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कक्षा 7 विज्ञान अध्याय 11 प्रकाश: छाया एवं परावर्तन (जिज्ञासा): Hindi medium नोट्स और 8 प्रश्न-उत्तर
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जिज्ञासा कक्षा 7 के लिए NCERT की नई विज्ञान पाठ्यपुस्तक का हिंदी संस्करण है; अंग्रेज़ी में यही किताब Curiosity है। इसका अध्याय 11 "प्रकाश: छाया एवं परावर्तन" है, छपे हुए पेज 153 से 168 तक। अंग्रेज़ी किताब में इसका नाम "Light: Shadows and Reflections" है। यह गाइड दो काम करती है:
- अध्याय की हर मुख्य बात छोटे नोट्स में, हमारे अपने उदाहरणों के साथ समझाती है;
- अंत में हमारे अपने 8 प्रश्न देती है, उत्तर और पेज संख्या के साथ।
पाठ्यपुस्तक साथ में खुली रखें। यहाँ की व्याख्याएँ, उदाहरण और प्रश्न हमारे अपने हैं; अंतिम बात पाठ्यपुस्तक की ही मानें। अंग्रेज़ी में यही अध्याय: Class 7 Light: Shadows and Reflections, 8 practice questions with answers।
यह गाइड सीधे हिंदी में लिखी गई है, पर किसी हिंदी-माध्यम शिक्षक ने अभी इसकी भाषा नहीं जाँची है (native review pending)।
पहले देखें कि आपकी किताब सही है
नई जिज्ञासा का प्रथम संस्करण मई 2025 में छपा, और अभी की प्रति पर "पुनर्मुद्रण अप्रैल 2026" और हर पेज के नीचे "Reprint 2026-27" लिखा है। पुरानी किताब (2024-25 तक) में भी अध्याय 11 का नाम "प्रकाश" था, पर उसमें अवतल-उत्तल दर्पण और लेंस पढ़ाए जाते थे। नई किताब के इस अध्याय में लेंस नहीं हैं: इसमें प्रकाश के स्रोत, छाया, समतल दर्पण, सूचीछिद्र कैमरा, परिदर्शी और बहुमूर्तिदर्शी हैं। इसलिए इंटरनेट पर "लेंस" या "गोलीय दर्पण" वाले हल पुरानी किताब के हैं।
1. प्रकाश के स्रोत: दीप्त और अदीप्त पिंड
अपनी रोशनी खुद पैदा करने वाले पिंड दीप्त पिंड हैं; जिनके पास अपनी रोशनी नहीं होती, वे अदीप्त पिंड हैं (पेज 154)। धरती को रोशनी मुख्य रूप से सूर्य से मिलती है। आकाश के तारे, बिजली की चमक (तड़ित), आग और जुगनू जैसे कुछ जीव भी खुद रोशनी देते हैं। इंसान ने पहले आग से और फिर बिजली से कृत्रिम रोशनी बनाना सीखा।
हमारा उदाहरण: जलती हुई मोमबत्ती दीप्त है। उसके पास रखा काँच का गिलास भी चमकता दिखता है, पर मोमबत्ती बुझते ही अंधेरे में गिलास दिखना बंद हो जाता है। गिलास अदीप्त है: वह मोमबत्ती की रोशनी को ही आगे भेज रहा था। चंद्रमा भी अदीप्त है; वह सूर्य के प्रकाश को परावर्तित करता है (पेज 154)।
2. प्रकाश सरल रेखा में गमन करता है
किताब के प्रयोग दिखाते हैं कि प्रकाश सरल रेखा (सीधी रेखा) में चलता है: जब रास्ता सीधा न हो, तो रोशनी आगे नहीं पहुँचती (पेज 155)। किताब यह भी बताती है कि प्रकाश कभी-कभी किसी वस्तु के किनारों के पास थोड़ा मुड़ सकता है, जो आप ऊँची कक्षाओं में पढ़ेंगे (पेज 156)।
हमारा उदाहरण: किसी ऊँची दीवार के पीछे खड़े दोस्त को आप देख नहीं पाते, जबकि उसकी आवाज़ सुन लेते हैं। उससे आने वाली रोशनी दीवार के ऊपर से मुड़कर आपकी आँख तक नहीं आती।
3. पारदर्शी, पारभासी और अपारदर्शी पदार्थ
- पारदर्शी: रोशनी लगभग पूरी निकल जाती है, और उस पार की चीज़ साफ़ दिखती है।
- पारभासी: रोशनी का कुछ ही भाग निकलता है, और उस पार की चीज़ धुंधली दिखती है।
- अपारदर्शी: रोशनी बिल्कुल नहीं निकलती (पेज 157)।
हमारे उदाहरण: साफ़ पानी से भरी पारदर्शी बोतल, पतंग का पतला कागज़ (पारभासी), और ईंट या लकड़ी का तख़्ता (अपारदर्शी)।
4. छाया कैसे बनती है
प्रकाश सरल रेखा में चलता है, इसलिए जब कोई अपारदर्शी वस्तु उसके रास्ते में आती है, तो उसके पीछे जहाँ प्रकाश नहीं पहुँचता, वहाँ एक काली आकृति बनती है। इसे छाया कहते हैं (पेज 157)। छाया देखने के लिए तीन चीज़ें चाहिए (पेज 158):
- एक प्रकाश स्रोत,
- एक अपारदर्शी वस्तु,
- एक पर्दा, जैसे दीवार, फ़र्श या ज़मीन, जिस पर छाया पड़ सके।
छाया कितनी गहरी होगी, यह पदार्थ पर टिका है: अपारदर्शी चीज़ की छाया सबसे गहरी, पारभासी की उससे हल्की, और कुछ पारदर्शी चीज़ों की भी एक धुंधली-सी छाया पड़ सकती है (पेज 158)। छाया की आकृति, आमाप (साइज़) और स्पष्टता इस पर निर्भर है कि वस्तु, प्रकाश स्रोत और पर्दे के बीच कहाँ रखी है। अपारदर्शी वस्तु का रंग बदलने से उसकी छाया का रंग नहीं बदलता (पेज 159)।
5. प्रकाश का परावर्तन
दर्पण या कोई चमकीली, सपाट सतह उस पर गिरने वाली रोशनी को दूसरी दिशा में मोड़ देती है। दर्पण से टकराकर रोशनी का यह मुड़ना प्रकाश का परावर्तन कहलाता है (पेज 160)। प्रकाश परावर्तन से पहले और बाद में, दोनों बार सीधी रेखा में ही चलता है; केवल उसकी दिशा मुड़ती है।
6. समतल दर्पण में प्रतिबिंब
दर्पण में जो दिखता है, वह वस्तु का प्रतिबिंब है; वस्तु दर्पण के सामने है और प्रतिबिंब दर्पण के पीछे बना दिखता है (पेज 161)। समतल दर्पण के प्रतिबिंब की चार बातें याद रखें (पेज 161-162 और सारांश, पेज 165):
| बात | समतल दर्पण का प्रतिबिंब |
|---|---|
| आमाप | वस्तु के समान |
| सीधा या उल्टा | सीधा (ऊपर वाला सिरा ऊपर ही) |
| पर्दे पर | प्राप्त नहीं किया जा सकता |
| बायाँ-दायाँ | बदल जाता है: पार्श्व उत्क्रमण |
आप दर्पण के पास जाएँ तो प्रतिबिंब भी दर्पण के पास बनता है, दूर जाएँ तो दूर (पेज 162)।
हमारा उदाहरण: आप घड़ी बाएँ हाथ में पहनते हैं, तो दर्पण वाला "आप" उसे दाएँ हाथ में पहने दिखता है, पर उसका सिर ऊपर ही रहता है।
7. सूचीछिद्र कैमरा
सूचीछिद्र कैमरा डिब्बे जैसा एक उपकरण है: सामने की चीज़ की रोशनी एक बहुत छोटे छेद (सूचीछिद्र) से अंदर आती है और पीछे के पर्दे पर उस चीज़ का प्रतिबिंब बना देती है (पेज 162)। यह प्रतिबिंब उल्टा (ऊर्ध्वाधरतः उत्क्रमित) होता है, यानी ऊपर का भाग नीचे दिखता है। दर्पण का प्रतिबिंब ऊपर-नीचे नहीं, बल्कि बाएँ-दाएँ से उलटता है (पेज 163-164)। एक बड़ा फ़र्क और: सूचीछिद्र कैमरे का प्रतिबिंब पर्दे पर बनता है, समतल दर्पण का नहीं।
8. परिदर्शी और बहुमूर्तिदर्शी
- परिदर्शी (पेरिस्कोप): एक मुड़ा हुआ, Z जैसा बॉक्स, जिसके दोनों मोड़ों पर एक-एक समतल दर्पण लगा है। प्रकाश एक दर्पण से, फिर दूसरे से परावर्तित होकर आँख तक आता है, इसलिए वे चीज़ें दिखती हैं जो सीधे नहीं दिखतीं। पनडुब्बियों, टैंकों और बंकरों से बाहर देखने में इसका उपयोग होता है (पेज 164)।
- बहुमूर्तिदर्शी (कैलाइडोस्कोप): त्रिभुज में जुड़ी तीन समतल दर्पण-पट्टियाँ। रोशनी तीनों दर्पणों के बीच बार-बार परावर्तित होती है, इसलिए हर मनके की कई छवियाँ बनती हैं और सब मिलकर एक सजा हुआ प्रतिरूप (पैटर्न) दिखाती हैं; नली घुमाइए, तो प्रतिरूप बदल जाता है (पेज 164-165)।
9. तीन गलतियाँ जो अक्सर होती हैं
- "जो चमके, वह दीप्त है।" नहीं: दर्पण, चंद्रमा और चमकीली थाली चमकते हैं, पर अपना प्रकाश नहीं देते। ये अदीप्त हैं।
- "दर्पण में प्रतिबिंब उल्टा बनता है।" समतल दर्पण का प्रतिबिंब सीधा होता है; केवल बायाँ-दायाँ बदलता है। उल्टा (सिर नीचे) प्रतिबिंब सूचीछिद्र कैमरा बनाता है।
- "छाया के लिए बस वस्तु और रोशनी काफ़ी है।" पर्दा भी चाहिए: छाया दीवार, फ़र्श या ज़मीन जैसी किसी सतह पर ही दिखती है।
10. हमारे 8 प्रश्न, उत्तर के साथ
पहले कॉपी पर खुद उत्तर लिखें, फिर नीचे देखें। ये प्रश्न हमारे अपने हैं, किताब के क्रियाकलाप या "आइए, और अधिक सीखें" वाले प्रश्न नहीं।
प्रश्न 1. दीवाली की रात मेज़ पर मिट्टी का एक जलता दीया रखा है और उसके पास चाँदी की एक थाली। दोनों चमकते दिखते हैं। (a) इनमें दीप्त पिंड कौन-सा है? (b) दीया बुझा दें और कमरे में कोई और रोशनी न हो, तो क्या थाली चमकती दिखेगी? क्यों?
उत्तर: (a) दीया; (b) नहीं। (a) दीये की लौ, यानी अग्नि, अपना प्रकाश स्वयं उत्सर्जित करती है, इसलिए दीया दीप्त है। (b) थाली अपना प्रकाश नहीं देती, वह अदीप्त है। वह दीये की रोशनी को परावर्तित करके चमक रही थी। दीया बुझते ही उस पर कोई प्रकाश नहीं पड़ता, इसलिए अंधेरे में वह नहीं दिखेगी। (दीप्त और अदीप्त पिंड, पेज 154; परावर्तन, पेज 160।)
प्रश्न 2. एक अंधेरे कमरे की खपरैल की छत में एक छोटा छेद है। दोपहर में उस छेद से धूप आती है, और हवा में उड़ती धूल के कारण छेद से फ़र्श तक रोशनी की एक पतली, सीधी पट्टी दिखती है। फ़र्श पर एक चमकीला धब्बा बनता है। (a) पट्टी सीधी क्यों है? (b) अगर आप पट्टी के बीच में अपनी हथेली रख दें, तो फ़र्श के धब्बे का क्या होगा?
उत्तर: (a) प्रकाश सरल रेखा में चलता है; (b) धब्बा मिट जाएगा, वहाँ हथेली की छाया पड़ेगी। (a) छेद से आने वाला प्रकाश सरल रेखा में चलता है, इसलिए उसका रास्ता एक सीधी पट्टी जैसा दिखता है। (b) हथेली अपारदर्शी है। वह प्रकाश का रास्ता रोक लेती है, और प्रकाश मुड़कर उसके पीछे नहीं पहुँचता। फ़र्श के उस भाग पर रोशनी नहीं पहुँचती, इसलिए धब्बे की जगह हथेली की छाया बनती है, और रोशनी हथेली पर दिखती है। (सरल रेखा में गमन, पेज 155; छाया, पेज 157।)
प्रश्न 3. मीना की कक्षा में तीन बच्चे एक जैसा खाना लाए हैं: पराठा और भिंडी। सलीम का टिफ़िन साफ़ प्लास्टिक का है, तनु का दूधिया (हल्के सफ़ेद) प्लास्टिक का, और अजय का स्टील का। तीनों के ढक्कन बंद हैं। (a) तीनों टिफ़िन के पदार्थ पारदर्शी, पारभासी या अपारदर्शी, क्या हैं? (b) ढक्कन खोले बिना, किस टिफ़िन में मीना पहचान लेगी कि अंदर पराठा और भिंडी है, किसमें उसे बस धुंधली आकृतियाँ दिखेंगी, और किसमें कुछ भी नहीं?
उत्तर: (a) साफ़ प्लास्टिक पारदर्शी, दूधिया प्लास्टिक पारभासी, स्टील अपारदर्शी; (b) सलीम के टिफ़िन में पहचान लेगी, तनु के में धुंधली आकृतियाँ, अजय के में कुछ नहीं। (a) साफ़ प्लास्टिक से रोशनी लगभग पूरी निकल जाती है, इसलिए वह पारदर्शी है। दूधिया प्लास्टिक से रोशनी का कुछ ही भाग निकलता है, इसलिए वह पारभासी है। स्टील से रोशनी बिल्कुल नहीं निकलती, इसलिए वह अपारदर्शी है। (b) खाने से लौटी रोशनी साफ़ प्लास्टिक से पूरी बाहर आती है, इसलिए खाना साफ़ दिखता है; दूधिया प्लास्टिक से थोड़ी ही आती है, इसलिए बस धुंधली आकृतियाँ दिखती हैं; स्टील से कोई रोशनी बाहर नहीं आती, इसलिए अंदर का कुछ नहीं दिखता। (पारदर्शी, पारभासी और अपारदर्शी, पेज 157।)
प्रश्न 4. रिया रात में खुले मैदान में खड़ी है। वह टॉर्च सीधे ऊपर आसमान की ओर करती है और रोशनी के आगे अपना हाथ रखती है, पर उसे हाथ की छाया कहीं नहीं दिखती। फिर वह टॉर्च पास की एक सफ़ेद दीवार की ओर करती है, तो दीवार पर हाथ की छाया साफ़ दिखती है। पहली बार छाया क्यों नहीं दिखी?
उत्तर: पहली बार कोई पर्दा नहीं था। छाया देखने के लिए तीन चीज़ें चाहिए: प्रकाश स्रोत, अपारदर्शी वस्तु और पर्दा। पहली बार टॉर्च (स्रोत) और हाथ (अपारदर्शी वस्तु) तो थे, पर हाथ के पीछे आसमान था, कोई सतह नहीं, जहाँ अंधेरा भाग दिख सके। दीवार की ओर करने पर दीवार ने पर्दे का काम किया, इसलिए छाया दिखी। (छाया बनना, पेज 157-158।)
प्रश्न 5. आर्यन की टी-शर्ट के सामने एक तीर छपा है, जो उसके दाएँ हाथ की ओर इशारा करता है। वह एक बड़े समतल दर्पण के सामने खड़ा है। (a) दर्पण वाले आर्यन की टी-शर्ट का तीर उस आर्यन के किस हाथ की ओर इशारा करता दिखेगा? (b) क्या प्रतिबिंब का सिर नीचे और पैर ऊपर दिखेंगे? (c) तीर का प्रतिबिंब छपे तीर से बड़ा होगा, छोटा या बराबर? (d) अगर दर्पण के पीछे एक पर्दा रख दें, तो क्या तीर का प्रतिबिंब पर्दे पर आएगा?
उत्तर: (a) बाएँ हाथ की ओर; (b) नहीं; (c) बराबर; (d) नहीं। (a) समतल दर्पण में बायाँ-दायाँ बदल जाता है, यानी पार्श्व उत्क्रमण होता है। आर्यन का दायाँ भाग प्रतिबिंब में उसका बायाँ भाग बन जाता है, इसलिए तीर प्रतिबिंब वाले आर्यन के बाएँ हाथ की ओर दिखेगा। (b) प्रतिबिंब सीधा बनता है, ऊपर का भाग ऊपर ही रहता है। (c) समतल दर्पण का प्रतिबिंब वस्तु के बराबर आमाप का बनता है। (d) समतल दर्पण का प्रतिबिंब पर्दे पर प्राप्त नहीं किया जा सकता। (समतल दर्पण से प्रतिबिंब, पेज 161-162।)
प्रश्न 6. स्कूल के मैदान में एक ऊँचा झंडा-स्तंभ है, जिसके सबसे ऊपर झंडा लहरा रहा है। (a) सूचीछिद्र कैमरे के पर्दे पर स्तंभ का जो प्रतिबिंब बनेगा, उसमें झंडा ऊपर दिखेगा या नीचे? (b) यही स्तंभ आप एक समतल दर्पण में देखें, तो झंडा ऊपर दिखेगा या नीचे?
उत्तर: (a) नीचे; (b) ऊपर। (a) सूचीछिद्र कैमरा उल्टा (ऊर्ध्वाधरतः उत्क्रमित) प्रतिबिंब बनाता है। स्तंभ का ऊपरी सिरा पर्दे पर नीचे आता है, इसलिए झंडा नीचे दिखेगा, और स्तंभ का निचला सिरा ऊपर। (b) समतल दर्पण का प्रतिबिंब सीधा होता है, इसलिए झंडा ऊपर ही दिखेगा; दर्पण में केवल बायाँ-दायाँ बदलता है। (सूचीछिद्र कैमरा, पेज 162-164; समतल दर्पण, पेज 161।)
प्रश्न 7. पूजा बहुमूर्तिदर्शी बना रही है। उसके पास दर्पण की एक ही पट्टी है, इसलिए वह बाकी दो की जगह काले चार्ट पेपर की पट्टियाँ लगा देती है। अंदर रंगीन मनके भी रखती है। (a) उसे पहले जैसे भरे हुए, दोहराते प्रतिरूप दिखेंगे या नहीं? (b) कारण बताइए।
उत्तर: (a) नहीं; (b) अनेक प्रतिबिंब तीनों दर्पणों पर बार-बार परावर्तन से बनते हैं। (a) उसे मनके और उनका बस एक प्रतिबिंब दिखेगा, भरा हुआ दोहराता प्रतिरूप नहीं। (b) बहुमूर्तिदर्शी के तीनों दर्पण रोशनी को आपस में बार-बार लौटाते हैं; इसी से एक मनके की कई छवियाँ बनती हैं और प्रतिरूप भरा हुआ दिखता है (पेज 165)। काला कागज़ प्रकाश को दर्पण की तरह परावर्तित नहीं करता, और अकेला समतल दर्पण हर मनके की बस एक ही छवि दिखाता है (पेज 168)। (किताब में दर्पण की जगह मोटे परावर्तक पेपर की पट्टियाँ भी चल जाती हैं, पेज 164; काला चार्ट पेपर वैसा नहीं है।)
प्रश्न 8. नाई की दुकान में बाल कटवाने के बाद नाई आपके सिर के पीछे एक हाथ वाला दर्पण पकड़ता है, और आप सामने दीवार के बड़े दर्पण में अपने सिर का पिछला भाग देख लेते हैं। आपके सिर के पीछे से चला प्रकाश आपकी आँख तक किस रास्ते से पहुँचता है? इस अध्याय का कौन-सा उपकरण भी यही तरीका अपनाता है?
उत्तर: सिर का पिछला भाग → हाथ का दर्पण → दीवार का दर्पण → आँख; परिदर्शी। सिर के पिछले भाग से प्रकाश सीधी रेखा में हाथ वाले दर्पण तक जाता है। वहाँ परावर्तन से उसकी दिशा बदलती है और वह दीवार के दर्पण की ओर जाता है। दीवार का दर्पण उसे फिर परावर्तित करके आपकी आँख तक भेजता है। दो समतल दर्पणों पर एक के बाद एक परावर्तन से वह चीज़ दिखती है जो सीधे नहीं दिखती; परिदर्शी भी Z जैसे मुड़े बॉक्स के दो समतल दर्पणों से यही करता है। (परावर्तन, पेज 160; परिदर्शी, पेज 164।)
11. इस अध्याय पर AI का जवाब कैसे परखें
- किताब का नया-पुराना देखिए। AI लेंस या अवतल-उत्तल दर्पण की बात करे, तो वह पुरानी किताब का अध्याय पढ़ा रहा है।
- "उल्टा" शब्द पर रुकिए। AI कहे कि समतल दर्पण का प्रतिबिंब उल्टा होता है, तो पूछिए: ऊपर-नीचे या बायाँ-दायाँ? सही उत्तर है केवल बायाँ-दायाँ।
- छाया के तीनों हिस्से माँगिए। छाया वाले उत्तर में स्रोत, अपारदर्शी वस्तु और पर्दा, तीनों का नाम होना चाहिए।
अंग्रेज़ी में इसी अध्याय के प्रश्न: Class 7 Light: Shadows and Reflections, practice questions with answers। AI से पढ़ाई पर और: AI से पढ़ाई कैसे करें, नकल किए बिना।
कक्षा 7 विज्ञान का अभ्यास
- ऑनलाइन, तुरंत जाँच के साथ: कक्षा 7 का अभ्यास पेज (इस अध्याय का सेट अभी नहीं है)।
- छापने लायक, उत्तर के साथ: कक्षा 7 की वर्कशीटें।
- अगली कक्षा की नई किताब, हिंदी में: कक्षा 8 विज्ञान अध्याय 1 (जिज्ञासा)।
CMDLearn कहाँ फिट होता है
CMDLearn कक्षा 1 से 10 के लिए एक AI ट्यूटर बना रहा है, जो एक-एक कदम समझाता है और बच्चे के उत्तर की जाँच करता है, पर लिखने का काम बच्चे पर ही छोड़ता है। यह अभी विकसित हो रहा है और अभी कोई बच्चा इसका उपयोग नहीं करता। जब आज़माने लायक कुछ हो, तब खबर पाने के लिए आप वेटलिस्ट से जुड़ सकते हैं।
स्रोत
सब 5 नवंबर 2026 को खोलकर पढ़े गए। पेज संख्याएँ पाठ्यपुस्तक की छपी हुई पेज संख्याएँ हैं; इस अध्याय में छपा पेज = PDF पेज + 152।
- NCERT, जिज्ञासा, कक्षा 7 के लिए विज्ञान की पाठ्यपुस्तक (प्रथम संस्करण मई 2025, पुनर्मुद्रण अप्रैल 2026), अध्याय 11 "प्रकाश: छाया एवं परावर्तन", पेज 153 से 168: ncert.nic.in/textbook/pdf/ghcu111.pdf
- NCERT, जिज्ञासा, कक्षा 7, आरंभिक पेज (संस्करण और अध्याय-सूची): ncert.nic.in/textbook/pdf/ghcu1ps.pdf
- NCERT, Curiosity, Grade 7 (अंग्रेज़ी संस्करण), Chapter 11 "Light: Shadows and Reflections": ncert.nic.in/textbook/pdf/gecu111.pdf
अध्याय का नाम, पेज संख्याएँ और परिभाषाएँ ऊपर की पाठ्यपुस्तक से हैं। व्याख्याएँ, उदाहरण, प्रश्न और उत्तर हमारे अपने हैं, और हर उत्तर का आधार स्क्रिप्ट से उद्धृत पेज पर जाँचा गया है। यह गाइड सामान्य जानकारी है; अपने शिक्षक और पाठ्यपुस्तक की बात मानें।
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