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कक्षा 8 विज्ञान अध्याय 2 अदृश्य जीव-जगत: Hindi medium नोट्स और 8 प्रश्न-उत्तर
इस गाइड की हिंदी की समीक्षा किसी हिंदी भाषी शिक्षक ने अभी नहीं की है (translation - review pending)।
NCERT की कक्षा 8 की विज्ञान पाठ्यपुस्तक जिज्ञासा (अंग्रेज़ी में Curiosity) का अध्याय 2 है "अदृश्य जीव-जगत: हमारी आँखों की क्षमता से परे" (पेज 8 से 27)। अध्याय दो बड़ी बातें सिखाता है: हर जीव कोशिकाओं से बना है, और हमारे चारों ओर ऐसे बहुत छोटे जीव हैं जिन्हें केवल सूक्ष्मदर्शी से देखा जा सकता है। यह गाइड दो काम करती है:
- अध्याय के मुख्य विचारों को छोटे नोट्स में समझाती है;
- अंत में हमारे अपने 8 प्रश्न देती है, हल और उत्तर के साथ।
पाठ्यपुस्तक साथ में खुली रखें। यहाँ की व्याख्याएँ, उदाहरण और प्रश्न हमारे अपने हैं; अंतिम बात पाठ्यपुस्तक की ही मानें। इसी किताब का पहला अध्याय, हिंदी में: कक्षा 8 विज्ञान अध्याय 1 जिज्ञासा। अंग्रेज़ी में यही अध्याय: Class 8 The Invisible Living World, questions with answers।
यह गाइड सीधे हिंदी में लिखी गई है, पर किसी हिंदी-माध्यम शिक्षक ने अभी इसकी भाषा नहीं जाँची है (native review pending)। प्रश्न हमारे अपने हैं; शिक्षक समीक्षा बाकी है (teacher review pending)।
परीक्षा में यह अध्याय
कक्षा 8 में CBSE की बोर्ड परीक्षा नहीं होती, इसलिए इस अध्याय के लिए CBSE की अंक-तालिका या सैंपल पेपर नहीं है। टेस्ट आपका स्कूल बनाता और जाँचता है। अध्याय के अंत के प्रश्न ज़्यादातर प्रयोग देखकर अनुमान लगाने और कारण बताने वाले हैं, इसलिए नीचे के नोट्स "क्या होगा और क्यों" पर ज़ोर देते हैं।
1. लेंस से सूक्ष्मदर्शी तक
- हमारी आँख एक निश्चित आकार से छोटी चीज़ें नहीं देख पाती। मसूर के दाने जैसे, बीच में मोटे और किनारे पर पतले काँच के टुकड़े को लेंस कहा गया; वह छोटी चीज़ों को बड़ा दिखाता है (पेज 9)।
- 1665 में रॉबर्ट हुक ने माइक्रोग्राफ़िया किताब छापी। उनका सूक्ष्मदर्शी चीज़ों को 200 से 300 गुना बड़ा दिखाता था। कॉर्क की पतली परत में उन्होंने छोटे-छोटे खाने देखे और हर खाने को कोशिका (cell) नाम दिया (पेज 10)।
- ल्यूवेनहॉक ने बेहतर लेंस बनाए और सबसे पहले जीवाणु और रक्त कोशिकाओं जैसे छोटे जीवों को साफ़ देखा; उन्हें सूक्ष्मजीव विज्ञान का जनक कहा जाता है (पेज 10)।
- सूक्ष्मजीव देखने वाला सूक्ष्मदर्शी उन्हें 100 से 400 गुना बड़ा दिखाता है (पेज 17); इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी लगभग 10,00,000 गुना (पेज 24)। कागज़ से बना मोड़कर रखने वाला सस्ता सूक्ष्मदर्शी भी है, जो कम विवरण दिखाता है पर बहुत लोगों तक पहुँचता है (पेज 15)।
2. कोशिका के भाग
| भाग | क्या करता है | किसमें | पेज |
|---|---|---|---|
| कोशिका झिल्ली | कोशिका को घेरती है, एक कोशिका को दूसरी से अलग करती है; यह संरंध्र (छेदों वाली) है, ज़रूरी पदार्थ अंदर और अपशिष्ट बाहर जाने देती है | सभी कोशिकाएँ | 12 |
| कोशिकाद्रव्य | झिल्ली और केंद्रक के बीच भरा भाग; अधिकांश जैव प्रक्रम यहीं होते हैं | सभी कोशिकाएँ | 12 |
| केंद्रक | कोशिका की सारी गतिविधियों और वृद्धि को नियंत्रित करता है; पतली झिल्ली से ढका | पादप, जंतु, कवक कोशिकाएँ (जीवाणु में नहीं) | 12-13 |
| कोशिका भित्ति | झिल्ली के बाहर अतिरिक्त परत; पौधों को मज़बूती और दृढ़ता देती है | पादप, कवक, जीवाणु | 12-13, 24 |
| लवक (हरित लवक) | हरित लवक में पर्णहरित होता है, जो प्रकाश संश्लेषण में मदद करता है; पौधे के अहरित भागों में लवक भंडारण करते हैं | पादप | 13 |
| रसधानी | बड़ा, खाली-सा दिखने वाला स्थान; पदार्थ जमा करती है, अपशिष्ट हटाती है, आकार बनाए रखती है | पादप में बड़ी; जंतु में प्रायः नहीं या छोटी | 13 |
जीवाणु की कोशिका अलग है: उसमें सुस्पष्ट केंद्रक और केंद्रकीय झिल्ली नहीं होती; उसकी जगह केंद्रकाभ होता है (पेज 23-24)। कवक की कोशिकाओं में कोशिका भित्ति होती है, पर हरित लवक नहीं, इसलिए वे अपना भोजन ख़ुद नहीं बना सकते (पेज 24)।
3. कोशिका का आकार उसके काम के हिसाब से
- पेशी कोशिका तर्कुरूपी (spindle जैसी), पतली और लचीली होती है; भोजन नली में ये लहर की तरह सिकुड़ती-फैलती हैं और भोजन को आमाशय तक धकेलती हैं (पेज 13-14)।
- तंत्रिका कोशिका (न्यूरॉन) बहुत लंबी और शाखित होती है, ताकि शरीर के दूर के भागों तक संदेश जल्दी पहुँचा सके (पेज 14)।
- कपोल (गाल) की कोशिकाएँ पतली और चपटी होती हैं और मुँह के भीतर सुरक्षा की परत बनाती हैं (पेज 14)।
- पौधों में भी कोशिकाओं के आकार अलग-अलग हैं; कुछ मिलकर नली जैसी लंबी रचना बनाती हैं, जिससे होकर पानी जड़ से ऊपर तक जाता है (पेज 14)।
4. संगठन के स्तर
कोशिका → ऊतक → अंग → अंग-तंत्र → जीव (पेज 14)। जैसे ईंट दीवार की मूल इकाई है, वैसे ही कोशिका जीवन की मूल इकाई है। समान कोशिकाओं का समूह ऊतक बनाता है, कई ऊतक मिलकर अंग, कई अंग मिलकर अंग-तंत्र, और सब अंग-तंत्र मिलकर पूरा जीव।
- बहुकोशिकीय जीव (पौधे, जंतु, मनुष्य) एक कोशिका, यानी अंडे, से शुरू होते हैं, जो बार-बार विभाजित होकर पूरा जीव बनाती है (पेज 14)। इनमें कोशिकाएँ अलग-अलग काम करती हैं और मिलकर जीने में मदद करती हैं (पेज 23)।
- एककोशिकीय जीव (जीवाणु, प्रोटोज़ोआ जैसे अमीबा) एक ही कोशिका में जीवन के सारे काम कर लेते हैं (पेज 23)।
- किताब का एक रोचक तथ्य: शुतुरमुर्ग के अंडे का पीला भाग (पीतक) सबसे बड़ी ज्ञात एकल कोशिका है (पेज 15)।
5. सूक्ष्मजीव कौन हैं
जो जीव इतने छोटे हैं कि नग्न आँखों से नहीं दिखते, वे सूक्ष्मजीव हैं (पेज 15-16)। वे पानी, मिट्टी, हवा, पौधों और जंतुओं के शरीर में, हमारी आँत में भी, और गरम पानी के सोतों से लेकर बर्फ़ीले इलाकों तक पाए जाते हैं (पेज 18)।
| समूह | उदाहरण | एक या अनेक कोशिकाएँ | पेज |
|---|---|---|---|
| जीवाणु | लैक्टोबैसिलस, राइजोबियम | एककोशिकीय | 15, 23 |
| प्रोटोज़ोआ | अमीबा, पैरामीशियम | एककोशिकीय | 16, 23 |
| कवक | खमीर (एककोशिकीय), फफूँद (बहुकोशिकीय) | दोनों तरह के | 17, 23 |
| शैवाल | स्पाइरुलाइना, क्लोरेला, डायटम | एक या अनेक | 15, 22 |
विषाणु इन सबसे अलग हैं: वे अकोशिकीय हैं और केवल किसी जीवित कोशिका में घुसकर ही अपनी संख्या बढ़ाते हैं; वे पौधों, जंतुओं या जीवाणुओं में रोग फैला सकते हैं (पेज 17, 24)।
6. सूक्ष्मजीव हमारे काम के
- विघटन और खाद: कुछ जीवाणु और कवक गिरी पत्तियों, छिलकों और मृत जंतुओं के जटिल पदार्थों को सरल, पोषक तत्वों वाले पदार्थों में बदल देते हैं। इसे विघटन कहते हैं। पोषक तत्व मिट्टी में लौटते हैं। खाद ठीक तापमान और उचित नमी पर ही बनती है (पेज 19)।
- बायोगैस: ऑक्सीजन रहित जगह में कुछ जीवाणु पौधों-जंतुओं के अपशिष्ट को विघटित करके गैसों का मिश्रण छोड़ते हैं, जिसमें मुख्यतः कार्बन डाइऑक्साइड और बड़ी मात्रा में मीथेन होती है। इसे ईंधन की तरह इस्तेमाल किया जाता है (पेज 20)।
- खमीर (यीस्ट): यह एक कवक है। गरम स्थिति में यह श्वसन करके भोजन तोड़ता है; निकली कार्बन डाइऑक्साइड के बुलबुले आटे को फुलाते हैं, और थोड़ा एल्कोहल अलग गंध देता है। पावरोटी और केक इसी से बनते हैं (पेज 21)।
- लैक्टोबैसिलस: यह जीवाणु दूध की शर्करा (लैक्टोज़) पर पलता है, संख्या बढ़ाता है और दूध को किण्वित करके दही बनाता है। यह लैक्टिक अम्ल बनाता है, इसलिए दही खट्टा होता है। यह भी गरम स्थिति में अच्छा पनपता है (पेज 21-22)। इडली-डोसा के घोल और भटूरे के आटे के किण्वन में भी यह मदद करता है (पेज 21)।
- राइजोबियम: सेम, मटर, मसूर जैसे फलीदार पौधों की जड़ों पर फूली हुई मूल ग्रंथिकाओं में रहता है, हवा से नाइट्रोजन लेकर पौधे के काम का बनाता है। इसीलिए किसान फसल-चक्र में फलीदार फसलें उगाते हैं (पेज 22)।
- सूक्ष्म शैवाल: सूरज की रोशनी से भोजन बनाते हैं, ऑक्सीजन छोड़ते हैं और पृथ्वी की आधी से ज़्यादा ऑक्सीजन देते हैं। स्पाइरुलाइना में उसके भार का 60 प्रतिशत से ज़्यादा प्रोटीन होता है और यह विटामिन B12 का अच्छा स्रोत है (पेज 22-23)।
- अचार और मुरब्बा: इनमें नमक या चीनी की ऊँची मात्रा सूक्ष्मजीवों को पनपने नहीं देती (पेज 18)।
- आनंद मोहन चक्रवर्ती ने 1971 में ऐसा जीवाणु विकसित किया जो रिसकर फैले तेल को तोड़ सकता था (पेज 20)।
हमारा उदाहरण। कोई कोशिका असल में 0.02 mm की है। 400 गुना बड़ा दिखाने वाले सूक्ष्मदर्शी में वह 0.02 × 400 = 8 mm की दिखेगी, जो आँख से आराम से दिखती है।
7. तीन गलतियाँ जो अंक काटती हैं
- "जीवाणु में केंद्रक होता है" लिखना। जीवाणु में सुस्पष्ट केंद्रक नहीं होता; उसमें केंद्रकाभ होता है।
- खमीर को जीवाणु लिखना। खमीर कवक है। दही वाला लैक्टोबैसिलस जीवाणु है।
- "हर पादप कोशिका हरी होती है" मान लेना। हरित लवक केवल हरे भागों में होते हैं; जड़ जैसे अहरित भागों में लवक भंडारण करते हैं।
8. हमारे 8 प्रश्न, उत्तर के साथ
पहले कॉपी पर खुद हल करें, फिर उत्तर देखें। ये प्रश्न हमारे अपने हैं, किताब के क्रियाकलाप या अभ्यास-प्रश्न नहीं। किसी प्रश्न में आपको कुछ छूना, खुरचना या रंगना नहीं है; केवल सोचकर उत्तर देना है।
प्रश्न 1. 300 गुना बड़ा दिखाने वाले सूक्ष्मदर्शी में एक पैरामीशियम 60 mm लंबा दिखता है। (a) असल में वह कितना लंबा है? (b) 100 गुना वाले सूक्ष्मदर्शी में वह कितना लंबा दिखेगा? (c) अगर इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी (लगभग 10,00,000 गुना) में पूरा पैरामीशियम दिख पाता, तो वह कितने मीटर का दिखता?
उत्तर: (a) 0.2 mm; (b) 20 mm; (c) 200 m। (a) असली लंबाई = दिखने वाली लंबाई ÷ आवर्धन = 60 ÷ 300 = 0.2 mm। (b) 0.2 × 100 = 20 mm। (c) 0.2 × 10,00,000 = 2,00,000 mm = 200 m, यानी एक बड़े मैदान जितना। इसीलिए इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी पूरे जीव के बजाय कोशिका के भीतर के छोटे भाग देखने के काम आता है (पेज 24)।
प्रश्न 2. हर कथन सही है या गलत? गलत को ठीक करके लिखिए। (a) आलू के कंद की हर कोशिका में हरित लवक होते हैं। (b) जीवाणु की कोशिका में केंद्रक का कोई भी भाग नहीं होता। (c) मशरूम जैसे कवक की कोशिकाओं में कोशिका भित्ति होती है, फिर भी वह अपना भोजन ख़ुद नहीं बनाता। (d) विषाणु एककोशिकीय सूक्ष्मजीव है। (e) कोशिका झिल्ली पूरी तरह बंद होती है, उससे कुछ भी आर-पार नहीं जाता।
उत्तर: (a) गलत; (b) गलत; (c) सही; (d) गलत; (e) गलत। (a) आलू का कंद ज़मीन के नीचे का अहरित भाग है; वहाँ के लवक भोजन जमा करते हैं, हरित लवक हरे भागों में होते हैं (पेज 13)। (b) जीवाणु में सुस्पष्ट केंद्रक और केंद्रकीय झिल्ली नहीं होती, पर केंद्रकाभ होता है (पेज 23-24)। (c) कवक में कोशिका भित्ति है पर हरित लवक नहीं, इसलिए प्रकाश संश्लेषण नहीं कर सकता (पेज 24)। (d) विषाणु अकोशिकीय है और केवल जीवित कोशिका के अंदर संख्या बढ़ाता है (पेज 17)। (e) झिल्ली संरंध्र है: ज़रूरी पदार्थ अंदर आते हैं और अपशिष्ट बाहर जाता है (पेज 12)।
प्रश्न 3. एक स्कूल की इको-क्लब ने सब्ज़ियों के छिलकों के तीन ढेर बनाए, सब पर मिट्टी की परत डाली। ढेर A: गुनगुनी छाया में, निचोड़े हुए स्पंज जितना नम रखा गया। ढेर B: बिल्कुल सूखा, कभी पानी नहीं डाला गया। ढेर C: ढेर A जैसा ही नम, पर लेह की कड़ाके की सर्दी में बर्फ़ जैसे ठंडे कमरे में रखा गया। (a) किस ढेर में सबसे पहले गहरे रंग की खाद बनेगी? (b) बाकी दो धीमे क्यों रहेंगे? (c) खाद बनने के बाद छिलकों के पोषक तत्व कहाँ जाते हैं?
उत्तर: (a) ढेर A; (b) B में नमी नहीं, C में तापमान बहुत कम; (c) मिट्टी में, फिर पौधों तक। (a) खाद मिट्टी के जीवाणु और कवक बनाते हैं, और यह ठीक तापमान और उचित नमी पर ही होता है (पेज 19); ढेर A में दोनों हैं। (b) ढेर B को नमी नहीं मिली, ढेर C को सही तापमान नहीं मिला, इसलिए वहाँ सूक्ष्मजीव ठीक से काम नहीं कर पाते। (c) विघटन से बने सरल पोषक तत्व मिट्टी में लौटते हैं और पौधों की वृद्धि में मदद करते हैं (पेज 19)।
प्रश्न 4. एक बेकरी में सुबह 9 बजे गुँधे आटे के दो एक-जैसे लोंदे 500 mL के थे। लोंदे P में खमीर मिलाया गया था, लोंदे Q में नहीं। दोनों को गरम जगह रखा गया। दोपहर 12 बजे P का आयतन 800 mL हो गया और Q का 500 mL ही रहा। (a) P का आयतन कितने mL और कितने प्रतिशत बढ़ा? (b) P के अंदर के बुलबुलों में कौन-सी गैस है, और वह कहाँ से आई? (c) P की गंध Q से अलग क्यों है? (d) Q क्यों नहीं फूला?
उत्तर: (a) 300 mL, 60 प्रतिशत; (b) कार्बन डाइऑक्साइड, खमीर के श्वसन से; (c) खमीर का बनाया थोड़ा एल्कोहल; (d) उसमें खमीर नहीं था। (a) 800 − 500 = 300 mL; 300 ÷ 500 × 100 = 60 प्रतिशत। (b) खमीर आटे के भोजन को तोड़कर ऊर्जा लेता है, इसमें कार्बन डाइऑक्साइड निकलती है जो बुलबुले बनाती है (पेज 21)। (c) इसी प्रक्रिया में थोड़ा एल्कोहल भी बनता है, जिससे गंध बदलती है (पेज 21)। (d) गैस बनाने वाला सूक्ष्मजीव ही नहीं था, इसलिए आयतन वही रहा।
प्रश्न 5. रात को दूध के तीन गिलास रखे गए: गिलास X में गुनगुना दूध और एक चम्मच दही; गिलास Y में गुनगुना दूध, दही बिल्कुल नहीं; गिलास Z में गुनगुना दूध और एक चम्मच दही, पर गिलास बर्फ़ से भरे बर्तन में रखा गया। (a) सुबह किस गिलास में अच्छा जमा हुआ दही मिलेगा? (b) बाकी दो में क्या कमी रही? (c) दूध की कौन-सी शर्करा इस्तेमाल होती है, और कौन-सा अम्ल बनता है? (d) खमीर और लैक्टोबैसिलस, दोनों भोजन तोड़ते हैं; दोनों के उत्पाद में एक अंतर बताइए।
उत्तर: (a) X; (b) Y में जीवाणु नहीं, Z में गर्मी नहीं; (c) लैक्टोज़, लैक्टिक अम्ल; (d) खमीर एल्कोहल बनाता है, लैक्टोबैसिलस लैक्टिक अम्ल। (a) X में दही से लैक्टोबैसिलस आया और गुनगुनी स्थिति में वह अच्छा पनपा (पेज 22)। (b) Y में दूध को जमाने वाले जीवाणु डाले ही नहीं गए; Z में जीवाणु थे, पर ठंड में वे ठीक से नहीं पनपते। (c) जीवाणु दूध की शर्करा लैक्टोज़ पर पलते हैं और लैक्टिक अम्ल बनाते हैं, जिससे दही खट्टा होता है (पेज 22)। (d) किताब के अनुसार खमीर की तरह एल्कोहल बनाने के बजाय ये जीवाणु लैक्टिक अम्ल बनाते हैं (पेज 22)।
प्रश्न 6. एक स्कूल के बगीचे में मूँगफली, मक्का और मटर के पौधे सावधानी से उखाड़कर उनकी जड़ें धोई गईं। (a) किन दो पौधों की जड़ों पर छोटी, फूली हुई गाँठें मिलने की संभावना है? (b) इन गाँठों को क्या कहते हैं और इनमें कौन-सा जीवाणु रहता है? (c) अगले मौसम में इसी क्यारी में गेहूँ बोना हो, तो मटर वाली क्यारी क्यों बेहतर रहेगी?
उत्तर: (a) मूँगफली और मटर; (b) मूल ग्रंथिकाएँ, राइजोबियम; (c) मिट्टी में नाइट्रोजन बढ़ चुकी होगी। (a) मूँगफली और मटर फलीदार पौधे हैं; मक्का नहीं है (पेज 22)। (b) फलीदार पौधों की जड़ों पर फूले हुए भाग मूल ग्रंथिकाएँ हैं, जिनमें राइजोबियम रहता है (पेज 22)। (c) राइजोबियम हवा की नाइट्रोजन को पौधे के काम का बनाता है, इसलिए मटर के बाद क्यारी की मिट्टी में नाइट्रोजन पहले से ज़्यादा होगी और गेहूँ को फ़ायदा मिलेगा; फसल-चक्र में फलीदार फसल रखने का यही कारण है (पेज 22)।
प्रश्न 7. एक स्वयं सहायता समूह स्पाइरुलाइना उगाता है। (a) 50 g सूखे स्पाइरुलाइना में कम से कम कितना प्रोटीन होगा? (b) उन्होंने टैंक 1 मार्च को शुरू किया और फ़सल 3 से 6 सप्ताह में तैयार होती है। सबसे जल्दी और सबसे देर से कटाई की तारीख़ क्या होगी? (c) सूक्ष्म शैवाल पूरी पृथ्वी के लिए और कौन-सा बड़ा काम करते हैं?
उत्तर: (a) 30 g से ज़्यादा; (b) 22 मार्च और 12 अप्रैल; (c) पृथ्वी की आधी से ज़्यादा ऑक्सीजन बनाते हैं। (a) प्रोटीन भार के 60 प्रतिशत से ज़्यादा है (पेज 23): 50 × 60 ÷ 100 = 30 g से ज़्यादा। (b) 3 सप्ताह = 21 दिन, 1 मार्च + 21 दिन = 22 मार्च; 6 सप्ताह = 42 दिन, मार्च के बचे 30 दिन के बाद अप्रैल के 12 दिन = 12 अप्रैल। (c) सूरज की रोशनी से भोजन बनाते समय वे ऑक्सीजन छोड़ते हैं और पृथ्वी की कुल ऑक्सीजन का आधे से ज़्यादा हिस्सा बनाते हैं (पेज 22)।
प्रश्न 8. रसोई की टोकरी में रखे एक अमरूद पर चार दिन बाद रुई जैसी परत उग आई। उसी रसोई में आम का अचार (बहुत नमक वाला) और आँवले का मुरब्बा (गाढ़ी चाशनी में) महीनों से ठीक है। (a) अमरूद पर उगी परत किस तरह के जीव हैं? (b) वे अमरूद तक कैसे पहुँचे? (c) अचार और मुरब्बा क्यों नहीं ख़राब हुए?
उत्तर: (a) सूक्ष्मजीव, जैसे फफूँद (कवक); (b) सूक्ष्मजीव हर जगह, हवा में भी, होते हैं; (c) नमक और चीनी की ऊँची मात्रा। (a) फल पर पाउडर जैसी या रुई जैसी परत सूक्ष्मजीवों के उगने से बनती है (पेज 18); फफूँद बहुकोशिकीय कवक है (पेज 23)। (b) सूक्ष्मजीव पानी, मिट्टी, हवा और कुछ खाने की चीज़ों में भी होते हैं, इसलिए खुले रखे फल तक पहुँच जाते हैं (पेज 18)। (c) अचार में भरपूर नमक है और मुरब्बे में भरपूर चीनी; इतनी ज़्यादा मात्रा में सूक्ष्मजीव बढ़ नहीं पाते, इसलिए ये दोनों देर तक टिकते हैं (पेज 18)।
9. इस अध्याय पर AI का जवाब कैसे परखें
- कोशिका के भागों की सूची गिनिए। AI कहे कि जीवाणु में केंद्रक या हरित लवक होता है, या कवक प्रकाश संश्लेषण करता है, तो वह किताब के पेज 23-24 से मेल नहीं खाता।
- सूक्ष्मजीव का समूह पूछिए। खमीर कवक है, लैक्टोबैसिलस और राइजोबियम जीवाणु, अमीबा प्रोटोज़ोआ। AI समूह बदल दे, तो गलत है।
- आवर्धन का हिसाब उलटकर देखिए। दिखने वाला आकार ÷ आवर्धन = असली आकार। AI का उत्तर इस हिसाब से न बैठे, तो दोबारा जाँचिए।
अंग्रेज़ी में यही अध्याय: Class 8 The Invisible Living World, questions with answers। कक्षा 9 में कोशिका पर आगे, हिंदी में: कक्षा 9 विज्ञान अध्याय 2 कोशिका। AI से पढ़ाई पर और: AI से पढ़ाई कैसे करें, नकल किए बिना।
कक्षा 8 विज्ञान का अभ्यास
- छापने लायक, उत्तर के साथ (हिंदी में भी): The Invisible Living World की वर्कशीट और कक्षा 8 की सारी वर्कशीट।
- ऑनलाइन, तुरंत जाँच के साथ: इस अध्याय के अभ्यास प्रश्न।
- इसी किताब के दूसरे अध्याय, हिंदी में: अध्याय 1 जिज्ञासा और अध्याय 5 और 6, बल और दाब।
CMDLearn कहाँ फिट होता है
CMDLearn कक्षा 1 से 10 के लिए हिंदी, मराठी और अंग्रेज़ी में एक AI ट्यूटर बना रहा है, जो एक कदम समझाता है और बच्चे का काम जाँचता है, पर लिखना बच्चे पर छोड़ता है। यह अभी तैयार हो रहा है और अभी कोई बच्चा इसका इस्तेमाल नहीं करता। जब आज़माने को कुछ हो, तब ख़बर पाने के लिए वेटलिस्ट से जुड़ें।
स्रोत
सभी 6 नवंबर 2026 को जाँचे गए।
- NCERT, जिज्ञासा, कक्षा 8 की विज्ञान पाठ्यपुस्तक (हिंदी), अध्याय 2 "अदृश्य जीव-जगत: हमारी आँखों की क्षमता से परे", पेज 8 से 27: ncert.nic.in/textbook/pdf/hhcu102.pdf
- NCERT, Curiosity (अंग्रेज़ी संस्करण), Grade 8, Chapter 2 "The Invisible Living World", Reprint 2026-27: hecu102.pdf
अध्याय की परिभाषाएँ, शब्द, तथ्य और पेज-संख्याएँ ऊपर के दस्तावेज़ों से हैं। इस पेज की सारी व्याख्याएँ, उदाहरण, प्रश्न और उत्तर हमारे अपने हैं; हर संख्या स्क्रिप्ट से जाँची गई है।
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