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कक्षा 9 विज्ञान अध्याय 4 अपने परिवेश में गति का वर्णन: Hindi medium नोट्स और 8 प्रश्न-उत्तर

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इस गाइड की हिंदी की समीक्षा किसी हिंदी भाषी शिक्षक ने अभी नहीं की है (translation - review pending)।

NCERT की कक्षा 9 की नई विज्ञान पाठ्यपुस्तक अन्वेषण (अंग्रेज़ी में Exploration) का अध्याय 4 है "अपने परिवेश में गति का वर्णन" (पेज 48 से 71)। कक्षा 6 और 7 में आपने दूरी, समय और चाल पढ़ी थी। यह अध्याय गति को शब्दों के साथ-साथ संख्याओं, समीकरणों और ग्राफ से लिखना सिखाता है। यह गाइड दो काम करती है:

पाठ्यपुस्तक साथ में खुली रखें। यहाँ की व्याख्याएँ, उदाहरण और प्रश्न हमारे अपने हैं; अंतिम बात पाठ्यपुस्तक की ही मानें। अंग्रेज़ी में यही अध्याय: Class 9 Describing Motion Around Us, questions with answers।

यह गाइड सीधे हिंदी में लिखी गई है, पर किसी हिंदी-माध्यम शिक्षक ने अभी इसकी भाषा नहीं जाँची है (native review pending)। प्रश्न हमारे अपने हैं; शिक्षक समीक्षा बाकी है (teacher review pending)।

परीक्षा में यह अध्याय

CBSE ने 2026-27 के लिए कक्षा 9 विज्ञान की वार्षिक परीक्षा 80 अंकों की रखी है, और 20 अंक आंतरिक मूल्यांकन के हैं। इकाई III, "Motion, Force, Work and Sound", के 23 अंक हैं; इसमें अध्याय 4, 6, 7 और 10 आते हैं (CBSE पाठ्यक्रम, पेज 4)। CBSE अध्याय-वार अंक नहीं देता।

पाठ्यक्रम "Motion" के लिए 13 कालांश रखता है (पेज 14)। उसमें ये बातें हैं: विस्थापन, वेग और त्वरण; एक दिशा में सरल रेखा की गति के स्थिति-समय और वेग-समय ग्राफ; ग्राफ की मदद से नियत त्वरण वाले समीकरण निकालना; और एकसमान वृत्तीय गति का प्रारंभिक विचार। इसलिए आंकिक प्रश्न (numericals) और ग्राफ पढ़ना, दोनों का अभ्यास ज़रूरी है।

1. स्थिति, गति और विराम

किसी वस्तु की स्थिति बताने के लिए पहले एक स्थिर संदर्भ बिंदु चुनना होता है। फिर बताते हैं कि वस्तु उस बिंदु से कितनी दूर है और किस दिशा में (पेज 49)। अगर समय के साथ यह स्थिति बदले, तो वस्तु गति में है; न बदले, तो विराम में (पेज 49)।

सरल रेखा पर संदर्भ बिंदु को मूल बिंदु O मानते हैं। रेखा पर दो ही दिशाएँ हैं, आगे और पीछे, इसलिए दिशा को + और − चिह्न से लिखते हैं। आम तौर पर O के दाईं ओर की स्थिति धनात्मक और बाईं ओर की ऋणात्मक मानी जाती है (पेज 50)।

ध्यान रखें: समय का क्षण घड़ी का एक पाठ्यांक है, जबकि समय अंतराल दो पाठ्यांकों के बीच का अंतर है (पेज 50)।

2. चलित दूरी और विस्थापन

बातकुल चलित दूरीविस्थापन
क्या हैवस्तु ने पूरे रास्ते में जितना चला, उसका जोड़दो क्षणों के बीच स्थिति में हुआ कुल (नेट) परिवर्तन
दिशानहीं, केवल आंकिक मानहाँ, परिमाण और दिशा दोनों
लौटकर आने परबढ़ती रहती हैघट सकता है, शून्य भी हो सकता है
SI मात्रकमीटर (m)मीटर (m)

विस्थापन का परिमाण दोनों स्थितियों के बीच की सीधी दूरी है, और उसकी दिशा पहली स्थिति से दूसरी स्थिति की ओर होती है (पेज 50-51)। किसी भौतिक राशि के आंकिक मान (मात्रक सहित) को उसका परिमाण कहते हैं।

सरल रेखा में अगर वस्तु कभी पीछे नहीं मुड़ती, तो दोनों संख्याएँ, कुल चलित दूरी और विस्थापन का परिमाण, एक जैसी रहती हैं (पेज 51)। मुड़कर लौटे, तो विस्थापन का परिमाण दूरी से कम हो जाता है; वह दूरी से ज़्यादा कभी नहीं होता।

किताब एक बात और जोड़ती है: केवल आंकिक मान से पूरी तरह बताई जाने वाली राशियाँ अदिश हैं, और जिनमें दिशा भी चाहिए वे सदिश (पेज 50); इनके बारे में विस्तार से आगे की कक्षाओं में पढ़ेंगे।

3. माध्य चाल और माध्य वेग

राशिसूत्रदिशा?
माध्य चालकुल चलित दूरी ÷ समय अंतरालनहीं (पेज 52)
माध्य वेगविस्थापन ÷ समय अंतराल, यानी v<sub>av</sub> = s/tहाँ, विस्थापन की दिशा में (पेज 53)

दोनों का SI मात्रक मीटर प्रति सेकंड (m/s) है; रोज़मर्रा में किलोमीटर प्रति घंटा भी चलता है (पेज 53)। बदलने का आसान तरीका: 1 km h<sup>−1</sup> = 1000 m ÷ 3600 s = 5/18 m s<sup>−1</sup>। जैसे 72 km h<sup>−1</sup> = 72 × 5/18 = 20 m s<sup>−1</sup>।

किसी राशि में परिवर्तन को उसमें लगे समय से भाग देने पर परिवर्तन की दर मिलती है। माध्य वेग, स्थिति के बदलने की माध्य दर है (पेज 53)। किसी एक क्षण के वेग को तात्क्षणिक वेग कहते हैं; वाहन का चालमापी (speedometer) लगभग उसी का परिमाण दिखाता है (पेज 54)।

किताब का एक रोचक बॉक्स: चाल = दूरी ÷ समय की समझ भारत में आर्यभटीय (पाँचवीं शताब्दी) में भी मिलती है, और गणित कौमुदी (14वीं शताब्दी) में इसी पर आधारित प्रश्न है (पेज 52)।

4. माध्य त्वरण

वेग में परिवर्तन को समय अंतराल से भाग देने पर माध्य त्वरण मिलता है (पेज 54):

a = (v − u) ÷ (t<sub>2</sub> − t<sub>1</sub>), जहाँ u आरंभिक वेग और v अंतिम वेग है।

मूल बिंदु और धन दिशा हम अपनी सुविधा से चुन सकते हैं, पर एक प्रश्न के बीच में उन्हें बदलना नहीं चाहिए (पेज 56)।

5. ग्राफ से गति पढ़ना

इस अध्याय के सभी ग्राफ एक ही दिशा में सरल रेखा की गति के हैं, इसलिए उनमें दूरी और विस्थापन का परिमाण बराबर है (पेज 57)। ग्राफ रास्ते का नक्शा नहीं है; वह केवल यह दिखाता है कि समय के साथ स्थिति या वेग कैसे बदला (पेज 58)।

ग्राफ का आकारस्थिति-समय ग्राफ में अर्थवेग-समय ग्राफ में अर्थ
समय-अक्ष के समांतर सीधी रेखावस्तु विराम में है (पेज 60)वेग अचर है, त्वरण शून्य (पेज 61)
ऊपर जाती सीधी तिरछी रेखावेग अचर है (पेज 59)वेग नियत त्वरण से बढ़ रहा है (पेज 61)
नीचे आती सीधी तिरछी रेखा(इस अध्याय में नहीं)वेग नियत त्वरण से घट रहा है (पेज 61)
वक्र (curve)वेग बदल रहा है, यानी त्वरित गति (पेज 59)(इस अध्याय में नहीं)

दो काम की बातें:

6. नियत त्वरण के तीन समीकरण

जब त्वरण नियत हो, तो पाँच राशियाँ (विस्थापन s, समय t, आरंभिक वेग u, अंतिम वेग v, त्वरण a) तीन समीकरणों से जुड़ती हैं (पेज 63-64):

समीकरणकब काम आता है
v = u + atसमय दिया हो और वेग चाहिए
s = ut + ½at²समय दिया हो और विस्थापन चाहिए
v² = u² + 2asसमय न दिया हो, न पूछा गया हो

पहला समीकरण माध्य त्वरण की परिभाषा से सीधे निकलता है। दूसरा वेग-समय ग्राफ के नीचे के क्षेत्रफल (आयत + त्रिभुज) से, और तीसरा पहले दो में से t हटाकर (पेज 63-64)। किताब इन्हें शुद्धगतिक समीकरण कहती है (पेज 65)।

सावधानी: ये समीकरण केवल नियत त्वरण पर लागू होते हैं। दोनों दिशाओं वाली गति में u, v, a और s का चिह्न उनकी दिशा बताता है (पेज 65)।

सड़क सुरक्षा: ब्रेक लगाने के बाद वाहन कुछ दूरी चलकर रुकता है। यह दूरी वाहन के वेग, सड़क की सतह (गीली या सूखी), ब्रेक की क्षमता और चालक के प्रतिक्रिया काल पर निर्भर करती है। इसीलिए आगे चल रहे वाहन से सुरक्षित दूरी रखते हैं (पेज 65)।

7. समतल में गति और एकसमान वृत्तीय गति

सरल रेखा की गति को एकविमीय गति भी कहते हैं (पेज 65)। किसी वाहन का दूसरे को पार करना, ठोकर मारी गई गेंद का पथ या उपग्रह का घूमना समतल में यानी द्विविमीय गति है (पेज 66)। पहाड़ी रास्ते पर चढ़ती कार या उड़ता पक्षी त्रिविमीय गति के उदाहरण हैं (पेज 67)।

असल जीवन में चाल पूरी तरह अचर और पथ पूरा वृत्त कम ही होता है, इसलिए एकसमान वृत्तीय गति एक आदर्श मॉडल है; फिर भी ग्रहों की गति या मोड़ पर मुड़ते वाहन को समझने में यह काम आता है (पेज 68)।

8. हमारे 8 प्रश्न, उत्तर के साथ

पहले कॉपी पर खुद हल करें, फिर उत्तर देखें। ये प्रश्न हमारे अपने हैं, किताब के उदाहरण, क्रियाकलाप या अभ्यास-प्रश्न नहीं।

प्रश्न 1. एक मेट्रो लाइन सीधी है। स्टेशन Q को मूल बिंदु मानिए और स्टेशन R की ओर को धन दिशा। स्टेशन P, Q से 1200 m पीछे है और स्टेशन R, Q से 800 m आगे। एक ट्रेन P से चलकर R तक जाती है और फिर लौटकर Q पर रुकती है। (a) P और R की स्थितियाँ चिह्न सहित लिखिए। (b) ट्रेन की कुल चलित दूरी कितनी है? (c) उसका विस्थापन कितना है, किस दिशा में? (d) पूरी यात्रा में 280 s लगे; माध्य चाल और माध्य वेग निकालिए।

उत्तर: (a) P = −1200 m, R = +800 m; (b) 2800 m; (c) 1200 m, R की ओर; (d) 10 m s<sup>−1</sup> और लगभग 4.3 m s<sup>−1</sup> R की ओर। (a) Q से पीछे की स्थिति ऋणात्मक, आगे की धनात्मक (पेज 50)। (b) P से R: 1200 + 800 = 2000 m; R से Q: 800 m; कुल 2800 m। (c) विस्थापन = अंतिम स्थिति − आरंभिक स्थिति = 0 − (−1200) = +1200 m, यानी R की ओर (पेज 50-51)। (d) माध्य चाल = 2800 ÷ 280 = 10 m s<sup>−1</sup>; माध्य वेग = 1200 ÷ 280 ≈ 4.3 m s<sup>−1</sup>, धन दिशा में (पेज 52-53)।

प्रश्न 2. हर कथन सही है या गलत? गलत को ठीक करके लिखिए। (a) अगर किसी यात्रा में माध्य वेग शून्य है, तो माध्य चाल भी शून्य होगी। (b) गोल सड़क पर अचर चाल से चलती साइकिल का त्वरण शून्य है। (c) विस्थापन का परिमाण कुल चलित दूरी से कभी ज़्यादा नहीं हो सकता। (d) जो वस्तु बहुत तेज़ चल रही है, उसका त्वरण भी ज़रूर बड़ा होगा। (e) वेग-समय ग्राफ में समय-अक्ष के समांतर रेखा का मतलब है कि वस्तु रुकी हुई है।

उत्तर: (a) गलत; (b) गलत; (c) सही; (d) गलत; (e) गलत। (a) घर लौट आने पर विस्थापन, इसलिए माध्य वेग, शून्य होता है, पर रास्ता तो चला गया, इसलिए माध्य चाल शून्य नहीं (पेज 52-53)। (b) दिशा लगातार बदल रही है, इसलिए वेग बदल रहा है और साइकिल त्वरित है (पेज 67)। (c) सही: विस्थापन का परिमाण दूरी के बराबर या उससे कम होता है (पेज 51)। (d) त्वरण वेग के बदलने की दर है, वेग का आकार नहीं; अचर वेग पर तेज़ वाहन का त्वरण शून्य है (पेज 55)। (e) वह रेखा अचर वेग बताती है; रुकी हुई वस्तु के लिए स्थिति-समय ग्राफ में ऐसी रेखा बनती है (पेज 60-61)।

प्रश्न 3. स्कूल की खेल-प्रतियोगिता में एक धावक विराम से चलकर 3 s में 9 m s<sup>−1</sup> का वेग पा लेती है। एक साइकिल-सवार विराम से 4 s में 6 m s<sup>−1</sup> तक पहुँचता है। दोनों का त्वरण नियत मानिए। (a) किसका त्वरण ज़्यादा है? (b) पहले 3 s में कौन कितनी दूर गया? (c) साइकिल की अधिकतम चाल धावक से कम है; क्या इससे उसका त्वरण अपने-आप कम हो जाता है?

उत्तर: (a) धावक, 3 m s<sup>−2</sup> बनाम 1.5 m s<sup>−2</sup>; (b) धावक 13.5 m, साइकिल 6.75 m; (c) नहीं। (a) धावक: a = (9 − 0) ÷ 3 = 3 m s<sup>−2</sup>; साइकिल: a = (6 − 0) ÷ 4 = 1.5 m s<sup>−2</sup> (पेज 54)। (b) s = ut + ½at², u = 0: धावक ½ × 3 × 9 = 13.5 m; साइकिल ½ × 1.5 × 9 = 6.75 m (पेज 64)। (c) त्वरण इस पर निर्भर करता है कि वेग कितनी जल्दी बदला, न कि अंत में वेग कितना है; कम अंतिम वेग वाली वस्तु भी कम समय में वहाँ पहुँचे तो उसका त्वरण ज़्यादा हो सकता है (पेज 55)।

प्रश्न 4. एक स्कूल बस सीधी सड़क पर चलती है। स्कूल के गेट से उसकी स्थिति हर मिनट नोट की गई:

समय (min)012345
स्थिति (m)04008008008001400

(a) किस अंतराल में बस रुकी रही, और स्थिति-समय ग्राफ में वह हिस्सा कैसा दिखेगा? (b) 0 से 2 min और 4 से 5 min में बस का वेग m s<sup>−1</sup> में निकालिए। ग्राफ का कौन-सा हिस्सा ज़्यादा खड़ा होगा? (c) पूरे 5 min का माध्य वेग कितना है?

उत्तर: (a) 2 से 4 min, समय-अक्ष के समांतर; (b) लगभग 6.7 m s<sup>−1</sup> और 10 m s<sup>−1</sup>, दूसरा हिस्सा ज़्यादा खड़ा; (c) लगभग 4.7 m s<sup>−1</sup>। (a) 2 से 4 min तक स्थिति 800 m पर ही रही, इसलिए बस विराम में थी; यह हिस्सा समय-अक्ष के समांतर सीधी रेखा होगा (पेज 60)। (b) 0-2 min: 800 m ÷ 120 s ≈ 6.7 m s<sup>−1</sup>; 4-5 min: 600 m ÷ 60 s = 10 m s<sup>−1</sup>। ज़्यादा वेग का मतलब ज़्यादा प्रवणता, इसलिए 4-5 min वाला हिस्सा ज़्यादा खड़ा होगा (पेज 60)। (c) 1400 m ÷ 300 s ≈ 4.7 m s<sup>−1</sup>, गेट से दूर की दिशा में। रुकने का समय भी अंतराल में गिना जाता है, इसलिए माध्य वेग दोनों चलते हिस्सों के वेग से कम है।

प्रश्न 5. दो मेट्रो स्टेशनों के बीच की सीधी पटरी 1350 m लंबी है। ट्रेन विराम से चलकर 20 s में नियत त्वरण से 15 m s<sup>−1</sup> तक पहुँचती है, फिर कुछ देर 15 m s<sup>−1</sup> पर चलती है, और अंत में 30 s में नियत रूप से धीमी होकर अगले स्टेशन पर ठीक रुकती है। (a) वेग-समय ग्राफ की आकृति कैसी होगी? (b) तेज़ होने और धीमे होने में कितनी-कितनी दूरी लगी? (c) ट्रेन कितने सेकंड 15 m s<sup>−1</sup> पर चली? (d) पूरी यात्रा का समय और माध्य चाल?

उत्तर: (a) समलंब (trapezium); (b) 150 m और 225 m; (c) 65 s; (d) 115 s, लगभग 11.7 m s<sup>−1</sup>। (a) पहले ऊपर जाती रेखा, फिर समय-अक्ष के समांतर, फिर नीचे आती रेखा: पूरी आकृति समलंब है। (b) वेग-समय ग्राफ के नीचे का क्षेत्रफल = विस्थापन (पेज 62-63)। तेज़ होना: त्रिभुज ½ × 20 × 15 = 150 m; धीमा होना: ½ × 30 × 15 = 225 m। (c) बची दूरी 1350 − 150 − 225 = 975 m; 975 ÷ 15 = 65 s। (d) 20 + 65 + 30 = 115 s; माध्य चाल = 1350 ÷ 115 ≈ 11.7 m s<sup>−1</sup> (पेज 52)।

प्रश्न 6. एक गाँव के पुराने कुएँ में एक कंकड़ छोड़ा गया (ऊपर फेंका नहीं गया)। वह ठीक 2 s बाद पानी से टकराया। g = 9.8 m s<sup>−2</sup> लीजिए और हवा का असर छोड़ दीजिए। (a) पानी की सतह कितनी गहराई पर है? (b) टकराते समय कंकड़ का वेग कितना था? (c) किसी दूसरे, ज़्यादा गहरे कुएँ में कंकड़ इससे दोगुने वेग से पानी तक पहुँचे, तो वहाँ पानी कितना गहरा होगा?

उत्तर: (a) 19.6 m; (b) 19.6 m s<sup>−1</sup>, नीचे की ओर; (c) 78.4 m। नीचे की दिशा को धन लें, u = 0, a = g (पेज 56)। (a) s = ut + ½at² = ½ × 9.8 × 2² = 19.6 m (पेज 64)। (b) v = u + at = 9.8 × 2 = 19.6 m s<sup>−1</sup> (पेज 63)। (c) v² = u² + 2as से s = v² ÷ 2g। वेग दोगुना, यानी 39.2 m s<sup>−1</sup>: s = 39.2² ÷ 19.6 = 78.4 m, यानी पहले से चार गुना (पेज 64)।

प्रश्न 7. एक खिलौना रेलगाड़ी 1.4 m त्रिज्या की गोल पटरी पर अचर चाल से चलती है और एक चक्कर 11 s में लगाती है (π = 22/7 लीजिए)। (a) उसकी चाल कितनी है? (b) चौथाई चक्कर के बाद उसकी चलित दूरी और विस्थापन का परिमाण कितना है? (c) ठीक 3 चक्कर के बाद माध्य वेग कितना है? (d) चाल अचर है, फिर भी इसे त्वरित गति क्यों कहते हैं, और किसी क्षण उसके वेग की दिशा कैसे बताएँगे?

उत्तर: (a) 0.8 m s<sup>−1</sup>; (b) 2.2 m और लगभग 1.98 m; (c) शून्य; (d) वेग की दिशा बदलती है; स्पर्श रेखा के अनुदिश। (a) परिधि = 2πR = 2 × 22/7 × 1.4 = 8.8 m; चाल = 8.8 ÷ 11 = 0.8 m s<sup>−1</sup> (पेज 66)। (b) दूरी = 8.8 ÷ 4 = 2.2 m। विस्थापन, दो त्रिज्याओं से बने समकोण त्रिभुज का कर्ण है: √(1.4² + 1.4²) = 1.4 × √2 ≈ 1.98 m; यह दूरी से कम है, जैसा होना चाहिए। (c) 3 चक्कर के बाद गाड़ी उसी जगह पर है, विस्थापन शून्य, इसलिए माध्य वेग शून्य (पेज 66)। (d) एकसमान वृत्तीय गति में वेग की दिशा हर क्षण बदलती है, इसलिए वस्तु त्वरित है; किसी बिंदु पर वेग वहाँ वृत्त को छूती स्पर्श रेखा की सीध में, आगे की ओर रहता है (पेज 67)।

प्रश्न 8. एक ढलान पर गेंद को 6 m s<sup>−1</sup> से ऊपर की ओर लुढ़काया गया। ढलान के अनुदिश उसका त्वरण नियत है, 2 m s<sup>−2</sup>, नीचे की ओर। ऊपर की दिशा को धन लीजिए। (a) गेंद कितने समय बाद एक पल को रुकेगी, और तब तक ढलान पर कितना ऊपर जाएगी? (b) 4 s पर उसका वेग और स्थिति क्या होगी? (c) पहले 4 s में कुल चलित दूरी और विस्थापन की तुलना कीजिए।

उत्तर: (a) 3 s, 9 m; (b) −2 m s<sup>−1</sup> (नीचे आ रही), +8 m; (c) दूरी 10 m, विस्थापन 8 m ऊपर की ओर। u = +6 m s<sup>−1</sup>, a = −2 m s<sup>−2</sup> (चिह्न दिशा बताता है, पेज 65)। (a) v = u + at: 0 = 6 − 2t, t = 3 s। s = 6 × 3 − ½ × 2 × 9 = 9 m (पेज 63-64)। (b) v = 6 − 2 × 4 = −2 m s<sup>−1</sup>, यानी गेंद नीचे लौट रही है। s = 6 × 4 − ½ × 2 × 16 = 24 − 16 = +8 m। (c) गेंद 9 m ऊपर गई, फिर 1 m नीचे आई: कुल दूरी 10 m, जबकि विस्थापन 8 m ऊपर की ओर। मुड़कर लौटने पर विस्थापन दूरी से कम हो जाता है (पेज 51)।

9. इस अध्याय पर AI का जवाब कैसे परखें

अंग्रेज़ी में इसी अध्याय के प्रश्न: Class 9 Describing Motion Around Us, questions with answers। AI से पढ़ाई पर और: AI से पढ़ाई कैसे करें, नकल किए बिना।

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स्रोत

सभी 6 नवंबर 2026 को जाँचे गए।

अध्याय की परिभाषाएँ, शब्द और पेज-संख्याएँ ऊपर के दस्तावेज़ों से हैं। इस पेज की सारी व्याख्याएँ, उदाहरण, प्रश्न और उत्तर हमारे अपने हैं; हर संख्या स्क्रिप्ट से जाँची गई है।

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