोशिकाएँ मिलकर ऊतक कैसे बनाती हैं, पौधे लंबाई और मोटाई में कैसे बढ़ते हैं, पौधों में पानी और भोजन कैसे पहुँचता है, और हमारे शरीर के ऊतक, पेशियाँ, अस्थियाँ और संधियाँ मिलकर गति कैसे करते हैं। यह गाइड दो काम करती है:
- अध्याय के मुख्य विचारों को छोटे नोट्स में समझाती है;
- अंत में हमारे अपने 8 प्रश्न देती है, हल और उत्तर के साथ।
पाठ्यपुस्तक साथ में खुली रखें। यहाँ की व्याख्याएँ, उदाहरण और प्रश्न हमारे अपने हैं; अंतिम बात पाठ्यपुस्तक की ही मानें। अंग्रेज़ी में यही अध्याय: Class 9 Tissues in Action, questions with answers।
यह गाइड सीधे हिंदी में लिखी गई है, पर किसी हिंदी-माध्यम शिक्षक ने अभी इसकी भाषा नहीं जाँची है (native review pending)।
परीक्षा में यह अध्याय
CBSE ने 2026-27 के लिए कक्षा 9 विज्ञान की वार्षिक परीक्षा 80 अंकों की रखी है, और 20 अंक आंतरिक मूल्यांकन के हैं। इकाई I, "World of Living" (सजीवों का संसार), के 27 अंक हैं; इसमें अध्याय 2, 3, 11 और 12 आते हैं (CBSE पाठ्यक्रम, पेज 4)। CBSE अध्याय-वार अंक नहीं देता।
पाठ्यक्रम "Tissues" के लिए 13 कालांश रखता है (पेज 5)। उसमें ये बातें हैं: जीवों में संगठन के स्तर, पादप और जंतु ऊतक, विभज्योतक और उनके प्रकार, स्थायी ऊतक की संरचना और कार्य, और संधियों के प्रकार। अंतर पूछे जा सकते हैं: विभज्योतक और स्थायी, सरल और जटिल, मृदूतक-श्लेषोतक-दृढ़ोतक, जाइलम और फ्लोएम, और रेखित, चिकनी व हृदय पेशियाँ।
1. ऊतक क्या है, और पौधों व जंतुओं के ऊतक अलग क्यों हैं
ऊतक उन कोशिकाओं का समूह है जिनकी संरचना मिलती-जुलती है और जो मिलकर एक खास काम करती हैं (पेज 28)। बहुकोशिकीय जीव में संगठन की सीढ़ी यह है: कोशिका → ऊतक → अंग → अंग तंत्र → जीव। अलग-अलग ऊतकों के अलग-अलग काम संभालने को श्रम विभाजन कहते हैं, और इससे शरीर अधिक कुशलता से काम करता है (पेज 28)। एककोशिकीय जीवों (उदाहरण: अमीबा) में अकेली कोशिका ही जीवन के सब काम निपटाती है।
पौधों और जंतुओं के ऊतकों में अंतर उनके जीवन के ढंग से आता है (पेज 29):
| बात | पौधे | जंतु |
|---|---|---|
| चलना-फिरना | ज़्यादातर एक जगह स्थिर; सीधा खड़ा रहने को सहारा चाहिए | ज़्यादातर चल-फिर सकते हैं (स्पंज जैसे कुछ नहीं) |
| कोशिका भित्ति | कठोर भित्ति दृढ़ता देती है | भित्ति नहीं, इसलिए कोशिकाएँ आकार बदल पाती हैं |
| पोषण | सूर्य की ऊर्जा से प्रकाश-संश्लेषण करके भोजन बनाने वाले ऊतक | अलग-अलग स्रोतों से मिले भोजन को पचाने वाले ऊतक |
| वृद्धि | वृद्धि वाले ऊतक कुछ खास जगहों पर, और जीवन भर | वृद्धि का ढंग अलग |
2. पौधों में वृद्धि करने वाले ऊतक: विभज्योतक
जिन कोशिकाओं में लगातार विभाजन होता रहता है, उनसे बना ऊतक विभज्योतक कहलाता है (पेज 29)। जगह के हिसाब से इसके तीन प्रकार हैं:
| विभज्योतक | कहाँ होता है | क्या करता है |
|---|---|---|
| शीर्षस्थ (apical) | जड़ और प्ररोह (तने) के सिरों पर | लंबाई बढ़ाता है (पेज 30) |
| पार्श्व (lateral) | तने में एक वलय के रूप में, परिधि के साथ | मोटाई (व्यास या परिधि) बढ़ाता है (पेज 31) |
| अंतर्वेशी (intercalary) | पर्वसंधि से ज़रा ऊपर, यानी पर्व के निचले सिरे पर | कटने या चरे जाने के बाद फिर से बढ़ने में मदद करता है, जैसे घासों में (पेज 31) |
याद रखने लायक शब्द: तने पर जिस बिंदु से पत्ती या शाखा निकलती है, उसे पर्वसंधि कहते हैं, और दो पर्वसंधियों के बीच का हिस्सा पर्व है (पेज 31)।
वार्षिक वृद्धि वलय: पेड़ के कटे तने पर दिखने वाले छल्ले। हर साल लगभग एक वलय बनता है, इसलिए इन्हें गिनकर पेड़ की उम्र का अनुमान लगता है। चौड़ा वलय अच्छे वर्ष का और संकरा वलय कठिन वर्ष का संकेत देता है (पेज 30-31)।
विभज्योतकी कोशिकाओं की पहचान: छोटी कोशिकाएँ, पतली भित्ति, बड़ा और साफ़ दिखने वाला केंद्रक, घना कोशिकाद्रव्य, आमतौर पर रसधानी नहीं, और कोशिकाओं के बीच लगभग कोई खाली जगह नहीं। इसी बनावट से वे तेज़ी से और बार-बार विभाजित हो पाती हैं (पेज 31)।
विभेदन: नई बनी कुछ कोशिकाएँ विभाजन की क्षमता खो देती हैं और किसी एक काम (सहारा, परिवहन, भंडारण) के लिए विशेष बन जाती हैं। यह प्रक्रिया विभेदन है, और इससे बने ऊतक स्थायी ऊतक कहलाते हैं (पेज 31)।
3. स्थायी ऊतक: सुरक्षा, सहारा और परिवहन
स्थायी ऊतक सरल (एक ही प्रकार की कोशिकाएँ) या जटिल (एक से अधिक प्रकार की कोशिकाएँ) हो सकते हैं (पेज 32)।
(क) सुरक्षा: बाह्यत्वचा। पौधे की सबसे बाहरी परत, सटी हुई चपटी कोशिकाओं की एक परत (पेज 32)। इस पर क्यूटिन की मोमी परत, उपत्वचा, होती है; बहुत सूखी जगह के पौधों में यह मोटी होती है ताकि पानी कम उड़े। जड़ में बाह्यत्वचा से मूलरोम निकलते हैं जो पानी और खनिज सोखने की सतह बढ़ाते हैं। पत्ती की बाह्यत्वचा में रंध्र होते हैं, जिनसे गैसों का आदान-प्रदान और वाष्पोत्सर्जन होता है; वाष्पोत्सर्जन जाइलम में पानी को ऊपर खींचने में भी मदद करता है (पेज 32)। पुराने तनों में काग एधा से काग बनता है, जिसकी मृत कोशिकाएँ पानी और गैसों को आर-पार नहीं जाने देतीं; इसी से छाल बनती है (पेज 34)।
(ख) सहारा: सरल स्थायी ऊतक (पेज 32-33)
| ऊतक | कोशिकाएँ | भित्ति | मुख्य काम |
|---|---|---|---|
| मृदूतक (parenchyma) | सजीव, ढीली, बीच में खाली जगह | पतली | भोजन भंडार; हरे भागों में प्रकाश-संश्लेषण; जलीय पौधों में हवा भरी जगह से तैरना |
| श्लेषोतक (collenchyma) | सजीव | कोनों पर असमान रूप से मोटी (पेक्टिन) | सहारे के साथ लचीलापन: तना और प्रतान बिना टूटे मुड़ते हैं |
| दृढ़ोतक (sclerenchyma) | ज़्यादातर मृत | लिग्निन जमने से बहुत मोटी | कठोरता और मज़बूती: तने, पत्तियों की शिराएँ, बीजों और गिरियों के कठोर आवरण |
(ग) परिवहन: जटिल स्थायी ऊतक (पेज 33)
| जाइलम | फ्लोएम | |
|---|---|---|
| क्या ले जाता है | पानी और खनिज, जड़ से ऊपर | पत्तियों में बना भोजन, बाकी भागों तक |
| घटक | वाहिनिकाएँ, वाहिकाएँ, जाइलम मृदूतक, जाइलम तंतु | चालनी नलिकाएँ, सहचर कोशिकाएँ, फ्लोएम मृदूतक, फ्लोएम तंतु |
| सजीव या मृत | केवल जाइलम मृदूतक सजीव; बाकी मुख्यतः दृढ़ोतकी | अधिकांश सजीव |
| खास बात | पौधे को मज़बूती भी देता है | सहचर कोशिकाएँ चालनी नलिकाओं में शर्करा के चढ़ने-उतरने पर नज़र रखती हैं |
ऊतक तंत्र: पौधे में ये ऊतक तीन बड़े समूहों में मिलकर काम करते हैं (पेज 33-34): त्वचीय ऊतक तंत्र (बाहरी आवरण), भरण ऊतक तंत्र (मृदूतक, श्लेषोतक और दृढ़ोतक से बना मुख्य भाग) और संवहन ऊतक तंत्र (जाइलम और फ्लोएम)।
4. जंतु ऊतक: चार मुख्य प्रकार
(क) उपकला ऊतक शरीर का बाहरी आवरण (त्वचा) बनाता है और मुँह, फेफड़ों, रक्त वाहिकाओं और आँत जैसे अंगों के भीतर अस्तर बनाता है। इसकी कोशिकाएँ पास-पास सटी होती हैं, जिससे कीटाणु कम घुसते हैं और पानी कम निकलता है (पेज 34-35)। बनावट काम के हिसाब से बदलती है (तालिका 3.2, पेज 35):
| काम | बनावट | उदाहरण की जगह |
|---|---|---|
| तेज़ विसरण (आदान-प्रदान) | पतली, चपटी कोशिकाओं की एक परत | रक्त वाहिकाएँ, फेफड़े |
| सुरक्षा | कई परतें, बाहरी कोशिकाएँ चपटी और सटी | त्वचा, मुँह, ग्रासनली |
| स्रवण | घनाकार या स्तंभाकार विशेष कोशिकाएँ | लार ग्रंथियाँ, स्वेद ग्रंथियाँ, आमाशय का अस्तर |
| संवेदना | पक्ष्माभ वाली ग्राही कोशिकाएँ | नासाछिद्र, स्वाद-कलिकाएँ, आंतर कर्ण |
| अवशोषण | लंबी, खंभे जैसी कोशिकाओं की एक परत | छोटी आँत का अस्तर |
(ख) संयोजी ऊतक दूसरे ऊतकों को जोड़ता और सहारा देता है। रक्त और अस्थि दोनों संयोजी ऊतक हैं; अंतर उनकी आधात्री (matrix) में है: रक्त में यह तरल, अस्थि में कठोर (पेज 35)।
- रक्त: लगभग 55 प्रतिशत आयतन प्लाज्मा और 45 प्रतिशत निर्मित तत्व (लाल रक्त कोशिकाएँ, श्वेत रक्त कोशिकाएँ, बिंबाणु)। लाल रंग हीमोग्लोबिन से आता है, जो लाल रक्त कोशिकाओं में लोहे वाला प्रोटीन है; ये कोशिकाएँ लगभग 4 महीने जीती हैं। बिंबाणु थक्का बनाने में और श्वेत रक्त कोशिकाएँ संक्रमण से लड़ने में काम आती हैं (पेज 36)।
- अस्थि: कैल्सियम और फॉस्फोरस के यौगिकों वाली कठोर आधात्री; मज़बूती, सहारा और सुरक्षा (पेज 37)।
- उपास्थि: नरम, जेली जैसी आधात्री; लचीलापन देती है और अस्थियों के सिरों पर गद्दी का काम करती है (पेज 37)।
- कंडरा पेशी को अस्थि से जोड़ती है; स्नायु अस्थि को अस्थि से जोड़ता है और ज़रूरत से ज़्यादा गति रोकता है (पेज 37)।
(ग) पेशी ऊतक (पेज 37-38)
| पेशी | कोशिकाएँ | कहाँ | नियंत्रण |
|---|---|---|---|
| कंकाल पेशी | लंबे, बेलनाकार, अशाखित तंतु, कई केंद्रक, धारियाँ (रेखित) | कंकाल से जुड़ी | ऐच्छिक: दौड़ना, लिखना |
| चिकनी पेशी | तर्कुरूप, एक केंद्रक, धारियाँ नहीं | आमाशय, आँत | अनैच्छिक: धीमी, लगातार गति |
| हृदय पेशी | बेलनाकार, शाखित, एक केंद्रक, हल्की धारियाँ | केवल हृदय | अनैच्छिक: जीवन भर बिना थके लयबद्ध धड़कन |
(घ) तंत्रिका ऊतक शरीर का नियंत्रण और समन्वय करता है। इसकी कोशिका न्यूरॉन है, जिसके तीन मुख्य भाग हैं: केंद्रक वाला कोशिका-काय, संकेत लेने वाली द्रुमिकाएँ, और संदेश आगे ले जाने वाला लंबा तंत्रिकाक्ष, जो एक्सॉन टर्मिनल पर खत्म होता है (पेज 38)। पेशियाँ अपने-आप काम नहीं करतीं; उन्हें तंत्रिका ऊतक से निर्देश मिलते हैं।
5. पेशी-कंकाल तंत्र, संधियाँ और कंकाल
पेशी-कंकाल तंत्र पेशियों, अस्थियों, कंडराओं, स्नायुओं, उपास्थियों और संधियों से मिलकर बनता है और तंत्रिका तंत्र के नियंत्रण में काम करता है (पेज 38)। पेशी सिकुड़ती है, कंडरा वह खिंचाव अस्थि तक पहुँचाती है, और संधि पर गति होती है। एक वयस्क के शरीर के भार का लगभग 12 से 15 प्रतिशत कंकाल होता है (पेज 38)।
संधि दो या अधिक अस्थियों के मिलने की जगह है (पेज 39)। प्रकार (पेज 40):
| संधि | उदाहरण | गति |
|---|---|---|
| कंदुक-खल्लिका | कंधा | आगे, पीछे, बगल में और गोल घुमाव |
| कोर | कोहनी, घुटना | दरवाज़े के कब्ज़े की तरह, एक ही दिशा में |
| धुराग्र | खोपड़ी और मेरुदंड के बीच | सिर को दाएँ-बाएँ घुमाना |
| अचल | खोपड़ी की अस्थियों के बीच | कोई गति नहीं; मस्तिष्क सुरक्षित रहता है |
कंकाल तंत्र (पेज 41): खोपड़ी, कशेरुक दंड और पसली पिंजर। मेरुदंड छोटी अस्थियों, कशेरुकाओं, की कड़ी है, और दो कशेरुकाओं के बीच की उपास्थि चक्रिका गद्दी का काम करके झुकने-मुड़ने देती है। पसलियों के 12 जोड़े पसली पिंजर बनाते हैं, जो हृदय और फेफड़ों की रक्षा करता है। पसलियाँ पीछे मेरुदंड से और आगे उरोस्थि से लचीली उपास्थि द्वारा जुड़ी हैं, इसलिए साँस लेते समय पिंजर फैल और सिकुड़ पाता है।
6. पूर्णशक्तता और ऊतक संवर्धन
1958 में एफ.सी. स्टीवर्ड ने गाजर के फ्लोएम की कोशिकाओं को पोषक माध्यम में उगाकर उनसे पूरा पौधा तैयार किया (पेज 42)। कुछ परिपक्व पादप कोशिकाओं की फिर से विभाजित होकर पूरा पौधा बनाने की यह क्षमता पूर्णशक्तता कहलाती है। किरीट पिटिका (crown gall) रोग के जीवाणु एग्रोबैक्टीरियम के अध्ययन से वैज्ञानिकों ने पौधों में उपयोगी जीन डालने का तरीका सीखा (पेज 43)।
7. हमारे 8 प्रश्न, उत्तर सहित
ये प्रश्न हमारे अपने हैं; संख्याएँ और वस्तुएँ हमने चुनी हैं। हर उत्तर के नीचे वह पेज दिया है जहाँ से विचार आता है।
प्रश्न 1. (a) एक अमरूद का पौधा 30 दिनों में 40 cm से 55 cm लंबा हो गया। कौन-सा विभज्योतक यह लंबाई बढ़ाता है, और औसत वृद्धि प्रतिदिन कितनी हुई? (b) एक पीपल के तने की परिधि हर साल थोड़ी बढ़ती है। इसके लिए कौन-सा विभज्योतक ज़िम्मेदार है? (c) तुलसी के एक पौधे का ऊपरी सिरा तोड़ दिया गया। अब उसकी लंबाई और शाखाओं का क्या होगा?
उत्तर: (a) शीर्षस्थ विभज्योतक, 0.5 cm प्रतिदिन; (b) पार्श्व विभज्योतक; (c) लंबाई बढ़ना रुकेगा, पर्वसंधियों से नई शाखाएँ निकलेंगी।
- (a) तने के सिरे पर शीर्षस्थ विभज्योतक है। वृद्धि = 55 − 40 = 15 cm; 15 ÷ 30 = 0.5 cm प्रतिदिन।
- (b) तने में वलय की तरह फैला पार्श्व विभज्योतक भीतर और बाहर नई कोशिकाएँ बनाकर व्यास बढ़ाता है।
- (c) सिरा टूटने से शीर्षस्थ विभज्योतक हट गया, इसलिए वह तना लंबाई में नहीं बढ़ेगा। पर तने की पर्वसंधियों से नई शाखाएँ निकलेंगी और पौधा घना हो जाएगा।
(पेज 30-31।)
प्रश्न 2. शीशम के एक कटे लट्ठे में 32 वार्षिक वलय गिने गए और उसका व्यास 48 cm है। (a) पेड़ की उम्र लगभग कितनी थी? (b) उसकी त्रिज्या हर साल औसतन कितनी बढ़ी? (c) अगर यही औसत चलता और पेड़ 20 साल और खड़ा रहता, तो उसका व्यास लगभग कितना होता?
उत्तर: (a) लगभग 32 वर्ष; (b) 0.75 cm प्रति वर्ष; (c) लगभग 78 cm।
- (a) लगभग हर साल एक वलय बनता है, इसलिए उम्र लगभग 32 वर्ष।
- (b) त्रिज्या = 48 ÷ 2 = 24 cm; 24 ÷ 32 = 0.75 cm प्रति वर्ष।
- (c) 20 साल में त्रिज्या 20 × 0.75 = 15 cm बढ़ती, यानी व्यास 30 cm। नया व्यास 48 + 30 = 78 cm। (असली पेड़ में हर साल की वृद्धि मौसम के साथ बदलती है, इसलिए यह केवल अनुमान है।)
(पेज 30-31।)
प्रश्न 3. तीन पादप भागों की कोशिकाएँ सूक्ष्मदर्शी में देखी गईं: (A) कमल के डंठल में सजीव, पतली भित्ति वाली कोशिकाएँ, जिनके बीच बड़ी-बड़ी हवा भरी जगहें हैं; (B) खीरे की बेल के प्रतान में सजीव कोशिकाएँ, जिनकी भित्ति केवल कोनों पर मोटी है; (C) बादाम के कठोर खोल में मोटी भित्ति वाली कोशिकाएँ, जिनमें से ज़्यादातर मृत हैं। हर एक ऊतक का नाम और उसका काम बताइए।
उत्तर: A मृदूतक, B श्लेषोतक, C दृढ़ोतक।
- A: पतली भित्ति, सजीव, बीच में खाली जगह: मृदूतक। जलीय पौधों में इसकी हवा भरी जगहें पौधे को तैरने में मदद करती हैं।
- B: सजीव और कोनों पर पेक्टिन से मोटी भित्ति: श्लेषोतक। यह प्रतान को सहारा देते हुए भी मुड़ने देता है।
- C: लिग्निन से मोटी भित्ति और मृत कोशिकाएँ: दृढ़ोतक। यह खोल को कठोर और मज़बूत बनाता है।
(पेज 32-33, चित्र 3.8।)
प्रश्न 4. इन आठ प्रकार की कोशिकाओं को जाइलम और फ्लोएम में बाँटिए: वाहिका, चालनी नलिका, जाइलम मृदूतक, सहचर कोशिका, वाहिनिका, फ्लोएम मृदूतक, जाइलम तंतु, फ्लोएम तंतु। फिर बताइए: (a) जाइलम का कौन-सा घटक सजीव है? (b) चालनी नलिका की कोशिकाओं के काम का नियमन कौन करता है? (c) आलू के कंद में जमा स्टार्च पत्तियों में बने भोजन से आता है। यह भोजन पत्तियों से कंद तक किन कोशिकाओं से होकर पहुँचा?
उत्तर: जाइलम: वाहिका, वाहिनिका, जाइलम मृदूतक, जाइलम तंतु। फ्लोएम: चालनी नलिका, सहचर कोशिका, फ्लोएम मृदूतक, फ्लोएम तंतु। (a) जाइलम मृदूतक; (b) सहचर कोशिकाएँ; (c) फ्लोएम की चालनी नलिकाएँ।
- (a) जाइलम में केवल जाइलम मृदूतक सजीव है; वाहिनिकाएँ, वाहिकाएँ और जाइलम तंतु मुख्यतः दृढ़ोतकी हैं।
- (b) सहचर कोशिकाएँ, जो विशेष मृदूतक कोशिकाएँ हैं।
- (c) फ्लोएम पत्तियों में बना भोजन पौधे के दूसरे भागों तक ले जाता है; आलू के कंद तक भी भोजन चालनी नलिकाओं से होकर ही पहुँचता है।
(पेज 33, चित्र 3.9।)
प्रश्न 5. शरीर की इन चार जगहों के उपकला ऊतक की बनावट और मुख्य काम लिखिए: (a) फेफड़ों के भीतर का अस्तर; (b) ग्रासनली का अस्तर; (c) छोटी आँत का अस्तर; (d) स्वेद ग्रंथि।
उत्तर:
- (a) पतली, चपटी कोशिकाओं की एक परत: गैसों का तेज़ विसरण।
- (b) कई परतें, बाहरी कोशिकाएँ चपटी और सटी हुई: रगड़ और चोट से सुरक्षा।
- (c) लंबी, खंभे जैसी कोशिकाओं की एक परत: पोषक तत्वों और पानी का अवशोषण।
- (d) घनाकार या स्तंभाकार विशेष कोशिकाएँ: पसीने का स्रवण।
(तालिका 3.2, पेज 35।)
प्रश्न 6. एक वयस्क के शरीर में लगभग 5 लीटर रक्त है। (a) उसमें प्लाज्मा और निर्मित तत्व कितने-कितने लीटर होंगे? (b) लाल रक्त कोशिकाएँ लगभग 4 महीने जीती हैं। एक साल में लाल रक्त कोशिकाओं का पूरा समूह लगभग कितनी बार बदल जाता है? (c) रक्त का रंग लाल किस पदार्थ से है, और वह किन कोशिकाओं में होता है?
उत्तर: (a) प्लाज्मा 2.75 लीटर, निर्मित तत्व 2.25 लीटर; (b) लगभग 3 बार; (c) हीमोग्लोबिन, लाल रक्त कोशिकाओं में।
- (a) प्लाज्मा 55 प्रतिशत: 5 × 0.55 = 2.75 लीटर। निर्मित तत्व 45 प्रतिशत: 5 × 0.45 = 2.25 लीटर। जाँच: 2.75 + 2.25 = 5।
- (b) 12 ÷ 4 = 3 बार।
- (c) हीमोग्लोबिन, लोहे वाला प्रोटीन, जो लाल रक्त कोशिकाओं में होता है।
(पेज 36, चित्र 3.12।)
प्रश्न 7. एक विद्यार्थी को तीन पेशी-नमूनों का विवरण मिला: (P) कोशिकाएँ तर्कुरूप, हर एक में एक केंद्रक, कोई धारी नहीं; (Q) लंबे बेलनाकार तंतु, शाखाएँ नहीं, कई केंद्रक, साफ़ धारियाँ; (R) बेलनाकार और शाखित तंतु, एक केंद्रक, हल्की धारियाँ। हर नमूने का नाम, शरीर में उसकी एक जगह, और यह बताइए कि वह ऐच्छिक है या अनैच्छिक।
उत्तर: P चिकनी पेशी, Q कंकाल पेशी, R हृदय पेशी।
- P: चिकनी पेशी, आमाशय या आँत में; अनैच्छिक (भोजन को धीरे-धीरे आगे बढ़ाना)।
- Q: कंकाल पेशी, कंकाल से जुड़ी, जैसे बाँह या टाँग में; ऐच्छिक (दौड़ना, लिखना)।
- R: हृदय पेशी, केवल हृदय में; अनैच्छिक (बिना थके लयबद्ध धड़कन)।
(पेज 37-38, चित्र 3.13।)
प्रश्न 8. (a) पसली पिंजर में कुल कितनी पसलियाँ होती हैं? (b) पसलियाँ उरोस्थि से कठोर अस्थि की जगह लचीली उपास्थि से जुड़ी हैं। इससे साँस लेने में क्या मदद मिलती है? (c) दो कशेरुकाओं के बीच की उपास्थि चक्रिका के दो काम लिखिए।
उत्तर: (a) 24; (b) पिंजर फैल-सिकुड़ पाता है; (c) गद्दी और लचीलापन।
- (a) 12 जोड़े = 12 × 2 = 24 पसलियाँ।
- (b) लचीली उपास्थि के कारण साँस लेते समय पसली पिंजर फैल और सिकुड़ सकता है। इससे छाती के भीतर की जगह घटती-बढ़ती है और हवा फेफड़ों में आती-जाती है।
- (c) यह गद्दी की तरह झटके सहती है, और लचीलापन देती है ताकि झुकते और मुड़ते समय भी भीतर की मेरुरज्जु सुरक्षित रहे।
(पेज 41।)
8. इस अध्याय पर AI का जवाब कैसे परखें
- सजीव या मृत पूछिए। AI कहे कि जाइलम की सारी कोशिकाएँ सजीव हैं, या दृढ़ोतक सजीव ऊतक है, तो पेज 33 से मिलाइए।
- "कौन किसे जोड़ता है" उलटकर देखिए। कंडरा पेशी को अस्थि से, स्नायु अस्थि को अस्थि से: AI ये दोनों अक्सर उलट देता है (पेज 37)।
- विभज्योतक की जगह माँगिए। केवल "विभज्योतक" लिख देना काफ़ी नहीं; शीर्षस्थ, पार्श्व या अंतर्वेशी और उसकी जगह भी लिखिए।
अंग्रेज़ी में इसी अध्याय के प्रश्न: Class 9 Tissues in Action, questions with answers। AI से पढ़ाई पर और: AI से पढ़ाई कैसे करें, नकल किए बिना।
कक्षा 9 विज्ञान का अभ्यास
- इसी किताब का पिछला अध्याय, हिंदी में: अध्याय 2 कोशिका — जीवन की निर्माण इकाई।
- अगला अध्याय 4, गति (अभी अंग्रेज़ी में): Class 9 Describing Motion Around Us, questions with answers।
- पूरे साल के प्रश्न, अध्याय-वार (अंग्रेज़ी में): Class 9 Science important questions 2026-27।
- पुराने और नए अध्यायों के नाम: Class 9 old chapter names 2026-27।
- ऑनलाइन, तुरंत जाँच के साथ: अभ्यास पेज पर कक्षा 9 और "क्रियाशील ऊतक" (Tissues in Action) चुनें।
CMDLearn कहाँ फिट होता है
CMDLearn कक्षा 1 से 10 के लिए हिंदी, मराठी और अंग्रेज़ी में एक AI ट्यूटर बना रहा है, जो एक कदम समझाता है और बच्चे का काम जाँचता है, पर लिखना बच्चे पर छोड़ता है। यह अभी तैयार हो रहा है और अभी कोई बच्चा इसका इस्तेमाल नहीं करता। अगर आप जानना चाहते हैं कि कब कुछ आज़माने को तैयार होगा, तो वेटलिस्ट में नाम लिखवाइए।
स्रोत
सभी 5 नवंबर 2026 को जाँचे गए।
- NCERT, अन्वेषण, कक्षा 9 की विज्ञान पाठ्यपुस्तक, अध्याय 3 "क्रियाशील ऊतक", पेज 28 से 47: ncert.nic.in/textbook/pdf/ihsc103.pdf
- NCERT, Exploration (अंग्रेज़ी संस्करण), Grade 9, Chapter 3 "Tissues in Action": ncert.nic.in/textbook/pdf/iesc103.pdf
- CBSE, Science (086), Class IX 2026-27, course structure (पेज 4) और अध्याय "Tissues" (पेज 5): cbseacademic.nic.in, ScienceSt_SecP1_2026-27.pdf
अध्याय की परिभाषाएँ, शब्द और पेज-संख्याएँ ऊपर के दस्तावेज़ों से हैं। इस पेज की सारी व्याख्याएँ, उदाहरण, प्रश्न और उत्तर हमारे अपने हैं; हर संख्या स्क्रिप्ट से जाँची गई है।
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