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कक्षा 9 विज्ञान अध्याय 2 कोशिका — जीवन की निर्माण इकाई: Hindi medium नोट्स और 8 प्रश्न-उत्तर
NCERT की कक्षा 9 की नई विज्ञान पाठ्यपुस्तक अन्वेषण का दूसरा अध्याय "कोशिका — जीवन की निर्माण इकाई" है, पेज 8 से 27 तक। इसमें सीखते हैं कि कोशिका को देखा कैसे जाता है, उसकी सीमा पदार्थों को कैसे छाँटती है, उसके भीतर कौन-कौन से कोशिकांग काम करते हैं, और नई कोशिकाएँ कैसे बनती हैं। यह गाइड दो काम करती है:
- अध्याय के मुख्य विचारों को छोटे नोट्स में समझाती है;
- अंत में हमारे अपने 8 प्रश्न देती है, हल और उत्तर के साथ।
पाठ्यपुस्तक साथ में खुली रखें। यहाँ की व्याख्याएँ, उदाहरण और प्रश्न हमारे अपने हैं; अंतिम बात पाठ्यपुस्तक की ही मानें। अंग्रेज़ी में यही अध्याय: Class 9 Cell: The Building Block of Life, questions with answers।
यह गाइड सीधे हिंदी में लिखी गई है, पर किसी हिंदी-माध्यम शिक्षक ने अभी इसकी भाषा नहीं जाँची है (native review pending)।
परीक्षा में यह अध्याय
CBSE ने 2026-27 के लिए कक्षा 9 विज्ञान की वार्षिक परीक्षा 80 अंकों की रखी है, और 20 अंक आंतरिक मूल्यांकन के हैं। इकाई I, "World of Living" (सजीवों का संसार), के 27 अंक हैं; इसमें अध्याय 2, 3, 11 और 12 आते हैं (CBSE पाठ्यक्रम, पेज 4)। CBSE अध्याय-वार अंक नहीं देता।
पाठ्यक्रम इस अध्याय के लिए 12 कालांश रखता है और ये बातें गिनाता है (पेज 4-5): कोशिका की खोज, पादप और जंतु कोशिकाएँ, पूर्वकेंद्रकी और सुकेंद्रकी कोशिकाएँ, मुख्य कोशिकांगों की संरचना और कार्य, झिल्लियों की पारगम्यता, कोशिका विभाजन और कैंसर। साथ ही परासरण का प्रयोग करके दिखाना और विसरण व परासरण में अंतर बताना भी इसमें है।
1. कोशिका को देखना: सूक्ष्मदर्शी
- विभेदन सीमा: लगभग 25 cm की दूरी से हमारी आँख दो बिंदुओं को तभी अलग देख पाती है, जब उनके बीच लगभग 0.1 mm या उससे अधिक दूरी हो (पेज 9)। ज़्यादातर कोशिकाएँ इससे छोटी हैं, इसलिए नग्न आँख से नहीं दिखतीं।
- रॉबर्ट हुक ने 1665 में अपने बनाए सूक्ष्मदर्शी (लगभग 200-300 गुना आवर्धन) से कॉर्क की पतली परत में छोटे-छोटे खाने देखे और उन्हें "सेल" (कोशिका) नाम दिया (पेज 9)।
- कुल आवर्धन = नेत्रिका का आवर्धन × अभिदृश्यक लेंस का आवर्धन। 10X नेत्रिका और 10X अभिदृश्यक से 100X मिलता है (पेज 10)।
- इकाइयाँ: 1 mm = 1000 µm (माइक्रोमीटर) (पेज 10), और 1 nm (नैनोमीटर) = 0.000001 mm (पेज 12)।
- इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी प्रकाश की जगह इलेक्ट्रॉन पुंज का उपयोग करता है और नैनोमीटर स्तर तक की बारीकी दिखाता है (पेज 10)।
2. कोशिका की सीमा: झिल्ली और भित्ति
कोशिका झिल्ली (प्लाज्मा झिल्ली) हर कोशिका को घेरती है। यह वरणात्मक रूप से पारगम्य है: कुछ पदार्थों को जाने देती है, कुछ को रोकती है (पेज 11)। यह लगभग 7 से 10 nm मोटी है और लिपिड व प्रोटीन से बनी है; इसकी बनावट तरल-मोज़ेक मॉडल से समझाई जाती है (पेज 12-13)।
| शब्द | अर्थ (हमारे शब्दों में) |
|---|---|
| विसरण | कणों का अधिक सांद्रता से कम सांद्रता की ओर फैलना; इसके लिए झिल्ली ज़रूरी नहीं |
| परासरण | वरणात्मक पारगम्य झिल्ली के पार केवल जल का विसरण: जल वहाँ से चलता है जहाँ जल अधिक और विलेय कम है |
| समपरासारी विलयन | बाहर की विलेय सांद्रता = कोशिका के भीतर की सांद्रता |
| अल्पपरासारी विलयन | बाहर विलेय कम, इसलिए जल भीतर जाता है |
| अतिपरासारी विलयन | बाहर विलेय अधिक, इसलिए जल बाहर निकलता है |
(पेज 12, चित्र 2.6।)
कोशिका भित्ति पादप, कवक और जीवाणु की कोशिकाओं में झिल्ली के बाहर एक और परत है (पेज 13)। पादपों में यह मुख्यतः सेल्युलोस से बनी है (पेज 14)। भित्ति कठोर है पर पारगम्य है, यानी जल और कुछ घुले खनिज इसके पार जा सकते हैं (पेज 13)। सांद्र विलयन में पादप कोशिका का भीतरी भाग सिकुड़ता है और झिल्ली भित्ति से हट जाती है, पर भित्ति कोशिका का आकार बनाए रखती है; भित्ति-रहित जंतु कोशिका पूरी सिकुड़ जाती है (पेज 13-14)।
3. पूर्वकेंद्रकी और सुकेंद्रकी कोशिकाएँ
| विशेषता | पूर्वकेंद्रकी (प्रोकैरयोटिक) | सुकेंद्रकी (यूकैरयोटिक) |
|---|---|---|
| केंद्रक | झिल्ली से घिरा केंद्रक नहीं; आनुवंशिक पदार्थ केंद्रकाभ नाम के क्षेत्र में | सुस्पष्ट, झिल्ली से घिरा केंद्रक |
| झिल्ली-आबद्ध कोशिकांग | नहीं | होते हैं |
| आम आकार (व्यास) | लगभग 1-10 µm | लगभग 10-100 µm |
| उदाहरण | जीवाणु | पादप और जंतु कोशिकाएँ |
(तालिका 2.2, पेज 15-16।)
4. कोशिकांग: कौन क्या करता है
| कोशिकांग | मुख्य काम | पहचान |
|---|---|---|
| केंद्रक | आनुवंशिक सूचना (DNA) रखता है | दोहरी झिल्ली, छिद्र; भीतर केंद्रिका और क्रोमेटिन |
| राइबोसोम | प्रोटीन संश्लेषण | मुक्त या अंतर्द्रव्यी जालिका पर जुड़े |
| रूक्ष अंतर्द्रव्यी जालिका (RER) | प्रोटीन बनाना और स्रवण | सतह पर राइबोसोम |
| चिकनी अंतर्द्रव्यी जालिका (SER) | वसा और हॉर्मोन बनाना, भंडारण | राइबोसोम नहीं |
| गॉल्जी उपकरण | प्रोटीन/लिपिड बदलना, छाँटना, पुटिकाओं में पैक करना | चपटी थैलियों की ढेरियाँ |
| लाइसोसोम (लयनकाय) | अनचाहे पदार्थ और टूटे भाग तोड़ना | एंजाइम से भरी एकल झिल्ली की थैली |
| माइटोकॉन्ड्रिया | कोशिकीय श्वसन से ऊर्जा, ATP के रूप में | दो झिल्लियाँ; भीतरी झिल्ली में अंतःकटक |
| हरितलवक | प्रकाश-संश्लेषण | पर्णहरित; भीतर पीठिका |
| वर्णीलवक / अवर्णी लवक | रंग देना / स्टार्च, तेल या प्रोटीन का भंडार | पीले-नारंगी-लाल वर्णक / रंगहीन |
| रसधानी | जल, खनिज, शर्करा और अपशिष्ट का भंडार; कोशिका को दृढ़ रखना | पादप कोशिका में एक बड़ी केंद्रीय रसधानी, कोशिका-रस से भरी |
(पेज 16-19।) माइटोकॉन्ड्रिया और लवक दोनों में अपना DNA और राइबोसोम होते हैं (पेज 19)। मनुष्य की पकी हुई (परिपक्व) लाल रक्त कोशिकाएँ केंद्रक-रहित होती हैं, इसलिए वे विभाजित नहीं होतीं और लगभग 120 दिन जीवित रहती हैं (पेज 16)।
5. कोशिका विभाजन और कोशिका सिद्धांत
| समसूत्री विभाजन | अर्धसूत्री विभाजन | |
|---|---|---|
| कहाँ | शरीर की कोशिकाओं में | केवल जनन अंगों की कोशिकाओं में |
| कितनी संतति कोशिकाएँ | 2 | 4 (जनक कोशिका दो बार बँटती है) |
| गुणसूत्रों की संख्या | जनक के बराबर | जनक की आधी |
| काम | वृद्धि, मरम्मत, अलैंगिक जनन | युग्मक बनाना, विविधता |
(पेज 21-22।) निषेचन में दो युग्मकों के मिलने से गुणसूत्र फिर पूरी संख्या में हो जाते हैं (पेज 22)।
कोशिका सिद्धांत (पेज 23): 1838 में श्लीडेन के अनुसार हर पौधा कोशिकाओं से बना है, 1839 में श्वान ने यही जंतुओं के लिए पाया, और 1855 में विरचो ने जोड़ा कि नई कोशिकाएँ केवल पूर्वविद्यमान कोशिकाओं से बनती हैं।
संपर्क अवरोध: कई जंतु कोशिकाएँ पड़ोसी कोशिकाओं को छूते ही बँटना रोक देती हैं। कैंसर की कोशिकाओं में यह रोक काम नहीं करती; वे बँटती ही जाती हैं और अर्बुद (ट्यूमर) बना देती हैं। पादप कोशिकाओं में यह संपर्क अवरोध नहीं दिखता, क्योंकि उनकी भित्ति कठोर है (पेज 23)।
6. तीन गलतियाँ जो अंक काटती हैं
- कोशिका भित्ति को "वरणात्मक" लिखना। भित्ति पारगम्य है; छाँटने का काम झिल्ली करती है।
- यह मान लेना कि पूर्वकेंद्रकी कोशिका में DNA नहीं होता। DNA होता है, बस झिल्ली से घिरे केंद्रक में नहीं, केंद्रकाभ में।
- अर्धसूत्री विभाजन की संख्याएँ उलटना। इसमें 4 कोशिकाएँ बनती हैं और हर एक में गुणसूत्र आधे होते हैं; समसूत्री में 2 कोशिकाएँ, गुणसूत्र पूरे।
7. हमारे 8 प्रश्न, उत्तर के साथ
पहले कॉपी पर खुद हल करें, फिर उत्तर देखें। ये प्रश्न हमारे अपने हैं, किताब के क्रियाकलाप या अभ्यास-प्रश्न नहीं।
प्रश्न 1. कागज़ पर स्याही के दो बिंदु 0.04 mm की दूरी पर हैं। (a) 25 cm की दूरी से देखने पर आँख को एक बिंदु दिखेगा या दो? (b) 5 गुना आवर्धन वाले हैंड लेंस से देखने पर? (c) किसी सूक्ष्मदर्शी में 10X नेत्रिका है और अभिदृश्यक 10X व 40X के हैं। दोनों स्थितियों में कुल आवर्धन बताइए।
उत्तर: (a) एक; (b) दो; (c) 100X और 400X।
- (a) 0.04 mm, विभेदन सीमा 0.1 mm से कम है, इसलिए दोनों बिंदु एक दिखेंगे।
- (b) लेंस से दूरी 0.04 × 5 = 0.2 mm जैसी दिखेगी, जो 0.1 mm से अधिक है, इसलिए बिंदु अलग-अलग दिखेंगे।
- (c) 10 × 10 = 100X, और 10 × 40 = 400X।
(पेज 9-10।)
प्रश्न 2. कोशिका झिल्ली लगभग 7 से 10 nm मोटी है। (a) 0.1 mm में कितने नैनोमीटर हैं? (b) 10 nm मोटी कितनी झिल्लियाँ सटाकर रखें तो कुल मोटाई 0.1 mm होगी? 7 nm वाली कितनी? (c) 400X आवर्धन पर 10 nm की झिल्ली कितनी मोटी दिखेगी? क्या उसकी मोटाई आँख से अलग पहचानी जा सकती है?
उत्तर: (a) 1,00,000 nm; (b) 10,000 और लगभग 14,286; (c) 0.004 mm, नहीं।
- (a) 1 nm = 0.000001 mm, इसलिए 1 mm = 10,00,000 nm और 0.1 mm = 1,00,000 nm।
- (b) 1,00,000 ÷ 10 = 10,000 झिल्लियाँ; 1,00,000 ÷ 7 ≈ 14,286।
- (c) 10 nm × 400 = 4000 nm = 0.004 mm। यह 0.1 mm से बहुत कम है, इसलिए प्रकाश सूक्ष्मदर्शी में भी झिल्ली की मोटाई नहीं दिखती, केवल एक रेखा दिखती है। मोटाई को 0.1 mm जितना दिखाने के लिए 10,000 गुना आवर्धन चाहिए; इसी तरह की बारीकी के लिए इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी काम आता है।
(पेज 9, 10, 12।)
प्रश्न 3. मान लीजिए किसी पादप कोशिका के कोशिका-रस में विलेय 2 प्रतिशत है। उसे तीन विलयनों में रखा जाता है: P (0.5 प्रतिशत), Q (2 प्रतिशत) और R (6 प्रतिशत)। (a) हर विलयन को समपरासारी, अल्पपरासारी या अतिपरासारी में बाँटिए। (b) हर विलयन में पादप कोशिका का क्या होगा? (c) R में भित्ति-रहित जंतु कोशिका का क्या होगा?
उत्तर: (a) P अल्पपरासारी, Q समपरासारी, R अतिपरासारी।
- (a) P में बाहर विलेय कम है (0.5 < 2): अल्पपरासारी। Q में बराबर: समपरासारी। R में अधिक (6 > 2): अतिपरासारी।
- (b) P में जल भीतर जाता है और रसधानी भरकर कोशिका दृढ़ हो जाती है; भित्ति उसे फटने नहीं देती। Q में जल के आने-जाने का कुल असर शून्य: कोई खास बदलाव नहीं। R में जल बाहर निकलता है: भीतरी भाग सिकुड़ता है और झिल्ली भित्ति से हट जाती है, पर कोशिका का बाहरी आकार भित्ति के कारण बना रहता है।
- (c) जंतु कोशिका में भित्ति नहीं है, इसलिए जल निकलने पर वह पूरी सिकुड़ जाती है।
(पेज 12-14, चित्र 2.6।)
प्रश्न 4. बाज़ार से लाया पालक दोपहर तक मुरझा गया। उसकी डंठलें 30 मिनट सादे ठंडे पानी में डुबोने पर पत्तियाँ फिर से कड़क हो गईं। (a) मुरझाने का कारण कोशिका के स्तर पर समझाइए। (b) पानी में रखने पर पत्तियाँ फिर कड़क क्यों हुईं? (c) ज़्यादा पानी जाने पर भी पत्ती की कोशिकाएँ फटती क्यों नहीं?
उत्तर (कारण सहित):
- (a) पानी कम मिलने पर रसधानी जल खो देती है। रसधानी का दबाव घटता है, कोशिकाएँ ढीली पड़ती हैं, और पत्ती लटक जाती है।
- (b) सादा पानी कोशिका-रस से अल्पपरासारी है। जल परासरण से कोशिकाओं में जाता है, रसधानी फिर भरती है और भीतर का दबाव कोशिकाओं को दृढ़ बना देता है।
- (c) कठोर कोशिका भित्ति फैलाव को एक सीमा पर रोक देती है, इसलिए कोशिका फूलती है पर फटती नहीं।
(पेज 12, 13, 19।)
प्रश्न 5. तीन अनजानी कोशिकाओं का विवरण है। हर एक को पूर्वकेंद्रकी या सुकेंद्रकी बताइए; सुकेंद्रकी हो तो यह भी कि पादप की है या जंतु की।
- कोशिका A: लगभग 3 µm, झिल्ली से घिरा केंद्रक नहीं, DNA एक क्षेत्र में, कोशिका भित्ति और राइबोसोम हैं।
- कोशिका B (प्याज़ के शल्क की झिल्ली से): लगभग 60 µm, सुस्पष्ट केंद्रक, कोशिका भित्ति और एक बड़ी केंद्रीय रसधानी; हरितलवक एक भी नहीं।
- कोशिका C: लगभग 20 µm, सुस्पष्ट केंद्रक, भित्ति नहीं, लाइसोसोम और छोटी रसधानियाँ।
उत्तर: A पूर्वकेंद्रकी (जीवाणु जैसी); B सुकेंद्रकी, पादप; C सुकेंद्रकी, जंतु।
- A: केंद्रक की झिल्ली नहीं और DNA केंद्रकाभ में, आकार भी 1 से 10 µm वाली सीमा में: पूर्वकेंद्रकी। भित्ति होने से यह पादप नहीं बन जाती; जीवाणुओं में भी भित्ति होती है।
- B: सुस्पष्ट केंद्रक और 10 से 100 µm: सुकेंद्रकी। भित्ति और बड़ी केंद्रीय रसधानी: पादप कोशिका। हरितलवक न होने से यह जंतु कोशिका नहीं बन जाती: पौधे के जो भाग प्रकाश से दूर रहते हैं, उनकी कोशिकाओं को प्रकाश-संश्लेषण नहीं करना होता।
- C: सुस्पष्ट केंद्रक: सुकेंद्रकी। भित्ति नहीं और रसधानियाँ छोटी: जंतु कोशिका।
(तालिका 2.2 और चित्र 2.10, पेज 14-15; पेज 13, 18-19।)
प्रश्न 6. इन कोशिकाओं में कौन-सा कोशिकांग सबसे ज़्यादा या सबसे ख़ास होगा? कारण भी लिखिए। (a) दौड़ने वाले खिलाड़ी की टाँग की पेशी कोशिका; (b) पके लाल टमाटर के छिलके की कोशिका; (c) शकरकंद में स्टार्च जमा करने वाली कोशिका; (d) शरीर में घुसे जीवाणुओं को पचाने वाली कोशिका।
उत्तर: (a) माइटोकॉन्ड्रिया; (b) वर्णीलवक; (c) अवर्णी लवक; (d) लाइसोसोम।
- (a) पेशी को लगातार बहुत ऊर्जा चाहिए, और ऊर्जा माइटोकॉन्ड्रिया में कोशिकीय श्वसन से मिलती है।
- (b) लाल रंग वर्णीलवक के वर्णकों से आता है; फलों में ये पीले, नारंगी या लाल होते हैं।
- (c) रंगहीन अवर्णी लवक स्टार्च जैसे भोजन का भंडार करते हैं।
- (d) लाइसोसोम के एंजाइम अनचाहे पदार्थों को तोड़ देते हैं।
(पेज 17-19।)
प्रश्न 7. मान लीजिए किसी जीव की शरीर-कोशिका में 12 गुणसूत्र हैं। (a) समसूत्री विभाजन से कितनी कोशिकाएँ बनेंगी, और हर एक में कितने गुणसूत्र? (b) अर्धसूत्री विभाजन से? (c) ऐसे दो युग्मक मिलें तो नई कोशिका में कितने गुणसूत्र होंगे? (d) प्रयोगशाला के संवर्धन में एक कोशिका हर 24 घंटे में समसूत्री विभाजन से दो बनती है। 6 दिन बाद कितनी कोशिकाएँ होंगी, और किस दिन संख्या पहली बार 1000 से ऊपर जाएगी?
उत्तर: (a) 2 कोशिकाएँ, 12-12; (b) 4 कोशिकाएँ, 6-6; (c) 12; (d) 64; 10वें दिन।
- (a) समसूत्री: 2 संतति कोशिकाएँ, हर एक में जनक जितने, यानी 12।
- (b) अर्धसूत्री: 4 कोशिकाएँ, हर एक में आधे, यानी 6।
- (c) 6 + 6 = 12: मूल संख्या लौट आती है।
- (d) हर दिन संख्या दुगुनी: 6 दिन बाद 2⁶ = 64। 2⁹ = 512 और 2¹⁰ = 1024, इसलिए 10वें दिन संख्या पहली बार 1000 से ऊपर जाती है।
(पेज 21-22।)
प्रश्न 8. (a) हुक के अवलोकन (1665) से विरचो के कथन (1855) तक कितने वर्ष बीते? (b) कोशिका सिद्धांत के इन तीन कथनों को उनके वैज्ञानिक और वर्ष से मिलाइए: "सभी पादप कोशिकाओं से बने हैं", "सभी जंतु कोशिकाओं से बने हैं", "नई कोशिकाएँ केवल पूर्वविद्यमान कोशिकाओं से बनती हैं"। (c) 2010 में जे. क्रेग वेंटर के दल ने प्रयोगशाला में बना DNA एक जीवाणु कोशिका में डाला और कोशिका बँटने लगी। क्या इससे सिद्धांत का तीसरा कथन टूटता है?
उत्तर: (a) 190 वर्ष; (b) श्लीडेन 1838, श्वान 1839, विरचो 1855; (c) नहीं।
- (a) 1855 − 1665 = 190 वर्ष।
- (b) पादप: श्लीडेन, 1838; जंतु: श्वान, 1839; पूर्वविद्यमान कोशिकाएँ: विरचो, 1855।
- (c) नहीं। केवल DNA प्रयोगशाला में बना था; कोशिकाद्रव्य और झिल्ली समेत कोशिका का बाकी हिस्सा पहले से जीवित एक कोशिका से लिया गया था। यानी नई कोशिकाएँ फिर भी एक पूर्वविद्यमान कोशिका से ही बनीं। प्रयोग यह दिखाता है कि DNA कोशिका की संरचना और गतिविधियाँ नियंत्रित करता है।
(पेज 9, 20, 23।)
8. इस अध्याय पर AI का जवाब कैसे परखें
- संख्याएँ मिलाइए। AI कहे कि अर्धसूत्री विभाजन से 2 कोशिकाएँ बनती हैं, या पूर्वकेंद्रकी कोशिका 50 µm की होती है, तो तालिका 2.2 और पेज 21-22 से मिलाइए।
- "किस झिल्ली" वाला प्रश्न पूछिए। परासरण के उत्तर में यह साफ़ होना चाहिए कि जल वरणात्मक पारगम्य झिल्ली के पार जा रहा है, भित्ति के पार नहीं।
- हर कोशिकांग का काम और पहचान दोनों माँगिए। केवल नाम रट लेने से चित्र वाले प्रश्न में अंक नहीं मिलते।
अंग्रेज़ी में इसी अध्याय के प्रश्न: Class 9 Cell: The Building Block of Life, questions with answers। AI से पढ़ाई पर और: AI से पढ़ाई कैसे करें, नकल किए बिना।
कक्षा 9 विज्ञान का अभ्यास
- इसी किताब का पिछला अध्याय, हिंदी में: अध्याय 1 अन्वेषण — माध्यमिक विज्ञान के संसार में प्रवेश।
- इसी किताब का अगला अध्याय, हिंदी में: अध्याय 3 क्रियाशील ऊतक।
- पूरे साल के प्रश्न, अध्याय-वार (अंग्रेज़ी में): Class 9 Science important questions 2026-27।
- ऑनलाइन, तुरंत जाँच के साथ: अभ्यास पेज पर कक्षा 9 और "Cell: The Building Block of Life" चुनें।
- छापने लायक, उत्तर के साथ: Cell: The Building Block of Life की वर्कशीट।
CMDLearn कहाँ फिट होता है
CMDLearn कक्षा 1 से 10 के लिए हिंदी, मराठी और अंग्रेज़ी में एक AI ट्यूटर बना रहा है, जो एक कदम समझाता है और बच्चे का काम जाँचता है, पर लिखना बच्चे पर छोड़ता है। यह अभी तैयार हो रहा है और अभी कोई बच्चा इसका इस्तेमाल नहीं करता। जब आज़माने को कुछ हो, तब ख़बर पाने के लिए वेटलिस्ट से जुड़ें।
स्रोत
सभी 5 नवंबर 2026 को जाँचे गए।
- NCERT, अन्वेषण, कक्षा 9 की विज्ञान पाठ्यपुस्तक, अध्याय 2 "कोशिका — जीवन की निर्माण इकाई", पेज 8 से 27: ncert.nic.in/textbook/pdf/ihsc102.pdf
- NCERT, Exploration (अंग्रेज़ी संस्करण), Grade 9, Chapter 2 "Cell: The Building Block of Life": ncert.nic.in/textbook/pdf/iesc102.pdf
- CBSE, Science (086), Class IX 2026-27, course structure (पेज 4) और अध्याय "Cell" (पेज 4-5): cbseacademic.nic.in, ScienceSt_SecP1_2026-27.pdf
अध्याय की परिभाषाएँ, शब्द और पेज-संख्याएँ ऊपर के दस्तावेज़ों से हैं। इस पेज की सारी व्याख्याएँ, उदाहरण, प्रश्न और उत्तर हमारे अपने हैं; हर संख्या स्क्रिप्ट से जाँची गई है।
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