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कक्षा 7 विज्ञान अध्याय 12 पृथ्वी, चंद्रमा एवं सूर्य: Hindi medium नोट्स और 8 प्रश्न-उत्तर
इस गाइड की हिंदी की समीक्षा किसी हिंदी भाषी शिक्षक ने अभी नहीं की है (translation - review pending)।
NCERT की कक्षा 7 की विज्ञान पाठ्यपुस्तक जिज्ञासा (अंग्रेज़ी में Curiosity) का बारहवाँ और आख़िरी अध्याय "पृथ्वी, चंद्रमा एवं सूर्य" है, पेज 169 से 186 तक। कन्याकुमारी की रश्मिका को सुबह नारियल के पेड़ों की लंबी और दोपहर बाद छोटी छाया दिखती है, और वह सोचती है कि आकाश में घूम कौन रहा है: सूर्य या पृथ्वी? पूरा अध्याय इसी सवाल से तीन बातें समझाता है: पृथ्वी का घूर्णन, पृथ्वी का परिक्रमण और ग्रहण। यह गाइड दो काम करती है:
- अध्याय के मुख्य विचारों को छोटे नोट्स में समझाती है;
- अंत में हमारे अपने 8 प्रश्न देती है, उत्तर के साथ।
पाठ्यपुस्तक साथ में खुली रखें। यहाँ की व्याख्याएँ, उदाहरण और प्रश्न हमारे अपने हैं; अंतिम बात पाठ्यपुस्तक की ही मानें। अंग्रेज़ी में यही अध्याय: Class 7 Earth, Moon, and the Sun, questions with answers।
यह गाइड सीधे हिंदी में लिखी गई है, पर किसी हिंदी-माध्यम शिक्षक ने अभी इसकी भाषा नहीं जाँची है (native review pending)। प्रश्न हमारे अपने हैं; शिक्षक समीक्षा बाकी है (teacher review pending)।
परीक्षा में यह अध्याय
कक्षा 7 में CBSE की बोर्ड परीक्षा नहीं होती, इसलिए इस अध्याय के लिए CBSE की अंक-तालिका या सैंपल पेपर नहीं है। टेस्ट आपका स्कूल बनाता और जाँचता है। अध्याय के अंत के प्रश्नों में रिक्त स्थान, सही-गलत, "क्यों" वाले कारण और चित्र में सूर्य-पृथ्वी-चंद्रमा का क्रम भरना आते हैं (पेज 184-186)।
1. घूर्णन: पृथ्वी का अपनी धुरी पर घूमना
- घूर्णन: किसी वस्तु का एक काल्पनिक रेखा (घूर्णन अक्ष) के चारों ओर घूमना। पृथ्वी का घूर्णन अक्ष भौगोलिक उत्तरी ध्रुव और दक्षिणी ध्रुव से होकर जाता है (पेज 170-171)।
- पृथ्वी एक घूर्णन लगभग 24 घंटे में पूरा करती है। उत्तरी ध्रुव के ऊपर से देखने पर यह वामावर्त, यानी पश्चिम से पूर्व घूमती है (पेज 171)।
- दिन-रात: हर समय पृथ्वी का आधा भाग सूर्य की ओर होता है (दिन) और आधा उससे दूर (रात)। घूर्णन से हर जगह बारी-बारी से दिन और रात आते हैं (पेज 172)।
- सूर्य, चंद्रमा और तारों की आभासी गति: पृथ्वी पश्चिम से पूर्व घूमती है, इसलिए ये पूर्व में उगते और पश्चिम में डूबते दिखते हैं (पेज 173-174)।
- ध्रुव तारा: पृथ्वी का अक्ष उत्तर में ध्रुव तारे के बहुत पास की ओर है, इसलिए ध्रुव तारा लगभग स्थिर दिखता है और बाकी तारे (जैसे सप्तर्षि) उसके चारों ओर घूमते दिखते हैं (पेज 174)।
- किताब बताती है कि आर्यभट ने एक घूर्णन का समय लगभग 23 घंटे 56 मिनट 4.1 सेकंड बताया था, जो आज के मान के बहुत पास है (पेज 175)।
2. परिक्रमण और ऋतुएँ
- परिक्रमण: एक वस्तु का दूसरी के चारों ओर घूमना; जिस पथ पर घूमती है, वह उसकी कक्षा है। पृथ्वी सूर्य की एक परिक्रमा लगभग 365 दिन 6 घंटे में करती है (पेज 175-176)।
- परिक्रमण के कारण सूर्यास्त के बाद दिखने वाले तारे साल भर में धीरे-धीरे बदलते हैं (पेज 176)।
- ऋतुएँ क्यों: पृथ्वी का घूर्णन अक्ष कक्षा के सापेक्ष सीधा नहीं, झुका हुआ है, और पृथ्वी गोल है। जून में उत्तरी गोलार्ध सूर्य की ओर झुका रहता है: वहाँ धूप कम क्षेत्रफल पर पड़ती है, इसलिए तेज़ होती है, और दिन 12 घंटे से लंबा होता है; यही ग्रीष्म ऋतु है। दिसंबर में उलटा होता है (पेज 177-178)।
- दक्षिणी गोलार्ध में उलटा: वहाँ जून में शीत ऋतु और दिसंबर में ग्रीष्म ऋतु होती है (पेज 178)।
- दो गलत कारण: "झुकने पर सूर्य के पास हो जाना" और "अंडाकार कक्षा से दूरी बदलना" ऋतुओं के कारण नहीं हैं; दूरियों का अंतर बहुत कम है, और पृथ्वी तो जनवरी में सूर्य के सबसे पास होती है (पेज 179)।
| तारीख (लगभग) | उत्तरी गोलार्ध में नाम | क्या ख़ास है | पेज |
|---|---|---|---|
| 21 जून | उत्तर-अयनांत | सबसे लंबा दिन | 179 |
| 22 दिसंबर | दक्षिण-अयनांत | सबसे छोटा दिन, सबसे लंबी रात | 179 |
| 21 मार्च | वसंत विषुव | दिन और रात 12-12 घंटे | 179 |
| 23 सितंबर | हेमंत विषुव | दिन और रात 12-12 घंटे | 179 |
विषुवत रेखा पर हमेशा लगभग 12 घंटे दिन और 12 घंटे रात रहती है, इसलिए विषुवत रेखा के पास के दक्षिणी राज्यों में ऋतुओं का असर बहुत साफ़ नहीं दिखता (पेज 179)।
3. ग्रहण
- आभासी आकार: कोई चीज़ कितनी बड़ी दिखती है, यह उसके असली आकार और हमसे उसकी दूरी, दोनों पर निर्भर है। चंद्रमा सूर्य से बहुत छोटा है पर बहुत पास है, इसलिए आकाश में दोनों लगभग बराबर दिखते हैं (पेज 180)।
- सूर्य-ग्रहण: चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी के बीच आकर सूर्य का प्रकाश रोक देता है। जिस छोटे क्षेत्र पर चंद्रमा की पूरी छाया पड़ती है, वहाँ पूर्ण सूर्य-ग्रहण; आसपास आंशिक सूर्य-ग्रहण दिखता है। पूर्ण ग्रहण किसी एक जगह कुछ ही मिनट रहता है (पेज 180-181)।
- बुध और शुक्र चंद्रमा से बड़े हैं, पर बहुत दूर हैं, इसलिए उनका आभासी आकार सूर्य से बहुत छोटा है; वे सूर्य को ढक नहीं सकते (पेज 180)।
- सुरक्षा: ग्रहण के समय भी सूर्य आँखों को नुकसान पहुँचा सकता है। उसे सीधे, धूप के चश्मे से, दूरबीन से या टेलीस्कोप से कभी न देखें। तारामंडल या खगोल क्लबों के कार्यक्रम सबसे अच्छा तरीका हैं (पेज 181)।
- चंद्र-ग्रहण: पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच आकर चंद्रमा तक धूप रोक देती है। पूर्ण चंद्र-ग्रहण में चंद्रमा गहरा लाल दिखता है, और इसे नंगी आँखों से देखना सुरक्षित है (पेज 182-183)।
4. तीन गलतियाँ जो अंक काटती हैं
- घूर्णन और परिक्रमण को उलट देना। दिन-रात घूर्णन से होते हैं; ऋतुएँ परिक्रमण और अक्ष के झुकाव से।
- ऋतु का कारण दूरी लिखना। किताब साफ़ कहती है कि दूरी का अंतर बहुत कम है; कारण झुकाव और गोल आकार है।
- ग्रहण में क्रम गलत लिखना। सूर्य-ग्रहण: सूर्य, चंद्रमा, पृथ्वी (चंद्रमा बीच में)। चंद्र-ग्रहण: सूर्य, पृथ्वी, चंद्रमा (पृथ्वी बीच में)।
5. हमारे 8 प्रश्न, उत्तर के साथ
पहले कॉपी पर खुद हल करें, फिर उत्तर देखें। ये प्रश्न हमारे अपने हैं, किताब के क्रियाकलाप या अभ्यास-प्रश्न नहीं।
प्रश्न 1. इन चार राज्य-राजधानियों को उस क्रम में लिखिए जिसमें वहाँ सूर्योदय मोटे तौर पर पहले होता है: अहमदाबाद (गुजरात), ईटानगर (अरुणाचल प्रदेश), भोपाल (मध्य प्रदेश), भुवनेश्वर (ओडिशा)। कारण भी लिखिए।
उत्तर: ईटानगर, भुवनेश्वर, भोपाल, अहमदाबाद। पृथ्वी पश्चिम से पूर्व घूमती है, इसलिए भारत का पूर्वी भाग पहले सूर्य के सामने आता है और वहाँ सूर्योदय पहले होता है (पेज 171-172)। ये चारों पूर्व से पश्चिम की ओर इसी क्रम में हैं: ईटानगर सबसे पूर्व में, अहमदाबाद सबसे पश्चिम में।
प्रश्न 2. आर्यभट के अनुसार पृथ्वी एक घूर्णन लगभग 23 घंटे 56 मिनट 4.1 सेकंड में करती है (पेज 175)। (a) यह 24 घंटे से कितना कम है? (b) यह अंतर 15 दिनों में जुड़कर कितना हो जाएगा, लगभग कितने मिनट?
उत्तर: (a) 3 मिनट 55.9 सेकंड; (b) 3538.5 सेकंड, लगभग 59 मिनट। (a) 24 घंटे = 86400 सेकंड; 23 घंटे 56 मिनट 4.1 सेकंड = 82800 + 3360 + 4.1 = 86164.1 सेकंड। अंतर = 86400 − 86164.1 = 235.9 सेकंड = 3 मिनट 55.9 सेकंड। (b) 15 × 235.9 = 3538.5 सेकंड, यानी 3538.5 ÷ 60 ≈ 59 मिनट, लगभग एक घंटा।
प्रश्न 3. समीर का परिवार जून में दिल्ली से दक्षिण अफ़्रीका के केप टाउन (दक्षिणी गोलार्ध) घूमने जा रहा है। (a) वहाँ उस समय कौन-सी ऋतु होगी? (b) केप टाउन में जून में दिन 12 घंटे से लंबा होगा या छोटा? (c) उसी समय दिल्ली में दिन कैसा होगा?
उत्तर: (a) शीत ऋतु; (b) 12 घंटे से छोटा; (c) 12 घंटे से लंबा। जून में उत्तरी गोलार्ध सूर्य की ओर और दक्षिणी गोलार्ध सूर्य से दूर झुका होता है। दक्षिणी गोलार्ध में ऋतुएँ और दिन की लंबाई उत्तरी गोलार्ध से उलटी होती हैं: वहाँ जून में ठंड और छोटे दिन (पेज 177-178)। इसलिए समीर को गरम कपड़े ले जाने चाहिए।
प्रश्न 4. तनु कहती है, "गर्मी इसलिए पड़ती है क्योंकि तब पृथ्वी सूर्य के सबसे पास होती है।" किताब की बातों से दो कारण दीजिए कि यह सही क्यों नहीं है।
उत्तर: पहला, पृथ्वी जनवरी में सूर्य के सबसे पास होती है, जब भारत में सर्दी होती है। दूसरा, अगर दूरी कारण होती तो दोनों गोलार्धों में एक साथ गर्मी पड़ती, पर उनकी ऋतुएँ उलटी होती हैं। किताब यह भी बताती है कि दूरियों का अंतर बहुत कम है; ऋतुओं का असली कारण अक्ष का झुकाव और पृथ्वी का गोल आकार है (पेज 177-179)।
प्रश्न 5. (a) 21 मार्च को श्रीनगर और कन्याकुमारी, दोनों में दिन लगभग कितने घंटे का होगा? (b) जून और दिसंबर के दिन की लंबाई में ज़्यादा अंतर किस शहर में होगा, और क्यों? (c) जिस दिन उत्तरी गोलार्ध में सबसे लंबा दिन होता है, उस दिन का नाम क्या है?
उत्तर: (a) लगभग 12 घंटे; (b) श्रीनगर में; (c) उत्तर-अयनांत (लगभग 21 जून)। (a) 21 मार्च वसंत विषुव है; उस दिन दिन और रात बराबर, यानी लगभग 12 घंटे के रहते हैं (पेज 179)। (b) कन्याकुमारी विषुवत रेखा के बहुत पास है, जहाँ दिन लगभग हमेशा 12 घंटे का रहता है और ऋतुओं का असर कम दिखता है; श्रीनगर उससे बहुत उत्तर में है, इसलिए वहाँ जून और दिसंबर के दिन में अंतर कहीं ज़्यादा होता है (पेज 179)। (c) पेज 179।
प्रश्न 6. आँख से 60 cm दूर पकड़ा 2 cm चौड़ा एक सिक्का, सामने की 2 m (200 cm) चौड़ी पानी की टंकी को ठीक-ठीक ढक लेता है। (a) टंकी आपसे कितनी दूर है? (b) अगर टंकी 30 m दूर हो, तो क्या सिक्का उसे पूरा ढक पाएगा?
उत्तर: (a) 60 m; (b) नहीं। (a) दोनों ठीक बराबर दिखते हैं, तो आकार ÷ दूरी दोनों के लिए बराबर है: 2 ÷ 60 = 200 ÷ दूरी, इसलिए दूरी = 200 × 60 ÷ 2 = 6000 cm = 60 m। (b) 30 m (3000 cm) पर टंकी के लिए आकार ÷ दूरी = 200 ÷ 3000, जो सिक्के के 2 ÷ 60 का दोगुना है; टंकी अब सिक्के से दोगुनी बड़ी दिखेगी, इसलिए सिक्का उसे पूरा नहीं ढकेगा। यही आभासी आकार है: चंद्रमा पास होने से सूर्य जितना बड़ा दिखता है (पेज 180)।
प्रश्न 7. (a) सूर्य-ग्रहण और चंद्र-ग्रहण में सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा का क्रम लिखिए। (b) बुध और शुक्र, दोनों चंद्रमा से बड़े हैं और पृथ्वी तथा सूर्य के बीच से गुज़रते हैं। फिर वे सूर्य-ग्रहण क्यों नहीं करते?
उत्तर: (a) सूर्य-ग्रहण: सूर्य, चंद्रमा, पृथ्वी; चंद्र-ग्रहण: सूर्य, पृथ्वी, चंद्रमा; (b) वे बहुत दूर हैं, इसलिए बहुत छोटे दिखते हैं। (a) सूर्य-ग्रहण में चंद्रमा बीच में आकर पृथ्वी तक धूप रोकता है; चंद्र-ग्रहण में पृथ्वी बीच में आकर चंद्रमा तक धूप रोकती है (पेज 180, 182)। (b) उनका आभासी आकार सूर्य से बहुत छोटा है; शुक्र सूर्य के आगे से गुज़रे, तो बस एक छोटा काला बिंदु दिखता है (पेज 180)।
प्रश्न 8. स्कूल में सूर्य-ग्रहण दिखाने के लिए शिक्षक ने एक छोटे दर्पण से सूर्य का प्रतिबिंब कक्षा की दीवार पर डालने की व्यवस्था की है। (a) दीवार पर बना प्रतिबिंब देखना, सूर्य को सीधे देखने से सुरक्षित क्यों है? (b) इस व्यवस्था के लिए किताब कौन-सी दो सावधानियाँ बताती है? (c) रोहन कहता है, "ग्रहण में तो सूर्य ढका होता है, मैं धूप का चश्मा पहनकर सीधे देख लूँगा।" यह गलत क्यों है?
उत्तर: (a) हम दीवार को देखते हैं, सूर्य को नहीं; (b) व्यवस्था शिक्षक ही लगाएँ, और परावर्तित प्रकाश किसी की आँखों में न जाए; (c) ग्रहण में भी सूर्य आँखें ख़राब कर सकता है। (a) आँखें सूर्य की ओर नहीं, दीवार पर बने प्रतिबिंब की ओर होती हैं, इसलिए सूर्य का तेज़ प्रकाश सीधे आँखों में नहीं जाता। (b) किताब कहती है कि यह प्रयोग केवल शिक्षक की देखरेख में हो और दर्पण से लौटी किरण किसी की आँखों पर न डाली जाए (पेज 182)। (c) ग्रहण के समय भी सूर्य इतना तेज़ होता है कि आँखों को नुकसान पहुँचा सकता है, यहाँ तक कि अंधापन भी; उसे सीधे, धूप के चश्मे से, दूरबीन से या टेलीस्कोप से नहीं देखना चाहिए (पेज 181)। सबसे अच्छा तरीका तारामंडल या खगोल क्लब का ग्रहण-दर्शन कार्यक्रम है, जहाँ आँखों की सही सुरक्षा मिलती है (पेज 181)।
6. इस अध्याय पर AI का जवाब कैसे परखें
- "घूर्णन या परिक्रमण?" पूछिए। AI दिन-रात का कारण परिक्रमण बताए, या ऋतुओं का कारण घूर्णन, तो वह गलत है।
- दूरी वाला कारण पकड़िए। AI ऋतुओं का कारण "सूर्य से दूरी" बताए, तो किताब का पेज 179 दिखाइए।
- सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं। AI किसी भी तरीके से सूर्य को सीधे या धूप के चश्मे से देखने को कहे, तो वह सलाह न मानें।
अंग्रेज़ी में इसी अध्याय के प्रश्न: Class 7 Earth, Moon, and the Sun, questions with answers। AI से पढ़ाई पर और: AI से पढ़ाई कैसे करें, नकल किए बिना।
कक्षा 7 विज्ञान का अभ्यास
- छापने लायक, उत्तर के साथ: कक्षा 7 की वर्कशीट।
- ऑनलाइन, तुरंत जाँच के साथ: कक्षा 7 का अभ्यास।
- पूरी किताब के अध्याय एक जगह (अंग्रेज़ी में): Class 7 Science question answer।
CMDLearn कहाँ फिट होता है
CMDLearn कक्षा 1 से 10 के लिए हिंदी, मराठी और अंग्रेज़ी में एक AI ट्यूटर बना रहा है, जो एक कदम समझाता है और बच्चे का काम जाँचता है, पर लिखना बच्चे पर छोड़ता है। यह अभी तैयार हो रहा है और अभी कोई बच्चा इसका इस्तेमाल नहीं करता। जब आज़माने को कुछ हो, तब ख़बर पाने के लिए वेटलिस्ट से जुड़ें।
स्रोत
सभी 6 नवंबर 2026 को जाँचे गए।
- NCERT, जिज्ञासा, कक्षा 7 की विज्ञान पाठ्यपुस्तक (हिंदी), अध्याय 12 "पृथ्वी, चंद्रमा एवं सूर्य", पेज 169 से 186: ncert.nic.in/textbook/pdf/ghcu112.pdf
- NCERT, Curiosity (अंग्रेज़ी संस्करण, Reprint 2026-27), कक्षा 7, अध्याय 12 का अंग्रेज़ी पाठ: ncert.nic.in/textbook/pdf/gecu112.pdf
अध्याय की परिभाषाएँ, शब्द और पेज-संख्याएँ ऊपर के दस्तावेज़ों से हैं (पेज हिंदी किताब के हैं)। राजधानियों का पूर्व-पश्चिम क्रम सामान्य भूगोल है। इस पेज की सारी व्याख्याएँ, उदाहरण, प्रश्न और उत्तर हमारे अपने हैं; हर संख्या स्क्रिप्ट से जाँची गई है।
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